रायपुर: कुछ अवसर केवल कैलेंडर की तारीख नहीं होते, वे स्मृतियों, भावनाओं और संकल्पों को एक साथ जोड़ने वाले पड़ाव बन जाते हैं। 17 सितंबर ऐसा ही एक अवसर है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के साथ इस वर्ष उनकी 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा-यात्रा का संदर्भ जुड़ रहा है। वर्ष 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरू हुई शासन-यात्रा से लेकर देश के प्रधानमंत्री के रूप में निरंतर सार्वजनिक दायित्व निभाने तक का यह कालखंड भारतीय लोकतांत्रिक जीवन में एक महत्वपूर्ण अध्याय रहा है।
इसी उपलक्ष्य पर ‘आशीर्वाद का दीया’ जनमानस के आभार और संकल्प की एक आत्मीय अभिव्यक्ति के रूप में सामने आ रहा है। दीप भारतीय संस्कृति में केवल प्रकाश का प्रतीक नहीं है, वह शुभकामना, आशा और संकल्प का भी प्रतीक है। जब 17 सितंबर की शाम घर-घर ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित होगा, तो उसके प्रकाश में बीते 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा-यात्रा की स्मृतियां और आने वाले भारत के प्रति नागरिकों की आकांक्षाएं एक साथ दिखाई देंगी। यह दीप उस भाव को अभिव्यक्त करेगा जिसमें जनमानस अपनी शुभकामनाओं के साथ राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का संकल्प भी दोहराता है।
पिछले वर्षों में जनधन, उज्ज्वला, स्वच्छ भारत, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास, जल जीवन मिशन, डिजिटल इंडिया, पीएम-किसान और स्टार्टअप इंडिया व्होकल-फॉर-लोकल और एआई की उपयोगिता को बढ़ावा जैसी विभिन्न पहलों के माध्यम से शासन और नागरिक जीवन के अनेक क्षेत्रों में परिवर्तन के प्रयास किए गए हैं। इन पहलों की उपलब्धियों और प्रभावों पर अलग-अलग मत हो सकते हैं, लेकिन इनका एक साझा पक्ष यह है कि इन्होंने विकास और जनभागीदारी की चर्चा को देश के गांव, गरीब, किसान, महिला, युवा और सामान्य परिवार के जीवन से जोड़ने का प्रयास किया।
‘आशीर्वाद का दीया’ इसी व्यापक जनभावना को एक प्रतीकात्मक रूप देता है’’सेवा के प्रति आभार, वर्तमान के प्रति जिम्मेदारी और विकसित भारत /2047 के लिए सामूहिक संकल्प का है।’’ एक दीप जब दूसरे दीप से जुड़ता है तो प्रकाश बढ़ता जाता है। उसी तरह नागरिकों की छोटी-छोटी सहभागिताएं मिलकर राष्ट्र निर्माण के बड़े संकल्प को शक्ति देती हैं। यही इस दीप की सबसे बड़ी सार्थकता है।
17 सितंबर को ‘आशीर्वाद का दीया’ इसी अभियान का आत्मीय और सांस्कृतिक प्रतीक है। भारतीय परंपरा में दीप केवल प्रकाश का साधन नहीं, बल्कि आशा, ज्ञान, सकारात्मकता और संकल्प का प्रतीक रहा है। जब कोई दीप किसी शुभ अवसर पर जलता है तो उसमें केवल तेल और बाती का प्रकाश नहीं होता, उसमें शुभकामनाओं और बेहतर भविष्य की कामना भी जुड़ी होती है। इसी भाव के साथ ‘आशीर्वाद का दीया’ 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा के प्रति नागरिक आभार और राष्ट्र निर्माण के अगले चरण के लिए सामूहिक संकल्प का प्रतीक बनता है।
पिछले वर्षों में देश में अनेक ऐसी योजनाएं और सुधार लागू हुए हैं, जिनका सीधा संबंध सामान्य नागरिक के जीवन से है। प्रधानमंत्री जन-धन योजना ने करोड़ों लोगों को औपचारिक बैंकिंग और स्वरोजगार व्यवस्था से जोड़ने में भूमिका निभाई। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और डिजिटल भुगतान के विस्तार ने सरकारी सहायता तथा आर्थिक लेन-देन की व्यवस्था को अधिक डिजिटल बनाया। डिजिटल इंडिया के माध्यम से सरकारी सेवाओं और तकनीक की पहुंच को व्यापक बनाने पर जोर दिया गया। आज डिजिटल माध्यम सामान्य नागरिक के दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।
स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के माध्यम से गरीब परिवार की महिलाओं को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने की दिशा में पहल हुई। जल जीवन मिशन ने ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुंचाने को प्राथमिकता दी। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से गरीब परिवारों के पक्के घर के सपने को पूरा करने का प्रयास हुआ। आयुष्मान भारत ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का दायरा बढ़ाया। इन पहलों ने विकास के उस दृष्टिकोण को सामने रखा जिसमें बुनियादी सुविधाओं को नागरिक जीवन की गरिमा से जोड़ा गया।
किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी प्रत्यक्ष सहायता योजना लागू की गई। स्टार्टअप इंडिया और नवाचार से जुड़ी पहलों ने युवाओं को रोजगार खोजने वाले से रोजगार देने वाले बनने की दिशा में प्रोत्साहित किया। मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन जैसी पहलों ने देश में विनिर्माण और घरेलू उत्पादन की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया। वस्तु एवं सेवा कर जैसे आर्थिक सुधारों ने देश के कर ढांचे में व्यापक परिवर्तन किया। नई शिक्षा नीति, अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना जैसे कदमों ने भी बदलते भारत की नई तस्वीर को आकार दिया है।
इन पहलों की चर्चा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी भी सरकार की नीतियों का वास्तविक अर्थ तब सामने आता है, जब उनका प्रभाव नागरिक के दैनिक जीवन में दिखाई देता है। एक बैंक खाता खुलना, घर तक पानी पहुंचना, गरीब परिवार को पक्का आवास मिलना, किसान को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता मिलना, डिजिटल माध्यम से भुगतान होना या युवा का अपना उद्यम शुरू करना ये सभी बदलाव विकास को आंकड़ों से निकालकर व्यक्ति के जीवन से जोड़ते हैं।
आज भारत के सामने अगला बड़ा लक्ष्य विकसित भारत 2047 का है। स्वतंत्रता की शताब्दी तक भारत को विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की यह परिकल्पना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। इसमें किसान, श्रमिक, युवा, महिला, उद्यमी, विद्यार्थी, वैज्ञानिक, कर्मचारी और समाज के प्रत्येक वर्ग की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसलिए ‘सेवा संकल्प अभियान’ का मूल संदेश भी जनभागीदारी से जुड़ता है।
17 सितंबर की शाम जब ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित होगा, तब वह दीप बीते 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा-यात्रा के प्रति आभार का प्रतीक होगा, लेकिन उसका प्रकाश केवल अतीत तक सीमित नहीं रहेगा। वह आने वाले भारत की आकांक्षाओं को भी रोशन करेगा। एक दीप से दूसरे दीप का जलना उस विचार का प्रतीक है कि राष्ट्र निर्माण किसी एक व्यक्ति या संस्था का कार्य नहीं, बल्कि सामूहिक सहभागिता की सतत प्रक्रिया है।

