48 करोड़ के मुआवजा घोटाले में नवापारा के नायब तहसीलदार भी आरोपित,कार्यवाही नही
पहले से अर्जित जमीन को फिर सरकारी जमीन बताया, कहीं भूमिस्वामी की जगह दूसरे को मुआवजा; जांच में नायब तहसीलदार आठ लोकसेवक की हो चुकी है गिरफ्तारी
, रायपुर : भारत माला परियोजना के रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक गलियारे के लिए हुए भू-अर्जन में करीब 48 करोड़ 3 लाख 18 हजार 506 रुपये की सरकारी क्षति के मामले में गोबरा नवापारा के तत्कालीन नायब तहसीलदार पवन ठाकुर भी आरोपित बनाए गए । लेकिन उन पर कोई कार्यवाही नहीं की गई।एनसीआरबी में दर्ज प्रकरण में जांच के आधार पर उन्हें उन आठ लोकसेवकों में शामिल किया गया है, जिन पर पद का दुरुपयोग कर मुआवजा लेने वालों के साथ आपराधिक षड्यंत्र करने का आरोप है। मामला सिर्फ गलत भुगतान तक सीमित नहीं रहा। जांच में पहले से अधिग्रहित सरकारी जमीन को दोबारा अधिग्रहण के दायरे में लाकर मुआवजा दिलाने, निजी जमीन के खसरे टुकड़ों में बांटने और वास्तविक भूमिस्वामी के बजाय दूसरे व्यक्ति को भुगतान कराने जैसे मामले सामने आए हैं।नायकबांधा में वर्ष 1959-60 में जलाशय के लिए अर्जित जमीन का रिकार्ड दुरुस्त नहीं हुआ। जांच के अनुसार इसी का फायदा उठाकर बाद में उसी जमीन को निजी भूमि की तरह पेश किया गया और भारत माला परियोजना में फिर मुआवजा हासिल कर लिया गया। जांच रिपोर्ट में तत्कालीन नायब तहसीलदार लखेश्वर प्रसाद किरण सहित राजस्व अमले की भूमिका को गंभीर माना गया है।उरला के मामले में तो 1 करोड़ 36 लाख 92 हजार 506 रुपये ऐसे व्यक्ति को भुगतान का उल्लेख है, जो जांच के अनुसार संबंधित जमीन का भूमिस्वामी नहीं था। जांच में कहा गया है कि खसरा 871/6 और 871/20 की जमीन बिल्डवेल के संचालक नरेन्द्र कुमार पारख के नाम दर्ज थी, जबकि मुआवजा हृदय लाल गिलहरे को दे दिया गया।नायब तहसीलदार पर क्या आरोपजांच के मुताबिक नायब तहसीलदार समेत राजस्व अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए—पहले से अर्जित सरकारी जमीन को दोबारा मुआवजे के लिए इस्तेमाल होने दिया।जमीन के पुराने रिकार्ड की स्थिति स्पष्ट नहीं कराई।अर्जित भूमि को दोबारा निजी जमीन के रूप में इस्तेमाल किए जाने का रास्ता खुला छोड़ा।मूल खसरों को टुकड़ों में विभाजित कर मुआवजे की प्रक्रिया में इस्तेमाल किए जाने दिया।भूमिस्वामी के स्थान पर दूसरे व्यक्ति को मुआवजा भुगतान की स्थिति बनी।जांच रिपोर्ट के अनुसार इस पूरे मामले में अन्य अधिकारियों और मुआवजा प्राप्त करने वालों के साथ आपराधिक षड्यंत्र की प्रथमदृष्टया भूमिका सामने आई।48 करोड़ की क्षति का आकलन, जांच अभी बाकीएनसीआरबी में दर्ज जांच विवरण के अनुसार अब तक सामने आए मामलों में शासन को 48 करोड़ 3 लाख 18 हजार 506 रुपये की हानि का आकलन किया गया है। जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत माला परियोजना से प्रभावित कई गांवों और खसरों की जांच अभी बाकी है। ऐसे में सरकारी नुकसान की रकम और बढ़ने की संभावना जताई गई है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस राजस्व तंत्र की निगरानी में जमीन की स्थिति, स्वामित्व और अधिग्रहण का सत्यापन होना था, उसी तंत्र के अधिकारियों पर गलत मुआवजा दिलाने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगा।

