नगर पालिक निगम रायपुर में अनुकंपा नियुक्ति में गंभीर अनियमितता उजागर; अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग ने आयुक्त से की कड़ी कार्रवाई की मांग



नगर पालिक निगम रायपुर में अनुकंपा नियुक्ति में गंभीर अनियमितता उजागर; अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग ने आयुक्त से की कड़ी कार्रवाई की मांग
रायपुर, छत्तीसगढ़ | 18.03.2026
नगर पालिक निगम रायपुर के अंतर्गत अनुकंपा नियुक्ति प्रकरणों में नियमों की अनदेखी और सूचना के अधिकार के तहत जानकारी छिपाने का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग के छत्तीसगढ़ प्रदेश महासचिव श्री प्रदुमन शर्मा ने इस प्रशासनिक विफलता के विरुद्ध नगर निगम आयुक्त को शिकायत प्रेषित की है।
श्री शर्मा द्वारा यह आरोप लगाया गया है कि आदेश क्रमांक 1046/2025 के माध्यम से बिना उचित आयु सीमा सत्यापन के अनुकंपा नियुक्ति आदेश जारी किए गए हैं। श्री शर्मा के अनुसार, यह सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों और सेवा नियमों का खुला उल्लंघन है। संबंधित अधिकारियों द्वारा “प्रपत्रों के बदलाव और कार्य की अधिकता” जैसे तर्कों को श्री शर्मा ने हास्यास्पद और प्रशासनिक अदूरदर्शिता का परिचायक बताया है। उन्होंने प्रश्न उठाया है कि क्या विभाग इतने संवेदनशील मामलों में बिना सत्यापन के हस्ताक्षर करने की कार्यप्रणाली अपनाता है?
शिकायत में यह भी स्पष्ट किया गया है कि डीम्ड जन सूचना अधिकारी (उन्हें भी इस मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है) द्वारा दोषी अधिकारियों पर की गई वास्तविक ‘दंडात्मक कार्यवाही’ की जानकारी को जानबूझकर छिपाया जा रहा है। मांगे गए विशिष्ट दस्तावेजों के स्थान पर केवल ‘कारण बताओ नोटिस’ की प्रतियां प्रदान करना सूचना के अधिकार का हनन है।
इस मामले को लेकर छत्तीसगढ़ अध्यक्ष गुरदीप सिंह ने कहा कि अपात्रों को अनुचित लाभ पहुँचाना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 (अवसर की समानता) का सीधा उल्लंघन है, जिससे उन पात्र अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन हो रहा है जो नियमानुसार अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।यह मामला केवल एक प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का प्रयास है।
श्री प्रदुमन शर्मा ने प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा करते हुए मांग की है कि अनियमितता के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल विभागीय जांच संस्थित कर उनकी जवाबदेही तय की जाए। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों की सेवा पुस्तिका में प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज हो और वेतन वृद्धि रोकने जैसे दंडात्मक आदेशों को सार्वजनिक किया जाए।उन्होंने निगम आयुक्त से आग्रह किया है की जन सूचना अधिकारी को निर्देशित कर 07 दिवस के भीतर वांछित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएं ताकि मामले की पारदर्शिता बनी रहे.

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