शिक्षा विभाग एवं अन्य संविदा कर्मचारियों की मांगों को लेकर छत्तीसगढ़िया सर्व समाज महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

शिक्षा विभाग एवं अन्य संविदा कर्मचारियों की मांगों को लेकर छत्तीसगढ़िया सर्व समाज महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र



रायपुर। शिक्षा विभाग सहित विभिन्न विभागों के नियमित एवं संविदा कर्मचारियों द्वारा सेवा संबंधी समस्याओं, वेतन विसंगतियों तथा अन्य लंबित मांगों को लेकर प्रदेशभर में आंदोलन किए जा रहे हैं। इसी विषय पर सर्व यादव समाज एवं छत्तीसगढ़िया सर्व समाज महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश यदु ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कर्मचारियों की मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल करने का आग्रह किया है।
अपने पत्र में उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में “मोदी की गारंटी” के तहत युवाओं, किसानों, बेरोजगारों तथा विभिन्न संवर्ग के कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने का वादा किया था। किंतु सरकार के ढाई वर्ष पूरे होने के बाद भी इन वादों पर अपेक्षित पहल नहीं होने से कर्मचारियों में निराशा का माहौल है।
उन्होंने विशेष रूप से शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की पुरानी सेवा गणना शून्य किए जाने के मुद्दे का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे बड़ी संख्या में शिक्षक भविष्य की पेंशन और सेवा सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। वहीं संविदा कर्मचारी बढ़ती उम्र, नौकरी की अनिश्चितता और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण मानसिक एवं आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, जिसके चलते वे अपनी जायज़ मांगों को लेकर आंदोलन करने के लिए विवश हैं।
रमेश यदु ने कहा कि इस गंभीर विषय पर मुख्यमंत्री, जिनके पास लंबे समय तक शिक्षा विभाग का दायित्व भी रहा है, स्वयं संवेदनशीलता दिखाते हुए कर्मचारियों की मांगों के समाधान हेतु आवश्यक पहल करें।
उन्होंने शिक्षा विभाग के कर्मचारियों द्वारा शिक्षा मंत्री के दुर्ग स्थित निजी निवास के समक्ष किए गए धरना-प्रदर्शन को राजनीतिक षड्यंत्र बताते हुए कहा कि किसी मंत्री के निजी आवास, जहाँ उनके परिवार, वृद्ध माता-पिता एवं बच्चे रहते हों, वहां प्रदर्शन करना उचित परंपरा नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आंदोलन के लिए तूता धरना स्थल, मंत्रालय घेराव, मंत्रियों के सरकारी आवासों का घेराव, जिला एवं विकासखंड मुख्यालयों पर प्रदर्शन जैसी लोकतांत्रिक व्यवस्थाएँ पहले से मौजूद हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय मुख्यमंत्री की सहमति से ही संभव होते हैं। इसलिए सभी कर्मचारी संगठनों को अपनी मांगें सरकार के समक्ष लोकतांत्रिक एवं सकारात्मक तरीके से रखना चाहिए।
अंत में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से संज्ञान में लेते हुए उनकी जायज़ मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर समाधान की दिशा में आवश्यक कदम उठाएंगे।

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