हाईकोर्ट के आदेश के बाद, छत्तीसगढ़ पैरंट्स एसोसिएशन के द्वारा, ट्यूशन फीस को परिभाषित व अनुमोदित करने हेतु सांसद को ज्ञापन

हाईकोर्ट के आदेश के बाद, छत्तीसगढ़ पैरंट्स एसोसिएशन के द्वारा, ट्यूशन फीस को परिभाषित व अनुमोदित करने हेतु सांसद को ज्ञापन

रायपुर। छत्तीसगढ़ पैरंट्स एसोसिएशन के प्रदेश प्रवक्ता व जिलाध्यक्ष दिनेश शर्मा ने कहा कि, एसोसिएशन ने सांसद श्रीमान सुनील सोनी जी को ज्ञापन देकर, प्रदेश प्रवक्ता दिनेश शर्मा व ज़िला सचिव पनेश त्रिवेदी ने माँग की, कि जिला शिक्षा अधिकारी, एवं उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर ट्यूशन फीस अनुमोदित करने हेतु , एवं शिकायतों पर तुरंत कार्यवाही हेतु निवेदन किया।

सांसद जी ने जल्द ही जिला शिक्षा सचिव एवं अधिकारियों को इस मामले में संज्ञान लेने हेतु पत्र लिखकर एसोसिएशन को सूचना देने हेतु निर्देश जारी किए ।

प्रदेश प्रवक्ता दिनेश शर्मा ने बताया कि, छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन ने ज्ञापन सौंपते हुये माननीय महोदय से हम निवेदन करते हैं, कि निम्न बिंदुओं पर आदेश करवाकर, इस कोरोना काल में अभिभावकों व स्टूडेंट्स को स्कूलों की मनमानी व दोहरी प्रताड़ना होने से बचायें…
1.) निजी स्कूलों की ट्यूशन फीस, वर्तमान कोरोना काल में आनलाइन पढ़ाई की कितनी होनी चाहिए, इसका निर्धारण करते हुए, सरकार से अनुमोदित ट्यूशन फीस की घोषणा की जाये।

2) निजी स्कूलों की मनमानी को रोकने व अभिभावकों व स्टूडेंट्स के हितों की रक्षा करते हुए, निजी स्कूलों पर सरकार व हाईकोर्ट की अवहेलना करने पर कड़ी कार्रवाई की जाये, लिपा-पोती या नोटिस पे नोटिस का बहाना अधिकारी ना बनाये, कार्यवाही करें। लगभग 150 पालकों के द्वारा शिकायत करने के बाद भी, अभी तक सम्बन्धित स्कूल पर पर कार्यवाही क्यों नहीं हुई, और उस स्कूल का आय-व्यय का व्यौरा क्यों नहीं दिया गया पालकों को, जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा सूचना के अधिकार में मांगने पर।

3) जब माननीय हाईकोर्ट ने ये अधिकार दिया है कि जो अभिभावक ट्यूशन फीस देने में अक्षम हैं निजी संस्था होने के बावजूद, स्कूलों को अपने दस्तावेज दिखायें
वैसे ही अभिभावकों को भी सम्बन्धित स्कूलों का आय-व्यय का ब्यौरा, आडिट रिपोर्ट व अन्य दस्तावेज दिखाया जाये जिनसे वो टीचरों को सैलरी नहीं दे पा रहे बोलकर मा. उच्च न्यायालय से ट्यूशन फीस हेतु आदेश लाये।

आपको यह जानकर दुख होगा कि, पिछले कई वर्षों से निजी स्कूलों के द्वारा बिना सरकार के द्वारा अनुमोदित मनमानी ट्यूशन फीस वसूलते हुए अभिभावकों को प्रताड़ित किया जा रहा है,  कई स्कूलों द्वारा मिश्रित फीस को ही ट्यूशन फीस की तर्ज पर पिछले कई वर्षों से अभिभावकों से वसूला जा रहा है, जिससे की हर समाज, हर वर्ग,  हर संगठन के अभिभावक पीडि़त हैं।


प्रदेश के 8 हजार प्राईवेट स्कूलों में लगभग 15 लाख बच्चे अध्ययनरत् है। मा. उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय दिनांक 9 जुलाई 2020 में प्राईवेट विद्यालयों को सिर्फ ट्युशन फीस लेने की अनुमति दि  है और इस वर्ष ट्युशन फीस में वृद्धि करने की अनुमति नही दि है इसके बावजूद कई प्राईवेट स्कूलों के द्वारा ट्युशन फीस में भारी वृद्धि कर पालको से फीस वसूली जा रही है।

हमने स्कूल शिक्षा सचिव और संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय, नवा रायपुर से ट्युशन फीस को परिभाषित कर फीस अनुमोदन कराने का आग्रह किया था लेकिन संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय, नवा रायपुर ने जानबूझकर हमारी मांगों पर ध्यान न देते हुए प्रदेश में संचालित 8 हजार प्राईवेट स्कूलों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ दिलाने की मंशा से दिनांक 31 जुलाई को पत्र जारी किया जिसमें सिर्फ मा. उच्च न्यायालय बिलासपुर के निर्णय की उन्ही कंडिकाओ(30,31,32 और 33) का उल्लेख किया गया है जंहा प्राईवेट स्कूलो को फीस वसूलने और टीचरों को वेतन देने के संबंध में लिखा हुआ है।
ट्युशन फीस को परिभाषित नही कर, प्राईवेट स्कूलों को मा. उच्च न्यायालय के आदेश के आड़ में मोटी फीस वसूलने का अवसर दिया जा रहा है और इस प्रकार कई प्राईवेट स्कूलों के द्वारा मा. उच्च न्यायालय बिलासपुर के आदेश दिनांक 9 जुलाई 2020 के आड़ में शिक्षण शुल्क/ट्युशन फीस के नाम पर मोटी फीस वसूल कर पालको का शोषण किया जा रहा है।

कई स्कूलों द्वारा ली जाने वाली फीस/शुल्क का विवरणः-
1.शिक्षण शुल्क
2.मेडिकल शुल्क
3.बिल्ड़िग शुल्क
4.मेंनटेंनेंश शुल्क
5.बागवानी शुल्क
6.योगा शुल्क
7.अमलगमेटेड फंड
8.निर्धन छात्र शुल्क
9.स्मार्ट क्लास
10.परिवहन शुल्क
11.वार्षिक शुल्क
12.एडमिशन शुल्क
13.डायरी शुल्क
14.आईडी कार्ड शुल्क
15.रेडकार्स शुल्क
16.परीक्षा शुल्क
17.क्रीड़ा शुल्क
18.विज्ञान शुल्क
19.स्काउड/गाईड शुल्क
20.पत्रिका शुल्क
21.छात्र समूह बीमा योजना शुल्क
22.क्रियाकलाप/एक्टिविटी शुल्क
23.लेट फीस
और ना जाने क्या-क्या शुल्क शिक्षा के नाम से लिया जा रहा है। जनसामान्य यह समझ नही पा रहा है कि ट्युशन फीस होता क्या है क्योंकि प्राईवेट स्कूलों के द्वारा अनेको मदों में फीस वसूला जाता है जिसमें से ट्युशन फीस एक मद होता है। कई प्राईवेट स्कूलों में नर्सरी की फीस ही 20 हजार से लेकर 40 हजार रूपया तक होता है जिसमें काॅपी-किताब, जूता-मोजा, टाई-ब्लेट और अलग -अलग दिन का अलग-अलग ड्रेस साम्मिल नही है और परिवहन या बस शुल्क भी अलग से लिया जाता है।
मा. उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद भी कई स्कूलों का नर्सरी का सिर्फ ट्युशन फीस ही 20 से 40 हजार रूपया है तो इन स्कूलों का नर्सरी का कुल फीस कितना होगा?

कई प्राईवेट स्कूलों ने तो सप्र्लस होने के बावजूद यानि लाभ की स्थिति होने के बावजूद फीस में वृद्धि कर दिया और बढ़ी हुई फीस ही वसूल कर रहे है जो मा. उच्च न्यायालय का निर्णय का उल्लघंन है। पालक असमंजस में है कि ट्युशन फीस होता क्या है या ट्युशन फीस होना कितना चाहिए क्योंकि प्राईवेट स्कूलों को तो सिर्फ फीस से मतलब है और जिम्मेदार अधिकारी भी मौन है। स्कूल शिक्षा विभाग, डीपीआई और डीईओ की यह जिम्मेदारी है कि वे जनसामान्य को यह बताए कि ट्युशन फीस होता क्या है और प्राईवेट स्कूल वाले मा. उच्च न्यायालय के निर्णय के आड़ में जो फीस वसूल रहे है वही सिर्फ ट्युशन फीस है और इस वर्ष स्कूलों के द्वारा फीस में वृद्धि नही किया गया है।

अतः मा. सांसद महोदय से निवेदन है कि प्रदेश के 15 लाख बच्चों के हितो को ध्यान में रखते हुए ट्युशन फीस को परिभाषित करने स्कूल शिक्षा सचिव, छ.ग. शासन को पत्र लिखा जाना उचित होगा।

विनित

इंजी.दिनेश शर्मा (लैण्डस्केप कंसल्टेंट)
प्रदेश प्रवक्ता व जिलाध्यक्ष रायपुर
छत्तीसगढ़ पैरंट्स एसोसिएशन

पनेश त्रिवेदी
जिला सचिव
छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन

प्रति,
अयान न्यूज
छत्तीसगढ़

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