जांच के आदेश के बीच नियुक्ति पत्र जारी, एनएचएम भर्ती प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
नर्सिंग स्टाफ भर्ती में पारदर्शिता पर विवाद, अभ्यर्थियों ने कार्रवाई की उठाई मांग
गणेश तिवारी दैनिक अमर स्तम्भ राज्य ब्यूरो चीफ। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय कांकेर द्वारा 42 प्रकार के संविदा पदों पर की गई भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों के बीच जांच के निर्देश जारी होने के बावजूद अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि शासन स्तर पर जांच की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर नियुक्तियां प्रदान की गईं, जिससे निष्पक्षता और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।
भर्ती परिणाम में कथित छेड़छाड़ को लेकर पहले से था विवाद
जानकारी के अनुसार एनएचएम के तहत विभिन्न संविदा पदों के लिए कौशल परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों द्वारा प्राप्त अंकों के आधार पर परिणाम जिला वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया। आरोप है कि अगले ही दिन परिणाम में संशोधन करते हुए कुछ अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कथित रूप से अनुपस्थित अभ्यर्थियों को उपस्थित दर्शाया गया तथा कुछ उम्मीदवारों के अंक बढ़ाकर संशोधित सूची जारी की गई। इस संबंध में अभ्यर्थियों द्वारा जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को शिकायत भी सौंपी गई थी।
मिशन संचालक के जांच निर्देश के बावजूद जारी हुए नियुक्ति पत्र
शिकायतकर्ता अभ्यर्थियों का कहना है कि नर्सिंग स्टाफ भर्ती प्रक्रिया को लेकर प्राप्त शिकायतों के आधार पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन छत्तीसगढ़ के मिशन संचालक द्वारा 10 जून 2026 को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कांकेर को जांच कराने के निर्देश दिए गए थे। उद्देश्य यह था कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और यदि कोई अनियमितता हो तो उसकी निष्पक्ष जांच हो सके। आरोप है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने की प्रतीक्षा किए बिना ही विभाग द्वारा चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी कर दिए गए। इससे शिकायतकर्ताओं में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
रोस्टर और शासन निर्देशों की अनदेखी के आरोप
विभागीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के आधार पर शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में शासन के निर्देशों और रोस्टर नियमों का पूर्ण पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान उठे गंभीर सवालों के बावजूद नियुक्तियां जारी कर दी गईं। आरोप लगाने वालों का दावा है कि यदि जांच लंबित थी तो अंतिम नियुक्ति आदेश जारी करने से पहले जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जाना चाहिए था। इससे पूरे मामले की निष्पक्षता प्रभावित हुई है।
विधायक ने भी पहले उठाया था भर्ती प्रक्रिया का मुद्दा
इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर कांकेर विधायक आशाराम नेताम भी पूर्व में अपनी आपत्ति दर्ज करा चुके हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने कलेक्टर को पत्र लिखकर भर्ती प्रक्रिया को निरस्त करने तथा शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी। इसके बावजूद भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने से अभ्यर्थियों और छात्राओं में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। कई अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय होगा।
भर्ती निरस्त कर पुनः प्रक्रिया शुरू करने की मांग
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि भर्ती प्रक्रिया में लगाए गए आरोपों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक जारी नियुक्ति आदेशों पर रोक लगाई जाए तथा यदि अनियमितताएं सिद्ध होती हैं तो संपूर्ण भर्ती प्रक्रिया को निरस्त कर पुनः पारदर्शी तरीके से भर्ती कराई जाए। उनका कहना है कि स्थानीय प्रतिभाशाली युवाओं को समान अवसर मिलना चाहिए और किसी भी प्रकार की पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया पर रोक लगनी चाहिए।

