रायपुर में गांधी जयंती पर लगा ‘स्वदेशी हाट’:महिला कारोबारियों और स्व-सहायता समूहों ने लगाए स्टॉल, छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति की दिखी झलक

रायपुर में गांधी जयंती पर लगा ‘स्वदेशी हाट’:महिला कारोबारियों और स्व-सहायता समूहों ने लगाए स्टॉल, छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति की दिखी झलक


गांधी जयंती के अवसर पर दावरा इंटरनेशनल स्कूल रायपुर में ‘स्वदेशी हाट–द आत्मनिर्भर भारत’ एवं ‘आनंद मेला’ का आयोजन किया गया। श्री लोहाना महा परिषद, महिला विंग (सेंट्रल इंडिया) के सहयोग से हुए कार्यक्रम में स्थानीय उत्पादों, कला, संस्कृति और महिला उद्यमियों के काम को प्रदर्शित किया गया।आयोजन का मुख्य उद्देश्य स्थानीय प्रतिभाओं, स्वदेशी उत्पादों और छोटे कारोबार से जुड़े लोगों को मंच देना रहा। मेले में महिलाओं, युवाओं, स्थानीय व्यवसायियों और स्व-सहायता समूहों ने अपने उत्पादों के स्टॉल लगाए। लोगों ने स्टॉल पर पहुंचकर उत्पादों की जानकारी ली और खरीदारी भी की।
कला और संस्कृति की दिखी झलकमेले में छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और परंपरा की झलक देखने को मिली। स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों ने अपने बनाए उत्पाद प्रदर्शित किए। आयोजकों ने बताया कि ऐसे आयोजनों से स्थानीय स्तर पर काम करने वाले लोगों को अपने उत्पादों की पहचान बनाने और उन्हें बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिलता है।
महिला उद्यमियों की रही खास भागीदारीआयोजक प्रगति मिरानी ने कहा कार्यक्रम में महिला उद्यमियों और स्व-सहायता समूहों की विशेष भागीदारी रही। महिलाओं ने अपने व्यवसाय और उत्पादों के बारे में लोगों को जानकारी दी। इसके साथ ही युवाओं और स्थानीय व्यवसायियों ने भी अपने काम और उत्पादों को लोगों के सामने रखा। मेले में परिवारों और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने हिस्सा लिया।
स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का संदेशआयोजक डॉली राय सिन्हा ने कहा ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की शुरुआत स्थानीय स्तर से होती है। स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने और स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर देने से आत्मनिर्भरता की भावना मजबूत होती है। इसी उद्देश्य से स्वदेशी हाट का आयोजन किया गया, ताकि लोग स्थानीय उत्पादों से जुड़ें और उन्हें प्रोत्साहित करें।
लोगों ने उत्साह से देखे उत्पादआनंद मेले में लोगों ने विभिन्न स्टॉलों पर पहुंचकर उत्पादों की जानकारी ली। आयोजकों के अनुसार, मेले के जरिए महिलाओं, कारीगरों और छोटे कारोबारियों को अपने उत्पादों के प्रचार-प्रसार के साथ नए लोगों से जुड़ने का अवसर मिला। कार्यक्रम में स्थानीय कला और संस्कृति को भी लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
आयोजकों ने कहा- आगे भी होंगे ऐसे आयोजनआयोजन में पहुंचे शैलेश करिया ने बताया कि स्वदेशी हाट और आनंद मेला लोगों की अच्छी भागीदारी के कारण बहुत सफल रहा। स्थानीय उत्पादों और महिला उद्यमियों को मिले मंच को लोगों का अच्छा समर्थन मिला। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन आगे भी किए जाएंगे, ताकि स्थानीय प्रतिभाओं, महिला उद्यमियों और स्व-सहायता समूहों को लगातार अपना काम आगे बढ़ाने का अवसर मिलता रहे।

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