शिक्षण प्रक्रिया को बेहतर बनाने से, बदलेगी पढ़ाई की तस्वीर”
प्राथमिक शिक्षा की नींव मजबूत करने और कक्षा -कक्ष में शिक्षण की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से हाई स्कूल बालोद में बुधवार को टीचिंग लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे (टीएलपीएस)2025 की रिपोर्ट पर जिला स्तरीय परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई ।स्कूल शिक्षा विभाग ,एससीईआरटी छत्तीसगढ़ ,समग्र शिक्षा,लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) और टाटा ट्रस्ट के संयुक्त तत्वाधान में हुई कार्यशाला में कक्षा 1 और 2 के शिक्षण का साक्ष्य -आधारित विश्लेषण किया गया। जिला शिक्षा अधिकारी दीपक दुबे ने कहा कि केवल नीति और प्रशिक्षण से बदलाव संभव नहीं है ,जब तक उसका असर बच्चों की सीखने की क्षमता पर दिखाई न दे । उन्होंने कहा कि आगामी शिक्षक प्रशिक्षण को कक्षा की वास्तविक चुनौतियों से जोड़ा जाएगा। भाषा शिक्षण में बच्चों के साथ में उच्च स्तरीय चिंतन कौशल के सवालों से बच्चों में पूर्वज्ञान ,अनुभव ,सोचने और तर्क करने की क्षमताओं का विकास होगा एवं गणित में रटने के बजाय “क्यों और कैसे” जैसे सवालों के जरिए अवधारणात्मक समझ विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। कक्षा -कक्ष में प्रिंट रिच सामग्री का प्रदर्शन बच्चों के स्तर का होना चाहिए एवं बच्चों के साथ में मातृभाषा में संवाद करते हुए शिक्षण कार्य करवाएँ एवं बच्चों के साथ में भाषा एवं गणित शिक्षण में शिक्षण सामग्री का उपयोग करें । उन्होंने कहा कि” हमारे शिक्षकों एवं संकुल अकादमिक समन्वयकों को कक्षा -कक्षीय प्रक्रियाओं पर कार्य को बेहतर करने की आवश्यकता पर जोर दिया ।जिला मिशन समन्वयक अवन कुमार जागड़े ने कहा कि “ बच्चों के साथ में शिक्षण कार्य के दौरान गतिविधि एवं बालकेन्द्रित शिक्षण प्रक्रिया पर मुख्य ध्यान देने की आवश्यकता हैं ।“ शिक्षण प्रक्रिया के दौरान बच्चों के सीखने का नियमित रुप से आकलन करते हुए कक्षा स्तर में पीछे छूट रहे बच्चों के साथ में उपचारात्मक शिक्षण पर जोर दिया जाना चाहिए ।जिला कार्यक्रम प्रबंधक रामरतन मीणा के द्वारा टीएलपीएस कार्यक्रम की रुपरेखा को साझा करते हुए कहा कि इस रिपोर्ट के डाटा के अनुसार हमारे जिले की कक्षाओं में अपनाई जा रही शिक्षण प्रक्रियाओं को देख पाएँगे एवं उसी के अनुसार आगामी कार्ययोजना का निर्माण कर सकेंगे । सर्वे में 82 प्रतिशत कक्षाओं में समूह या व्यक्तिगत गतिविधियों के दौरान बच्चों के कार्य का नियमित निगरानी नहीं होने ,जबकि 70 प्रतिशत कक्षाओं में बच्चों के अलग -अलग सीखने के स्तर के अनुरूप शिक्षण पद्धति का अभाव पाया गया । वही 22 प्रतिशत शिक्षण समय बिना किसी शैक्षणिक गतिविधि के बीतने की बात सामने आई । कार्यशाला में विशेषज्ञों ने सहयोगात्मक व्यवहार और मातृभाषा आधारित शिक्षण सामग्री पर जोर दिया। सर्वे में सामने आई कक्षा की चुनौतियाँ एलएलएफ के सीनियर स्पेशलिस्ट (बहुभाषी शिक्षा) संजय गुलाटी ने टीएलपीएस 2025 के निष्कर्ष प्रस्तुत किए । यह सर्वे कबीरधाम और नारायणपुर जिलों की 100 प्राथमिक कक्षाओं में नवंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच 200 से अधिक घंटे के प्रत्यक्ष अवलोकन पर आधारित है ।रिपोर्ट के अनुसार 91 प्रतिशत शिक्षक एफएलएन प्रशिक्षित है और 66 प्रतिशत शिक्षक बच्चों की मातृभाषा जानते हैं ,लेकिन कक्षा में शिक्षण के स्तर पर कई चुनौतियाँ सामने आई ।इस कार्यक्रम में जिले के पाँचों विकासखंड से ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ,विकासखंड स्रोत केंद्र समन्वयक, सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी ,संकुल अकादमिक समन्वयक ,जिला स्रोत , ब्लॉक स्रोत समूह के सदस्य एवं शिक्षकों के द्वारा सक्रिय भागीदारी की गई ।पैनल चर्चा के अंतर्गत पाँचों विकासखंड से चयनित 6 स्टेक होल्डर (ABEO, DRGs, BRGs, CACs) के साथ TLPS सर्वे के मुख्य रिपोर्ट/आंकड़ों के आधार पर चर्चा किया गया, जिसमें गुण्डरदेही ABEO श्री खेमराज साहू महत्वपूर्ण भूमिका रही । LLF टीम से विजय साहू और मुकुंद राय के द्वारा चर्चा को आगे बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भागीदारी रही ।

