रायपुर। दंतेवाडा में चुनावी बिगुल बज चुका है। बस्तर की राजनीति में सहानभूति का बडां महत्व है। जिसका उदाहरण 2013 के विधानसभा चुनाव में देखा जा चुका है। बस्तर टाइगर महेन्द्र कर्मा की शहादत के बाद 2013 में कांग्रेस नें उनकी धर्मपत्नी देवती कर्मा पर दांव खेला।कांग्रेस का ये दांव 2013 में एकदम सटीक साबित हुआ। बस्तरवासियों ने नक्सली हमलें में शहीद महेन्द्र कर्मा की पत्नी देवती कर्मा के साथ पूरी सहानभूति जताई और जीत का सेहरा देवती कर्मा के सिर बंध गया। एक समान्य घरेलू महिला देवती कर्मा दंतेवाडा विधायक देवती कर्मा बन गई। इस बात ने साबित कर दिया कि बस्तर की राजनीति में सहानभूति का बडा बोल बाला है।जल्द ही दंतेवाडा उपचुनाव होना है। सहानभूति की राजनीति को भाजपा और कांग्रेस दोनो ही पर्टियों बडा ही जोर दिया है। कांग्रेस ने पूर्व विधायक देवती कर्मा को प्रत्याशी घोषित किया है। भाजपा ने ओजस्वी मंडावी को चुनावी मैदान में उतारा है।
शहीद की पत्नी का मुकाबला शहीद की ही पत्नी से

