कांग्रेस प्रदेश सचिव राजेन्द्र बंजारे ने अजय चंद्राकर को अपना मानसिक इलाज कराने मेंटल हास्पिटल का दिया पता।
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव एवम पूर्व जनपद अध्यक्ष राजेंद्र पप्पू बंजारे ने कुरूद के विधायक एवम पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर को अपना मानसिक इलाज कराने मेन्टल हास्पिटल, आगरा या रांची दोनों स्थान का पता दिया है इसका कारण बतासे हुए श्री बंजारे ने कहा कि अजय चंद्राकर ने ट्विटर और फेसबुक पर लिखा कि- छत्ती सगढ़ के वर्तमान राजकीय चिन्ह को नरवा, गरवा, घुरवा, बारी की अपार सफलता और छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में “गोबर” के महत्व को देखते हुए इसे राजकीय प्रतीक चिन्ह बना देना चाहिए। इस प्रकार के बयान कही न कही अजय चंद्राकर जी अपना मानसिक संतुलन खो बैठे है इसलिए अपना ईलाज मेंटल हास्पिटल में करा लेवे जिसका पूरा खर्च मेरे द्वारा श्री अजय चंद्राकर जी को दिया जाएगा।। पूर्व जनपद अध्यक्ष राजेंद्र बंजारे ने आगे कहा कि आरएसएस विचार धारा के होने के कारण ही श्री चंद्राकर जी अपना मानसिक संतुलन खो बैठे है क्योंकि आरएसएस पहले भी इस तरह का कृत्य कर चुके है आरएसएस तिरंगे झंडे का अपमान कर चुके है।आरएसएस द्वारा वर्णित और चित्रित की जाने वाली भारत माता के हाथों में कभी भी तिरंगा ध्वज नहीं रहा बल्कि वे अन्य ध्वज लिए दिखती हैं। प्रारंभ से ही आरएसएस का भारत के लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रतीकों, जैसे राष्ट्रीय ध्वज और संविधान, से दूरी बनाए रखने का इतिहास रहा है। कांग्रेस प्रदेश सचिव राजेन्द्र बंजारे ने बताया कि छत्तीसगढ़ का राजकीय प्रतीक चिन्ह कोई सामान्य तस्वीर नहीं है बल्कि यह छत्तीसगढ़ की जनता के मान सम्मान और अस्मिता का प्रतीक है।
यह प्रतीक चिन्ह हमें हमारी सांस्कृतिक धरोहर, फसल उत्पादन, विद्युत उत्पादन और समृद्धि वनों की विरासत से जोड़ता है। छत्तीसगढ़ के राजकीय प्रतीक चिन्ह की तुलना गोबर से करके अजय चंद्राकर ने अपनी मानसिक स्थिति और भाजपा के विचारों को स्पष्ट उजागर कर दिया।

