मानवीय बुद्धिमत्ता एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता का समन्वय ही भविष्य की सफलता की कुंजी : सीए प्रखर जैन
*मेघा तिवारी की रिपोर्ट*रायपुर (छत्तीसगढ़)-गुरुकुल महिला महाविद्यालय, रायपुर के वाणिज्य विभाग तथा आईसीएआई की केंद्रीय भारत क्षेत्रीय परिषद(CIRC) की रायपुर शाखा के चार्टर्ड अकाउंटेंसी छात्र संघ (CICASA) रायपुर शाखा के संयुक्त तत्वावधान में “Human Intelligence + Artificial Intelligence = Future Success” विषय पर एक प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की नवीनतम तकनीकों, उनके व्यावहारिक उपयोग तथा मानवीय बुद्धिमत्ता के साथ उनके संतुलित समन्वय के महत्व से अवगत कराना था।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सीए प्रखर जैन ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज का युग केवल डिजिटल तकनीक का नहीं, बल्कि मानवीय बुद्धिमत्ता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावी समन्वय का युग है। उन्होंने कहा कि भविष्य में वही व्यक्ति और संस्थान सफल होंगे जो तकनीक का उपयोग मानवीय विवेक, रचनात्मकता, नैतिकता, नेतृत्व क्षमता तथा नवाचार के साथ करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई मनुष्य का स्थान लेने के लिए नहीं, बल्कि उसकी कार्यक्षमता, उत्पादकता और निर्णय क्षमता को बढ़ाने के लिए विकसित की गई है।
उन्होंने छात्राओं को विभिन्न आधुनिक AI टूल्स का व्यावहारिक परिचय भी दिया। इस दौरान ChatGPT, Google Gemini, Claude, Gamma, Note book LM, Canva AI सहित अन्य एआई आधारित प्लेटफ़ॉर्म के उपयोग का प्रदर्शन किया गया। उन्होंने बताया कि इन टूल्स का उपयोग अध्ययन सामग्री तैयार करने, शोध कार्य, प्रस्तुतीकरण, रिपोर्ट लेखन, डेटा विश्लेषण, कंटेंट निर्माण, डिज़ाइन, व्यवसाय योजना, डिजिटल मार्केटिंग तथा उद्यमिता के क्षेत्र में अत्यंत प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने छात्राओं को इन तकनीकों का जिम्मेदारीपूर्ण एवं नैतिक उपयोग करने की भी सलाह दी।
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित सीकासा के अध्यक्ष सीए संस्कार अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान समय में व्यावसायिक शिक्षा के साथ डिजिटल दक्षता भी उतनी ही आवश्यक है। उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंसी, वित्तीय प्रबंधन, टैक्सेशन एवं ऑडिट के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग पर प्रकाश डालते हुए छात्राओं को नई तकनीकों को अपनाने और निरंतर स्वयं को अद्यतन रखने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का स्वागत भाषण महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. संध्या गुप्ता ने दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विद्यार्थियों में तकनीकी कौशल, नवाचार, अनुसंधान एवं उद्यमिता का विकास समय की आवश्यकता है। ऐसे आयोजन छात्राओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर एवं रोजगारोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सेमिनार के दौरान महाविद्यालय द्वारा “क्लाउड किचन” प्रशिक्षण हेतु प्रोजेक्ट का आकर्षक फ्लायर भी प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर बताया गया कि यह परियोजना छात्राओं में उद्यमिता, स्वरोजगार, डिजिटल व्यवसाय और व्यावहारिक प्रबंधन कौशल विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उपस्थित अतिथियों ने इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे शिक्षा और उद्यमिता के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
कार्यक्रम में छात्राओं ने अत्यंत उत्साह के साथ सहभागिता की तथा एआई के उपयोग, रोजगार की संभावनाओं, शोध एवं व्यवसाय में तकनीकी नवाचारों से संबंधित अनेक प्रश्न पूछकर विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। सेमिनार ने छात्राओं को यह संदेश दिया कि भविष्य की सफलता केवल तकनीक पर निर्भर नहीं होगी, बल्कि Human Intelligence और Artificial Intelligence के संतुलित एवं रचनात्मक उपयोग पर आधारित होगी।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन डॉ. रात्रि लहरी ने किया तथा अंत में वाणिज्य संकायाध्यक्ष डॉ. राजेश अग्रवाल ने सभी अतिथियों, प्राध्यापकों एवं छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में छात्राएँ उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सीए प्रखर जैन ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज का युग केवल डिजिटल तकनीक का नहीं, बल्कि मानवीय बुद्धिमत्ता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावी समन्वय का युग है। उन्होंने कहा कि भविष्य में वही व्यक्ति और संस्थान सफल होंगे जो तकनीक का उपयोग मानवीय विवेक, रचनात्मकता, नैतिकता, नेतृत्व क्षमता तथा नवाचार के साथ करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई मनुष्य का स्थान लेने के लिए नहीं, बल्कि उसकी कार्यक्षमता, उत्पादकता और निर्णय क्षमता को बढ़ाने के लिए विकसित की गई है।
उन्होंने छात्राओं को विभिन्न आधुनिक AI टूल्स का व्यावहारिक परिचय भी दिया। इस दौरान ChatGPT, Google Gemini, Claude, Gamma, Note book LM, Canva AI सहित अन्य एआई आधारित प्लेटफ़ॉर्म के उपयोग का प्रदर्शन किया गया। उन्होंने बताया कि इन टूल्स का उपयोग अध्ययन सामग्री तैयार करने, शोध कार्य, प्रस्तुतीकरण, रिपोर्ट लेखन, डेटा विश्लेषण, कंटेंट निर्माण, डिज़ाइन, व्यवसाय योजना, डिजिटल मार्केटिंग तथा उद्यमिता के क्षेत्र में अत्यंत प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने छात्राओं को इन तकनीकों का जिम्मेदारीपूर्ण एवं नैतिक उपयोग करने की भी सलाह दी।
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित सीकासा के अध्यक्ष सीए संस्कार अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान समय में व्यावसायिक शिक्षा के साथ डिजिटल दक्षता भी उतनी ही आवश्यक है। उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंसी, वित्तीय प्रबंधन, टैक्सेशन एवं ऑडिट के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग पर प्रकाश डालते हुए छात्राओं को नई तकनीकों को अपनाने और निरंतर स्वयं को अद्यतन रखने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का स्वागत भाषण महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. संध्या गुप्ता ने दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विद्यार्थियों में तकनीकी कौशल, नवाचार, अनुसंधान एवं उद्यमिता का विकास समय की आवश्यकता है। ऐसे आयोजन छात्राओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर एवं रोजगारोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सेमिनार के दौरान महाविद्यालय द्वारा “क्लाउड किचन” प्रशिक्षण हेतु प्रोजेक्ट का आकर्षक फ्लायर भी प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर बताया गया कि यह परियोजना छात्राओं में उद्यमिता, स्वरोजगार, डिजिटल व्यवसाय और व्यावहारिक प्रबंधन कौशल विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उपस्थित अतिथियों ने इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे शिक्षा और उद्यमिता के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
कार्यक्रम में छात्राओं ने अत्यंत उत्साह के साथ सहभागिता की तथा एआई के उपयोग, रोजगार की संभावनाओं, शोध एवं व्यवसाय में तकनीकी नवाचारों से संबंधित अनेक प्रश्न पूछकर विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। सेमिनार ने छात्राओं को यह संदेश दिया कि भविष्य की सफलता केवल तकनीक पर निर्भर नहीं होगी, बल्कि Human Intelligence और Artificial Intelligence के संतुलित एवं रचनात्मक उपयोग पर आधारित होगी।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन डॉ. रात्रि लहरी ने किया तथा अंत में वाणिज्य संकायाध्यक्ष डॉ. राजेश अग्रवाल ने सभी अतिथियों, प्राध्यापकों एवं छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में छात्राएँ उपस्थित रहीं।

