धरसींवा के पूर्व जनपद अध्यक्ष राजेंद्र बंजारे ने संत कबीरदास जी की 622 वी जयंती पर प्रदेशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी

धरसींवा के पूर्व जनपद अध्यक्ष राजेंद्र बंजारे ने संत कबीरदास जी की 622 वी जयंती पर प्रदेशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी

है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिब एवम पूर्व जनपद अध्यक्ष राजेंद्र पप्पू बंजारे ने संत कबीर जयंती पर बताया कि कबीर साहब 120 वर्ष इस संसार में रहे और भ्रम और मोह की नींद में सोए हुए लोगों को जगाने का कार्य किये।
अटपट ज्ञान कबीर का, झटपट लखै ना कोय।
जो मन की खटपट मिटै, तो चटपट दर्शन होय।।
कबीर साहब की एक एक साखी किसी मंत्र से कम नही है , ऐसा मंत्र जिसे अपने जीवन के आचरण में उतारने पर से ना सिर्फ जीवन सार्थक व सफल होता है बल्कि सत्य और असत्य, सार असार का बोध भी होता है जिससे जन्म मरण के बंधन से छुटकारा पाने में आसानी होती है।
कबीर साहब का ज्ञान इतना सरल और सहज है जिसे कोई भी बडी आसानी से समझ सकता है।
कबीर साहब के ज्ञान में वो शक्ति और विशेषता है कि मरे हुए को जीवित कर दे और जीवित को मार दे , और इसिलिए कबीर साहब का ज्ञान अटपट है, अनोखा है , निराला है। मगर जो समझ जाए उसके लिए सरल है , सहज है , सुबोध है।
कबीर साहब का ज्ञान मनुष्य के अंदर के पशुता भाव को दूर कर शुद्ध मानव का निर्माण करता है तथा मन को शीतल , संयमित बनाकर , ईर्ष्या राग द्वेष जैसे बुराईयों रहित करता है।
जग में बैरी कोई नही, जो मन शीतल हो।
*या आपा को डारि दे, दया करै सब कोय।। कबीर साहब के ज्ञान की एक विशेषता ये भी है बाह्य आडम्बर और पाखंड युक्त कर्मकांडों से मनुष्य को बचाकर सत्य का बोध कराता है
*साईं इतना दीजिये, जा मे कुटुम समाय।*

मैं भी भूखा न रहूँ, साधु ना भूखा जाय ॥

पूर्व जनपद अध्यक्ष राजेंद्र बंजारे ने कहा है कि संत कबीर जी मध्यकालीन भारत के स्वाधीनचेता महापुरुष, सफल साधक, भक्त कवि, मतप्रवर्तक एवं समाज सुधारक थे। सत्य, अहिंसा, दया, करुणा, परोपकार और सामाजिक समरसता के उनके संदेश को मेरी तरह अनेकों छत्तीसगढ़ के लोगों ने भी आत्मसात किया है।

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