*नारी सम्मान मे छत्तीसगढ़ी भाषा में महिला दिवस पर कविता*

**नारी सम्मान मे छत्तीसगढ़ी भाषा में महिला दिवस पर कविता**

8 मार्च महिला दिवस पर एक शिक्षक के द्वारा समर्पित रचना
1- मै नारी हू हा मै नारी हूयही सोच के मै इतराती हूमै गुणो की खान हू ईश्वर का वरदान तोड के हर कुप्रथाओं का पिंजरा आसमान में उड़ जाऊंगी फिर पीछे मुड़कर ना देखेगी आगे बढ़ते जाऊंगी मुझे अभी है बहुत काम करना आगे बढ़ते जाना है गुलामी की सभी जंजीर तोड़कर आगे जाना है ज्ञान रूपी तलवार लेकर अज्ञानता को दूर भगाना है मुझ पर है बड़ी जिम्मेदारी देश को आगे बढ़ाना है दुनिया के कोने-कोने में अपना नाम कमाना है फुल जितनी कोमल हू तो पत्थर जैसी कठोर हां मैं नारी हूं यही सोचकर मैं इतराती हूं हां मैं नारी हूं यही सोच मै इतराती हूं
2नारी निंदा मत करो नारी सुख की खान नारी से नर होत है ध्रुव प्रहलाद समान नारी सब की शान है भारत का अभिमान नारी से जग रोशन है घर-घर की है शान नारी फूल गुलाब का सुगंधता का एहसास नारी प्रेम का सागर है खुशियों का संसार नारी त्याग की मूरत है संस्कारो की जान नारी सब्जियों में नमक है तो खीर में शक्कर जैसी शान नारी से घर रोशन है नई बिन सुना संसार ईश्वर का वरदान है नारी शक्ति का अवतार नरो की पहचान है नारी बच्चों की है जान नारी से घर पूर्ण है नारी की शक्ति महाननारी की शक्ति महान
3–आगे महिला दिवस के तिहार,नारी शक्ति के तिहार |जम्मो मनखे ह मनाथे, आनी बानी बात बताथे ||
8 मार्च महिला परब कहाथे |पारा पारा तिहार मनाथे ||भाषण गीत सम्मान कराथे,नारी के मान ल गाथे ||इही दिन बस माइन लोगन के, गुण गांवथे | बांकी दिन ओला बिसरावथे || जम्मो मनखे मन मनावथे आनीबानी के बात ल बतावतथे| 8 मार्च ह महिला दिवस कहावथे आज जगह-जगह तिहार मनावथे || भाषण गीत सम्मान ल करावथे इही दिन बस माइन लोगन मन के गुण गावत हे | आगे महिला दिवस के तिहार अनिबानी के तिहार| मास्टरनी डॉक्टरनी अउ न जाने का का का बनथे| आज अपन गुण मंन ला जनावथे|| सबो काम ल करत हे,तभो ले सुनत हे, यै नारी तै हस महान, अपन अंतस ल पहिचान पुरुष के बिना,तोर काम नइ बनय|ये बार बार सुनावथे ||
पर नारी बिना जगह नई चलय,येला काबर भुलावथे|| नारी तै सुरक्षित नई हस,रोज घटना बतावथे |आज समाज में जगह-जगह, पिशाच मन ह घुमत है |नियत म एखर खोट हे,अउ नारी मे खोट बतावथे||आगे महिला दिवस के तिहार, आनी बानी के तिहार|जम्मौ मनखे मन मनावथे|| आज 8 मार्च ह महिला दिवस कहावत हे ||
काव्य संकलन स्वरचित
श्रीमती सुनीता शर्मा
(शिक्षिका शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चंगोरा भाठा दक्षिण रायपुर छग.)

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