
दक्षिण कोरिया की संवैधानिक अदालत ने जापान के साथ 2015 में हुए एक समझौते को रद्द करने के अनुरोध वाली अर्जी शुक्रवार को खारिज कर दी। यह समझौता द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सेना द्वारा सेक्स के लिए गुलाम बनाई गईं कोरियाई महिलाओं को लेकर विवाद के समाधान से संबंधित है। समझौते को रद्द करने का निर्णय दोनों देशों द्वारा व्यापार और इतिहास के विवादों को सुलझाने के प्रयासों को जटिल बना सकता था।
अदालत का शुक्रवार को फैसला पूर्व सेक्स गुलामों और उनके परिवारों द्वारा दायर एक अर्जी पर आया। उनका कहना है कि समझौता उनकी सहमति के बिना किया गया। इन लोगों का यह भी आरोप था कि समझौता उनकी गरिमा को कमतर करता है तथा वार्ता में शामिल होने एवं जापानी सरकार से पूर्ण मुआवजा मांगने के अधिकार में हस्तक्षेप करता है।
नौ न्यायाधीशों की पीठ ने सर्वसम्मति से फैसला सुनाया कि समझौता गैर बाध्यकारी राजनीतिक समझौता है और यह पीड़ितों के जापान से आधिकारिक मुआवजे की मांग करने जैसे उनके विधिक अधिकारों को प्रभावित नहीं करता। पीठ ने कहा कि समझौते के लिए किसी भी देश की संसद की मंजूरी नहीं ली गई या इस पर कैबिनेट परिषद में चर्चा नहीं हुई।
साथ ही इसे संधि बनाने के लिए आवश्यक कदम भी नहीं उठाये गए। अदालत के अधिकारियों ने कहा कि फैसला अंतिम है और इसके खिलाफ अपील नहीं की जा सकती।
Source: International

