बिलासपुर– छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की मुश्किलें दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है । उनके जाति प्रमाण पत्र के मामले में अब एक नया मोड़ सामने आ गया है। अजीत जोगी ने न्यायालय के समक्ष जिस नायब तहसीलदार के हस्ताक्षर से जारी जाति प्रमाण पत्र को प्रस्तुत किया है उन्होंने शपथ पत्र देकर इस प्रमाणपत्र को जारी करने से इंकार कर दिया है। कल 04 सितंबर 2019 को बिलासपुर के एमआईजी-39 नेहरूनगर निवासी पतरस तिर्की उम्र 84 वर्ष ने एक शपथ पत्र प्रस्तुत करते हुये कहा है कि वह वर्ष 1967 में नायब तहसीलदार के पद पर पदस्थ रहे। अजीत जोगी द्वारा 1967-68 में नायब तहसीलदार पतरस तिर्की के हस्ताक्षर से जारी जाति प्रमाण पत्र को प्रस्तुत किया है जो उनके द्वारा नहीं जारी किया गया है। इसके साथ ही शपथ पत्र में यह भी कहा गया है कि वर्ष 1967-68 मेंं गौरेला-पेंड्रा में नायब तहसीलदार का कार्यालय अस्तित्व में ही नहीं रहा।
जाति मामले में हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत
पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को जाति मामले में फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट में बुधवार को अजीत जोगी के मामले में सिंगल बेंच में सुनवाई हुई। जाति मामले में हाईकोर्ट ने हाईपावर कमेटी के फैसले को बरकरार रखा। कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर भी किसी तरह का रोक नहीं लगाया है हालांकि उनकी विधायकी पर अभी फिलहाल कोई खतरा नहीं है। कोर्ट ने सुनवाई होने तक उनकी विधायकी को फिलहाल बरकरार रखा है।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट में जोगी ने जाति मामले में याचिका दायर की थी। अजीत जोगी के खिलाफ हाईपावर कमेटी ने आदिवासी नहीं होने का फैसला दिया था जिसके बाद अजीत जोगी के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी और कमेटी के फैसले और पुलिस की कार्रवाई को चुनौती दी थी। बुधवार को न्यायाधीश पी सैम कोशी की बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई। राज्य सरकार की तरफ से सलमान खुर्शीद ने पक्ष रखा। इस फैसले के बाद अजीत जोगी की मुश्किलें बरकरार है। वहीं हाईकोर्ट ने 29 सितंबर से हर दिन सुनवाई करने की बात कही है।

