चलते-चलते… गीतों में झलकी किशोर दा की यादें
श्री संगीत ग्रुप कांकेर ने दी सुर सम्राट किशोर कुमार को संगीतमय श्रद्धांजलि
कांकेर,
श्री संगीत ग्रुप कांकेर द्वारा स्वर्गीय संगीत सम्राट किशोर कुमार को एक संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की गई। यह आयोजन आंग्ल वैदिक स्कूल के प्रांगण में संध्या बेला से देर रात तक चला, जिसमें ग्रुप के सदस्यों व संगीत प्रेमियों ने भावभीनी प्रस्तुतियों के माध्यम से किशोर दा को याद किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ ग्रुप की एडमिन एवं संचालिका श्रीमती कल्पना जायसवाल द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं वंदना गायन से हुआ। इसके पश्चात मंच पर किशोर कुमार के अमर गीतों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दी गईं।
“जिंदगी का सफर है ये कैसा सफर”, “कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन”, “ओ साथी रे”, “वो शाम कुछ अजीब थी”, “मेरे सपनों की रानी” जैसे सुपरहिट गीतों को जब गायकों ने सुरों में पिरोया, तो माहौल संगीतमय हो उठा। दर्शकों ने भी देर रात तक कार्यक्रम का आनंद लिया और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
इस आयोजन की एक विशेष बात यह रही कि कुछ नए दर्शकों को भी मंच प्रदान किया गया, जिन्होंने भी अपनी गायन प्रतिभा से सबको प्रभावित किया। यह पहल श्री संगीत ग्रुप की समावेशी सोच और संगीत के प्रति खुलेपन को दर्शाती है।
कार्यक्रम में दीपक मुखर्जी, ताप्ती मुखर्जी, बलराम भट्ट, रमेश ध्रुव, अजय गुप्ता, गीता गुप्ता, संतोष शर्मा, नंदकिशोर शर्मा, लिखित यादव, निरंजन जैन, कल्पना जायसवाल, विजय गुप्ता, डॉ. पी. एल. सरल जैसे कई प्रतिभाशाली कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया।
कार्यक्रम का संचालन कुशलता से कल्पना जायसवाल ने किया। उन्होंने सभी कलाकारों और दर्शकों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि किशोर दा जैसे कलाकार केवल युगपुरुष नहीं, बल्कि एक भावना हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी दिलों में जीवित रहेंगे।
कांकेर,
श्री संगीत ग्रुप कांकेर द्वारा स्वर्गीय संगीत सम्राट किशोर कुमार को एक संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की गई। यह आयोजन आंग्ल वैदिक स्कूल के प्रांगण में संध्या बेला से देर रात तक चला, जिसमें ग्रुप के सदस्यों व संगीत प्रेमियों ने भावभीनी प्रस्तुतियों के माध्यम से किशोर दा को याद किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ ग्रुप की एडमिन एवं संचालिका श्रीमती कल्पना जायसवाल द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं वंदना गायन से हुआ। इसके पश्चात मंच पर किशोर कुमार के अमर गीतों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दी गईं।
“जिंदगी का सफर है ये कैसा सफर”, “कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन”, “ओ साथी रे”, “वो शाम कुछ अजीब थी”, “मेरे सपनों की रानी” जैसे सुपरहिट गीतों को जब गायकों ने सुरों में पिरोया, तो माहौल संगीतमय हो उठा। दर्शकों ने भी देर रात तक कार्यक्रम का आनंद लिया और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
इस आयोजन की एक विशेष बात यह रही कि कुछ नए दर्शकों को भी मंच प्रदान किया गया, जिन्होंने भी अपनी गायन प्रतिभा से सबको प्रभावित किया। यह पहल श्री संगीत ग्रुप की समावेशी सोच और संगीत के प्रति खुलेपन को दर्शाती है।
कार्यक्रम में दीपक मुखर्जी, ताप्ती मुखर्जी, बलराम भट्ट, रमेश ध्रुव, अजय गुप्ता, गीता गुप्ता, संतोष शर्मा, नंदकिशोर शर्मा, लिखित यादव, निरंजन जैन, कल्पना जायसवाल, विजय गुप्ता, डॉ. पी. एल. सरल जैसे कई प्रतिभाशाली कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया।
कार्यक्रम का संचालन कुशलता से कल्पना जायसवाल ने किया। उन्होंने सभी कलाकारों और दर्शकों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि किशोर दा जैसे कलाकार केवल युगपुरुष नहीं, बल्कि एक भावना हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी दिलों में जीवित रहेंगे।

