दीपावली जैसे प्रमुख त्योहार पर भी 21 श्रमिक वेतन से वंचित! आखिर मजदूरों के परिवारों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
**भिलाई।* औद्योगिक नगरी भिलाई में श्रमिकों के अधिकारों और उनके मेहनताने को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। *Atmastco Ltd., Unit-2 में ठेका एजेंसी *Anabiya Construction* के माध्यम से कार्यरत 21 श्रमिकों का अगस्त 2026 का वेतन अब तक लंबित बताया जा रहा है।
सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि दीपावली जैसे महत्वपूर्ण त्योहार के अवसर पर भी इन श्रमिकों को उनकी मेहनत की कमाई नहीं मिल पाई। जिन मजदूरों के श्रम से उद्योगों का संचालन होता है, आज उन्हीं मजदूरों के परिवार आर्थिक संकट और परेशानी का सामना कर रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कंपनी और ठेकेदार के बीच भुगतान को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है। कंपनी की ओर से श्रमिकों को ठेकेदार से भुगतान लेने की बात कही जा रही है, जबकि ठेकेदार का कहना है कि कंपनी से भुगतान प्राप्त नहीं हुआ है। इस आपसी विवाद के बीच 21 श्रमिक अपने मेहनताने के लिए भटकने को मजबूर हैं।
*सबसे बड़ा सवाल यह है कि कंपनी और ठेकेदार के बीच भुगतान का विवाद है, तो इसकी सजा गरीब मजदूरों को क्यों दी जा रही है?*
बताया जा रहा है कि श्रमिकों द्वारा श्रम विभाग में शिकायत किए जाने के बाद भी अब तक उन्हें उनका लंबित वेतन प्राप्त नहीं हुआ है। यदि शिकायत के बावजूद श्रमिकों को राहत नहीं मिल रही है, तो यह श्रम व्यवस्था और श्रमिकों के अधिकारों के संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
शासन-प्रशासन और कंपनी प्रबंधन से सीधे सवाल
1. अगस्त माह का 21 श्रमिकों का वेतन अब तक क्यों रोका गया है?2. कंपनी और ठेकेदार के विवाद में श्रमिकों का क्या दोष है?3. श्रम विभाग में शिकायत के बाद भी भुगतान सुनिश्चित क्यों नहीं हुआ?4. क्या कंपनी प्रबंधन और ठेकेदार की जिम्मेदारी नहीं है कि श्रमिकों को समय पर उनका मेहनताना मिले?5. क्या शासन-प्रशासन इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर श्रमिकों को न्याय दिलाएगा?
IHRPC की मांग
अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण आयोग (IHRPC) की ओर से शासन-प्रशासन एवं श्रम विभाग से मांग की जाती है कि:
– सभी 21 श्रमिकों का अगस्त 2026 का लंबित वेतन तत्काल दिलाया जाए।- कंपनी एवं ठेका एजेंसी की भुगतान संबंधी जिम्मेदारी की जांच की जाए।- श्रमिकों को भविष्य में वेतन के लिए इस प्रकार परेशान न होना पड़े, इसकी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।- यदि श्रमिकों के वेतन भुगतान में नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो नियमानुसार जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
*याद रखिए, मजदूर कोई मशीन नहीं है, जिसका इस्तेमाल करके उसे उसके हाल पर छोड़ दिया जाए। मजदूर के घर में भी बच्चे हैं, परिवार है और त्योहार की खुशियां हैं। उसकी मेहनत का पैसा रोकना केवल आर्थिक परेशानी नहीं, बल्कि उसके सम्मान और अधिकारों का भी सवाल है।*
श्रमिकों को उनका हक दिलाना केवल मांग नहीं, बल्कि सामाजिक और कानूनी जिम्मेदारी है। अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन और कंपनी प्रबंधन इन 21 श्रमिकों की आवाज कब सुनते हैं।
*जारीकर्ता:**Gurudeep singh*International Human Rights Protection Commission (IHRPC)

