एफसीआई के गेहूं के कीड़ों का आतंक: छतौना में जीना हुआ दुश्वार
डिपो प्रबंधन की लापरवाही से जनस्वास्थ्य पर संकट, कार्रवाई नहीं हुई तो होगा आंदोलन
ग्राम छतौना के नागरिक इन दिनों भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के डिपो से फैल रहे अन्न-कीट (गेहूं के कीड़े) के भीषण प्रकोप से अत्यधिक परेशान हैं। गांव के आसपास रहने वाले लोगों का जीवन दूभर हो गया है। घरों में रखी खाद्य सामग्री, कपड़े तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं तक में कीड़े पहुंच रहे हैं। मुख्य सड़क पर पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस वर्ष अन्न-कीटों का प्रकोप पिछले वर्षों की तुलना में कई गुना अधिक है।
ग्रामीणों का आरोप है कि एफसीआई डिपो परिसर में नियमित एवं सघन कीटनाशक दवा का छिड़काव नहीं किए जाने के कारण कीड़ों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। शाम लगभग 4 बजे के बाद घरों से बाहर निकलना भी कठिन हो जाता है। उड़ते हुए कीड़े आंखों में चले जाने पर तेज जलन होती है, मानो आंखों में मिर्च पड़ गई हो। डिपो प्रबंधन की लापरवाही का खामियाजा पूरे गांव को भुगतना पड़ रहा है।
इस गंभीर समस्या को लेकर ग्राम पंचायत छतौना के सरपंच श्री भोजराज यदु, पूर्व जिला पंचायत सदस्य परमानंद जांगड़े, जनपद सदस्य श्रीमती सरोजनी दिवाकर जांगड़े, उपसरपंच नयन यादव, पंच सुनील बारले, टीकम रात्रे, नारद यदु ईश्वर नायक गोकुल यादव घनश्याम साहू धीरज जोशी राकेश जांगड़े सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने एफसीआई डिपो प्रबंधक को ज्ञापन सौंपकर तत्काल प्रभाव से पूरे डिपो परिसर में नियमित सघन कीटनाशक दवा का छिड़काव, वैज्ञानिक तरीके से कीट नियंत्रण एवं नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
सरपंच श्री भोजराज यदु ने कहा कि यह केवल गांव की नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य की गंभीर समस्या है। एफसीआई प्रबंधन तत्काल प्रभाव से पूरे परिसर में प्रभावी कीटनाशक दवा का छिड़काव कर स्थायी समाधान सुनिश्चित करे, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।
जनपद सदस्य श्रीमती सरोजनी दिवाकर जांगड़े ने कहा कि सबसे अधिक परेशानी महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को हो रही है। कई बार शिकायत के बावजूद विभाग द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने नियमित निगरानी एवं समयबद्ध कीट नियंत्रण व्यवस्था लागू करने की मांग की।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य परमानंद जांगड़े ने आरोप लगाया कि एफसीआई डिपो प्रबंधन की लापरवाही के कारण पूरा छतौना गांव अन्न-कीटों के आतंक से जूझ रहा है। यदि समय-समय पर वैज्ञानिक तरीके से फ्यूमिगेशन एवं सघन कीटनाशक छिड़काव किया जाता, तो आज यह स्थिति निर्मित नहीं होती। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई तथा स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की मांग की।
उपसरपंच नयन यादव ने कहा कि शाम के समय गांव की सड़कों पर चलना और घरों के बाहर बैठना तक मुश्किल हो गया है। उन्होंने एफसीआई प्रबंधन से नियमित अंतराल पर कीटनाशक छिड़काव एवं साफ-सफाई की स्थायी कार्ययोजना लागू करने की मांग की।
ज्ञापन में कहा गया है कि यदि समय रहते अन्न-कीटों के प्रकोप पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो यह जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर संकट बन सकता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो वे जनहित में चरणबद्ध आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित विभाग एवं एफसीआई प्रशासन की होगी।

