*श्री हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर सिख श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार और एकतरफा कार्रवाई देश की सामाजिक एकता के लिए गंभीर चेतावनी*



*श्री हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर सिख श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार और एकतरफा कार्रवाई देश की सामाजिक एकता के लिए गंभीर चेतावनी*
*आत्मरक्षा के लिए हथियार उठाना अपराध कब से हो गया ?*
*वायरल वीडियो की बारीकी से जांच क्यों नहीं की गई ?*
*मारपीट करने वाले स्थानिक पहाड़ियों पर जुर्म दर्ज क्यों नहीं किया गया ?*
सिखों ने कभी यह नहीं देखा कि सामने वाला व्यक्ति किस धर्म, जाति,भाषा या विचारधारा से जुड़ा हुआ है।*
भारत सदियों से धार्मिक सहिष्णुता, मानव सेवा और आपसी भाईचारे की भूमि रहा है। सिख समाज ने भी हमेशा इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र से ऊपर उठकर मानवता की सेवा को सर्वोच्च स्थान दिया है। लेकिन उत्तराखंड के कर्णप्रयाग और श्री हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग से सामने आ रहे घटनाक्रमों ने पूरे देश के सिख समाज को गहरी पीड़ा, चिंता और आक्रोश से भर दिया है।सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और सामने आ रहे घटनाक्रमों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर देश के उन सिख श्रद्धालुओं के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है, जो वर्षों से शांति, सेवा और श्रद्धा के साथ श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा करते आ रहे हैं।सिख समाज का कहना है कि वायरल वीडियो में स्थानीय लोगों द्वारा पहले निहंगों के साथ मारपीट की गई और उसके बाद उन्होंने आत्मरक्षा के उद्देश्य से अपनी पारंपरिक कृपाण उठाई। भारतीय कानून प्रत्येक नागरिक को उचित परिस्थितियों में आत्मरक्षा का अधिकार प्रदान करता है। ऐसे में पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच किए बिना यदि एकतरफा कार्रवाई की जाती है, तो इससे न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।सिख समाज की सबसे बड़ी नाराजगी इस बात को लेकर है कि कथित तौर पर पूरी घटना के सभी पहलुओं पर विचार किए बिना श्रद्धालुओं के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किए गए और उनके साथ कठोर व्यवहार किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। यदि किसी विवाद में दोनों पक्ष शामिल हों, तो प्रशासन का कर्तव्य निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ कानून का पालन करवाना होता है, न कि किसी एक पक्ष के प्रति झुकाव दिखाना।इससे भी अधिक चिंता का विषय यह है कि सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा सिखों के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिए जा रहे हैं। सिखों को अपमानजनक शब्दों से संबोधित करना, कृपाण पर प्रतिबंध लगाने की मांग करना, श्री हेमकुंड साहिब आने वाले श्रद्धालुओं को उत्तराखंड में प्रवेश से रोकने जैसी बातें करना केवल एक समुदाय की भावनाओं को आहत करना नहीं है, बल्कि यह भारत की संवैधानिक भावना और सामाजिक समरसता के खिलाफ भी है।सबसे अधिक पीड़ा उस समय होती है जब मानवता की सबसे बड़ी पहचान बने सिख लंगर की गरिमा पर भी सवाल उठाए जाते हैं। लंगर स्थलों को अपमानित करने, भोजन की गुणवत्ता को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां करने तथा सेवा परंपरा को बदनाम करने के प्रयासों ने सिख समाज को गहरे स्तर पर आहत किया है।यह वही सिख समाज है, जिसकी लंगर परंपरा की देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों से प्रशंसा कर चुके हैं। देश के अनेक मुख्यमंत्रियों, विभिन्न सामाजिक संगठनों और समाज के प्रमुख लोगों ने भी हर आपदा और संकट की घड़ी में सिख समाज द्वारा संचालित लंगर सेवा को मानवता की सबसे बड़ी मिसाल बताया है।कोविड महामारी हो, प्राकृतिक आपदाएं हों, रेल दुर्घटनाएं हों, बाढ़ हो, भूकंप हो या किसी भी प्रकार का मानवीय संकट, सिख समाज बिना किसी भेदभाव के सबसे पहले राहत और सेवा लेकर पहुंचा है। सिखों ने कभी यह नहीं देखा कि सामने वाला व्यक्ति किस धर्म, जाति, भाषा या विचारधारा से जुड़ा हुआ है।लेकिन आज एक कड़वी सच्चाई सामने आ रही है। जिन लोगों ने संकट के समय इस सेवा का लाभ लिया, जिन्होंने निःस्वार्थ भाव से चल रहे लंगरों से भोजन ग्रहण किया, उन्हीं में से कुछ लोग आज सिख समाज पर उंगलियां उठा रहे हैं, उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत कर रहे हैं और उनके अस्तित्व एवं परंपराओं पर सवाल खड़े कर रहे हैं। यह स्थिति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और पीड़ादायक है।सिख समाज स्पष्ट करना चाहता है कि मानवता की सेवा उसकी पहचान है, कमजोरी नहीं। धैर्य उसकी संस्कृति है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि उसके सम्मान, धार्मिक प्रतीकों और श्रद्धालुओं पर लगातार प्रहार किए जाएं और वह मौन बना रहे।छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज के प्रदेश अध्यक्ष सुखबीर सिंह सिंघोत्रा, समाज के अन्य प्रमुख सदस्यों नरेंद्र सिंह हरगोत्रा, स्वर्ण सिंह चावला, कुलवंत सिंह खालसा, मनजीत सिंह भाटिया, जागीर सिंह बावा, देवेंद्र सिंह चावला, चरणपाल सिंह बाजवा, छत्तीसगढ़ सिख समाज के बिलासपुर जिला अध्यक्ष गुरमीत सिंह अरोरा, रायगढ़ जिला अध्यक्ष प्रितपाल सिंह टुटेजा, बेमेतरा जिला अध्यक्ष हरदीप सिंह राजा छाबड़ा, रणजीत सिंह खनूजा, अमृत सिंह सूर, जसप्रीत सिंह चावला, इंदर पाल सिंह गांधी, गुरमीत सिंह छाबड़ा, मानवेंद्र सिंह डडियाला एवं अत्तर सिंह, चरणजीत सिंह पनेसर ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और राज्य पुलिस महानिदेशक से मांग की है कि सिख समाज के खिलाफ हो रही कथित एकतरफा कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए, पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा श्री हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर अनुभवी, संवेदनशील और संतुलित अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी जाए।उन्होंने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, देशभर के अकाल तख्तों के जत्थेदारों, विभिन्न सिख जत्थेबंदियों और सभी गुरुद्वारा प्रबंधक समितियों से इस विषय पर गंभीर रणनीतिक विचार-विमर्श करने की अपील भी की है।आज आवश्यकता किसी टकराव को बढ़ाने की नहीं, बल्कि न्याय, सम्मान और विश्वास बहाली की है। लेकिन यदि किसी भी समुदाय के साथ लगातार अन्याय, अपमान और भेदभाव का वातावरण बनाया जाएगा और सरकारें समय रहते हस्तक्षेप नहीं करेंगी, तो यह स्थिति देश के सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित कर सकती है।भारत की ताकत एक-दूसरे को नीचा दिखाने में नहीं, बल्कि एक-दूसरे के सम्मान की रक्षा करने में है। श्री हेमकुंड साहिब केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। इसकी गरिमा और यहां आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और समाज दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
सुखबीर सिंह सिंघोत्राप्रदेश अध्यक्षछत्तीसगढ़ सिक्ख समाज रजिस्टर्डmo. 9301094242

————————————————————————————–

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *