रायपुर| अब अंतागढ़ टेपकांड के बाद झीरमकांड को लेकर भी बड़े खुलासे होने को है. झीरमकांड के एक चश्मदीद घायल डाॅ शिवनारायण द्विवेदी सोमवार को एकल सदस्यी न्यायिक जांच आयोग के सामने शपथ पत्र पर अपना बयान दर्ज कराने जा सकते हैं। डाॅ द्विवेदी के इस खुलासे से छत्तीसगढ़ की राजनीती में उठा पटक हो सकती है साथ ही कई बड़े नाम खुलकर सामने आ सकते है. शिव नारायण का कहा मने तोह उनके साथ पूर्व विधायक मोतीराम साहू, अंजय शुक्ला सहित कई अन्य घायल हैं जिन्होंने घटना के दौरान गोली खाई थी। एनआईए की जांच के दौरान उनसे पूछताछ भी नहीं की गई। यूँ तो केंद्र में कहने को कांग्रेस सरकार थी पर तमाम आंदोलनों और हडतालों के बाद भी मामला सीबीआई को नहीं सौंपा गया . इससे नाराज होकर तीन लोगों ने पार्टी छोड़ दी और तत्कालीन भाजपा सरकार से जांच की मांग करते रहे लेकिन घोषणा करने के बाद भी सीबीआई जांच नही हुई।
ये हैं जांच के नए बिंदु
- महेंद्र कर्मा की सुरक्षा की समीक्षा क्या प्रोटेक्शन रिव्यू ग्रुप ने की थी।
- कर्मा द्वारा मांगी गई अतिरिक्त सुरक्षा पर क्या कार्रवाई की गई।
- नंदकुमार पटेल को क्या अतिरिक्त सुरक्षा दी गई थी।
- पूर्व के बड़े हमलों की समीक्षा कर कोई कदम उठाया गया।
- यूनिफाइड कमांड की नक्सल विरोधी ऑपरेशन में भूमिका।
- 25 मई 2013 को बस्तर में कुल कितना पुलिस बल था?
- क्या माओवादी बंधक की रिहाई के बदले अपनी मांग मनवाते हैं?
- एलेक्स पॉल मेनन की रिहाई के लिए क्या समझौते किए गए?
ये है प्रमुख बिंदु - क्या झीरम कांड राजनीतिक साजिश थी
- तत्कालीन कांग्रेसी नेताओं में से भी कुछ लोग क्या इस कांड में सहयोगी की भूमिका में थे
- कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को क्या किसी ने गुमराह किया और जांच की सहीं दिशा तय नहीं हो सकी
- कांड के बाद किन लोगों को बड़ा फायदा हुआ उनकी भूमिका क्या रही !
- इस कांड की निष्पक्ष जांच की मांग करने वाले कांग्रेस के प्रभावितों को पार्टी क्यों छोड़ना पड़ गया, क्या उन्हें कांग्रेस में रहकर किसी या किन्हीं लोगों से खतरा था!

