पखांजूर में निर्माण कार्य पर फिर उठे सवाल बार-बार जांच, फिर भी जारी लापरवाही: आखिर ठेकेदार पर कार्रवाई कब?

पखांजूर में निर्माण कार्य पर फिर उठे सवाल

बार-बार जांच, फिर भी जारी लापरवाही: आखिर ठेकेदार पर कार्रवाई कब?
पखांजूर–नारायणपुर मार्ग निर्माण में फिर सामने आई कथित अनियमितता, विभागीय कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
पखांजूर। सीताराम–नारायणपुर मार्ग पर निर्माणाधीन सड़क एवं पुल-पुलियों में कथित अनियमितताओं का मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें सामने आ चुकी हैं। विभागीय जांच में सड़क और पुल-पुलियों के कुछ हिस्सों को मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाने के बाद उन्हें निरस्त किए जाने की पुष्टि भी लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों द्वारा की जा चुकी है। इसके बावजूद संबंधित निर्माण स्थल पर कार्य दोबारा शुरू होने से स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
जानकारी के अनुसार निर्माणाधीन पुलिया में बड़े आकार के जगली पत्थरों (बोल्डर) के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य की तस्वीरों में स्पष्ट रूप से ऐसे पत्थर दिखाई दे रहे हैं, जिन्हें लेकर पहले भी आपत्ति जताई गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि गुणवत्ता से समझौता कर निर्माण कार्य किया जा रहा है, जिससे भविष्य में पुलिया की मजबूती और सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।
विभागीय जांच में पहले भी सामने आई थीं खामियां
इस निर्माण कार्य को लेकर पहले हुई विभागीय जांच में लगभग तीन किलोमीटर सड़क तथा तीन से चार पुल-पुलियों को गुणवत्ता संबंधी कमियों के कारण निरस्त किए जाने की पुष्टि लोक निर्माण विभाग के एसडीओ द्वारा की गई थी। विभाग ने माना था कि निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं किया गया था। इसके बाद उम्मीद की जा रही थी कि संबंधित निर्माण को पूरी तरह हटाकर नए सिरे से मानकों के अनुसार कार्य कराया जाएगा।
लेकिन अब स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुराने निर्माण को पूरी तरह हटाए बिना उसी स्थान पर दोबारा सेंटरिंग कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। यदि यह आरोप सही साबित होता है तो यह विभागीय निर्देशों की अवहेलना के साथ-साथ निर्माण गुणवत्ता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
एसडीओ ने कहा, इंजीनियर भेजकर होगी जांच
लोक निर्माण विभाग नारायणपुर के एसडीओ संजय कुमार चौहान से इस संबंध में चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि लापरवाहीपूर्वक निर्मित पुलिया को पहले ही निरस्त किया जा चुका था। यदि उसी स्थान पर बिना आवश्यक सुधार और पुराने निर्माण को हटाए दोबारा सेंटरिंग कर कार्य किया जा रहा है, तो यह उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि सोमवार को विभागीय इंजीनियर को मौके पर भेजकर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। एसडीओ के इस बयान के बाद अब सभी की निगाहें विभागीय जांच और उसके परिणाम पर टिकी हुई हैं।
बार-बार जांच के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि यह पहली बार नहीं है जब निर्माण कार्य को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। इससे पहले भी विभागीय जांच में निर्माण कार्य में गंभीर खामियां मिलने की पुष्टि हो चुकी है। सड़क और पुल-पुलियों के हिस्सों को निरस्त करने के बावजूद यदि उसी प्रकार से निर्माण कार्य दोबारा जारी है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि अब तक संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि हर बार केवल जांच और नोटिस जारी कर मामला समाप्त कर दिया जाएगा, तो निर्माण एजेंसियों में जवाबदेही कैसे तय होगी। उनका मानना है कि सरकारी धन से बनने वाले ऐसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही भविष्य में बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है।
क्या विभागीय आदेशों की हो रही अनदेखी?
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि विभाग स्वयं निर्माण कार्य को मानकों के विपरीत मान चुका है। इसके बावजूद यदि उसी स्थान पर कार्य जारी है तो यह विभागीय आदेशों की खुली अनदेखी प्रतीत होती है। लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि कहीं संबंधित ठेकेदार को किसी स्तर पर संरक्षण तो प्राप्त नहीं है, जिसके कारण बार-बार शिकायतों और जांच के बावजूद कठोर कार्रवाई नहीं हो रही।
लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य में तकनीकी कमियां पहले ही सामने आ चुकी हैं, तो पुराने हिस्से को पूरी तरह हटाकर नए सिरे से निर्माण कराया जाना चाहिए था। आधे-अधूरे सुधार के साथ कार्य जारी रखना भविष्य के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है।
स्वतंत्र तकनीकी जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
क्षेत्र के लोगों ने शासन और लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि पूरे निर्माण कार्य की किसी स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में गुणवत्ता संबंधी कमियां और नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुल-पुलियों का निर्माण वर्षों तक जनता की सुविधा और सुरक्षा के लिए किया जाता है। ऐसे में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। लोगों ने यह भी मांग की है कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, दोष तय होने पर जिम्मेदार अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए तथा सरकारी धन की बर्बादी रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी पर होगी।

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