अखिल भारतीय रेहड़ी पटरी व्यवसाय महासंघ ने केंद्र सरकार और पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया के फैसले का किया स्वागत, राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक पांडे ने जताया आभार

यूपीआई भुगतान पर एमडीआर नहीं लगने से छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत


अखिल भारतीय रेहड़ी पटरी व्यवसाय महासंघ ने केंद्र सरकार और पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया के फैसले का किया स्वागत, राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक पांडे ने जताया आभार
नई दिल्ली। यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लगाए जाने को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से यह स्पष्ट किए जाने के बाद कि आम उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों के लिए यूपीआई भुगतान निःशुल्क बना रहेगा, अखिल भारतीय रेहड़ी पटरी व्यवसाय महासंघ ने इस निर्णय का स्वागत किया है। महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक पांडे ने केंद्र सरकार और पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला देश के करोड़ों छोटे कारोबारियों, रेहड़ी-पटरी संचालकों, ठेले-खोमचे वालों और छोटे दुकानदारों के हित में महत्वपूर्ण है।
महासंघ ने कहा कि डिजिटल भुगतान आज देश की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुका है और इसका सबसे व्यापक लाभ छोटे एवं सीमित पूंजी वाले कारोबारियों को मिला है। ऐसे में यूपीआई भुगतान पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क छोटे व्यापारियों के लिए आर्थिक बोझ बढ़ा सकता था। यूपीआई को निःशुल्क बनाए रखने का निर्णय छोटे कारोबारियों के लिए राहत के साथ-साथ डिजिटल भुगतान व्यवस्था में उनके विश्वास को मजबूत करने वाला कदम है।
छोटे कारोबारियों के लिए यूपीआई निःशुल्क रहना बड़ी राहत
पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा शुक्रवार को जारी स्पष्टीकरण के अनुसार आम उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों के लिए यूपीआई भुगतान पूरी तरह निःशुल्क बना रहेगा। यूपीआई की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई थी और तब से ही आम उपभोक्ताओं के लिए इसका इस्तेमाल बिना किसी लेन-देन शुल्क के किया जाता रहा है। अब भी व्यक्तियों पर किसी प्रकार का ट्रांजेक्शन शुल्क लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं होने की बात स्पष्ट की गई है।
इसी तरह छोटे व्यापारियों के लिए भी यूपीआई के माध्यम से भुगतान स्वीकार करने पर किसी प्रकार का शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इस स्पष्टीकरण के बाद रेहड़ी-पटरी और छोटे दुकानदारों के बीच उत्पन्न हुई आशंकाएं दूर हुई हैं।
अखिल भारतीय रेहड़ी पटरी व्यवसाय महासंघ ने इसे छोटे कारोबारियों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय बताते हुए कहा कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे व्यापारी हैं जिनका कारोबार सीमित पूंजी पर निर्भर करता है। रोजाना होने वाली छोटी-छोटी बिक्री से उनकी आय निर्धारित होती है। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगने से उनके मुनाफे पर सीधा असर पड़ सकता था।
रेहड़ी-पटरी वालों पर पड़ता सबसे ज्यादा असर : आलोक पांडे
अखिल भारतीय रेहड़ी पटरी व्यवसाय महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक पांडे ने कहा कि केंद्र सरकार के इस जनहितैषी निर्णय से देश के करोड़ों रेहड़ी-पटरी, ठेले-खोमचे और छोटे दुकानदारों को बड़ी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब देश का छोटा से छोटा कारोबारी भी बिना किसी अतिरिक्त आर्थिक बोझ के डिजिटल भुगतान की सुविधा का उपयोग कर सके।
आलोक पांडे ने कहा कि आज शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक रेहड़ी-पटरी लगाने वाले छोटे कारोबारी अपने ग्राहकों से यूपीआई के माध्यम से भुगतान स्वीकार कर रहे हैं। सब्जी विक्रेता, फल विक्रेता, चाय-नाश्ता संचालक, छोटे दुकानदार, ठेला संचालक और अन्य स्ट्रीट वेंडर्स के लिए यूपीआई भुगतान रोजमर्रा के कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
उन्होंने कहा कि यदि एमडीआर लागू किया जाता तो इसका सबसे अधिक प्रभाव छोटे स्ट्रीट वेंडर्स पर पड़ने की आशंका थी। बड़ी कंपनियां और बड़े कारोबारी अतिरिक्त शुल्क का भार किसी न किसी रूप में संभाल सकते हैं, लेकिन छोटे कारोबारी अपने सीमित मुनाफे के कारण ऐसे अतिरिक्त खर्च को आसानी से वहन नहीं कर सकते।
डिजिटल इंडिया को जमीनी स्तर पर मजबूती देने वाला फैसला
महासंघ ने कहा कि यूपीआई ने देश के डिजिटल भुगतान तंत्र को आम आदमी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पहले जहां छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी कारोबारियों के लिए डिजिटल भुगतान की सुविधा सीमित थी, वहीं मोबाइल फोन और यूपीआई के माध्यम से अब छोटे से छोटा कारोबारी भी डिजिटल लेन-देन स्वीकार कर रहा है।
यूपीआई के माध्यम से ग्राहक को भुगतान की सुविधा मिलने के साथ कारोबारी को नकदी रखने की आवश्यकता भी कम हुई है। इससे छोटे कारोबारियों के दैनिक लेन-देन में सुविधा बढ़ी है। खास बात यह है कि छोटी रकम के भुगतान के लिए भी यूपीआई का इस्तेमाल आसानी से किया जा सकता है।
महासंघ के अनुसार यूपीआई को निःशुल्क बनाए रखना डिजिटल अर्थव्यवस्था को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इससे छोटे व्यापारियों में डिजिटल भुगतान को लेकर भरोसा बना रहेगा और वे अपने कारोबार में आधुनिक भुगतान प्रणाली को अपनाने के लिए और अधिक प्रोत्साहित होंगे।
छोटे दुकानदारों और स्ट्रीट वेंडर्स के हितों को प्राथमिकता
राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक पांडे ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा छोटे कारोबारियों के हितों को प्राथमिकता देने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। रेहड़ी-पटरी व्यवसायी देश की स्थानीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शहरों और कस्बों में रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े सामान और सेवाएं बड़ी संख्या में छोटे कारोबारी उपलब्ध कराते हैं।
उन्होंने कहा कि इन कारोबारियों की आय का आधार उनकी दैनिक बिक्री होती है। ऐसे में भुगतान व्यवस्था सरल, सुरक्षित और कम लागत वाली होना आवश्यक है। यूपीआई के निःशुल्क बने रहने से इन कारोबारियों को अपने ग्राहकों से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने में किसी अतिरिक्त शुल्क की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।
महासंघ ने कहा कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के साथ यह भी जरूरी है कि छोटे कारोबारियों पर इसका कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। इस दृष्टि से यूपीआई पर एमडीआर नहीं लगाए जाने का स्पष्ट संदेश छोटे व्यापारियों के लिए सकारात्मक है।
ग्राहकों और कारोबारियों दोनों के लिए बनी रहेगी सुविधा
यूपीआई भुगतान के निःशुल्क बने रहने से इसका लाभ केवल कारोबारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्राहकों को भी इसका फायदा मिलता रहेगा। ग्राहक छोटे से छोटे भुगतान के लिए डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल कर सकेंगे और उन्हें अतिरिक्त ट्रांजेक्शन शुल्क की चिंता नहीं होगी।
छोटे दुकानदारों के लिए भी यह सुविधा महत्वपूर्ण है, क्योंकि डिजिटल भुगतान स्वीकार करने से ग्राहकों के पास भुगतान के अधिक विकल्प उपलब्ध होते हैं। नकद के साथ यूपीआई भुगतान की सुविधा होने से छोटे कारोबारियों के कारोबार में लचीलापन बढ़ता है।
महासंघ ने कहा कि देश में डिजिटल भुगतान की स्वीकार्यता बढ़ने के पीछे यूपीआई की सरलता और व्यापक पहुंच प्रमुख कारणों में से एक है। इसे निःशुल्क बनाए रखना डिजिटल भुगतान व्यवस्था की पहुंच को और मजबूत करने में सहायक होगा।
महासंघ ने केंद्र सरकार और पीसीआई का जताया आभार
अखिल भारतीय रेहड़ी पटरी व्यवसाय महासंघ ने केंद्र सरकार और पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया के इस स्पष्ट एवं स्वागत योग्य निर्णय के लिए आभार व्यक्त किया। महासंघ ने कहा कि छोटे कारोबारियों के लिए यूपीआई भुगतान को निःशुल्क बनाए रखने से देश के करोड़ों स्ट्रीट वेंडर्स और छोटे दुकानदारों को राहत मिलेगी।
राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक पांडे ने कहा कि यह निर्णय छोटे कारोबारियों के हितों की रक्षा करने के साथ डिजिटल इंडिया की भावना को भी मजबूत करता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी नीतियां बनाते समय रेहड़ी-पटरी कारोबारियों, छोटे दुकानदारों और अन्य लघु व्यापारियों की आर्थिक स्थिति और उनकी व्यावहारिक जरूरतों को ध्यान में रखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि छोटे कारोबारी देश की अर्थव्यवस्था की जमीनी ताकत हैं। इनके कारोबार को आसान बनाने वाली डिजिटल सुविधाएं बिना अतिरिक्त आर्थिक बोझ के उपलब्ध रहना आवश्यक है। यूपीआई भुगतान पर एमडीआर नहीं लगाए जाने का निर्णय इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
अखिल भारतीय रेहड़ी पटरी व्यवसाय महासंघ ने दोहराया कि वह देश के छोटे कारोबारियों और स्ट्रीट वेंडर्स के हितों से जुड़े विषयों को लगातार उठाता रहेगा। महासंघ ने केंद्र सरकार और पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यूपीआई भुगतान को निःशुल्क बनाए रखने से छोटे व्यापारियों का डिजिटल लेन-देन के प्रति विश्वास और मजबूत होगा तथा देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को जमीनी स्तर पर और गति मिलेगी।

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