छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर संगीत ग्रुप कांकेर का भव्य आयोजन, वृंदावन कॉलोनी में सजी सुरों की महफिल

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर संगीत ग्रुप कांकेर का भव्य आयोजन, वृंदावन कॉलोनी में सजी सुरों की महफिल


राज्य गीत और छत्तीसगढ़ी लोकगीतों से गूंजा गोविंदपुर, देर रात 12.30 बजे तक चला संगीतमय कार्यक्रम
कांकेर। वृंदावन कॉलोनी गोविंदपुर के प्रांगण में 1 नवंबर को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में संगीत ग्रुप कांकेर द्वारा एक भव्य संगीतमय कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जो देर रात तक चलता रहा और यादगार बन गया।
सरस्वती वंदना और राज्य गीत से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत परंपरा के अनुसार की गई। सर्वप्रथम माता सरस्वती का पूजन वंदन करके सुरों की देवी की आराधना की गई। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ महतारी का वंदन करते हुए राज्य गीत से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। राज्य गीत के दौरान सभी उपस्थित लोगों ने सम्मान में खड़े होकर सहभागिता की।
छत्तीसगढ़ी गीतों ने बांधा समां
शुभारंभ के बाद ग्रुप के सदस्यों ने अपनी अपनी शानदार प्रस्तुति दी। कुछ सदस्यों ने बहुत ही सुंदर सुंदर छत्तीसगढ़ी गीत गाकर राज्य स्थापना दिवस की 26 वीं वर्षगांठ को एक यादगार शाम बना दिया। छत्तीसगढ़ी गीतों के साथ हिंदी के मिले जुले गीतों ने भी दर्शकों का मन मोह लिया और सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कॉलोनीवासियों की रही विशेष भागीदारी
इस आयोजन की खास बात यह रही कि सिर्फ ग्रुप के सदस्य ही नहीं, बल्कि वृंदावन कॉलोनी निवासी श्रोतागणों ने भी अतिथि सदस्यों के रूप में कुछ गीत गुनगुनाए। इससे कार्यक्रम में आत्मीयता का माहौल बन गया और सभी ने एक साथ मिलकर राज्य स्थापना दिवस का जश्न मनाया।
कलाकारों ने दी भावविभोर करने वाली प्रस्तुतियां
कार्यक्रम में ग्रुप के सदस्य नीतिश तुर्कर, रमेश ध्रुव, पी एल सरल, अनीता सरल, संतोष शर्मा, गीता गुप्ता, सोमेश शर्मा, प्रीति शर्मा, अमर सिंह कुर्रे, विजय गुप्ता, अनिल सोनी, रेशम वारे, प्रांजल वारे, ऋषि देवांगन, भुवन साहू, अपेक्षा जायसवाल, रिया सिन्हा, अभिषेक कुमार मिश्रा सभी ने अपनी अपनी बेहतरीन प्रस्तुति से सभी दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
संचालन और समापन
कार्यक्रम का कुशल संचालन ग्रुप एडमिन कल्पना ध्रुव जायसवाल द्वारा एवं रमेश ध्रुव के द्वारा किया गया। कार्यक्रम देर रात 12.30 बजे तक संचालित होता रहा। अंत में सभी का आभार प्रदर्शन करते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया। आयोजकों ने कहा कि छत्तीसगढ़ी संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए इस तरह के आयोजन आगे भी किए जाते रहेंगे।

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