निगम के दोहरे मापदंड:रसूखदार कैफे को संरक्षण और गरीबों के ठेले उजाड़ने पर प्रद्युम्न शर्मा ने उठाए सवाल.
रायपुर:अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग के प्रदेश महासचिव श्री प्रद्युम्न शर्मा ने आज नगर पालिक निगम रायपुर (जोन क्रमांक 07) के प्रशासनिक रवैये और दोहरे मापदंड पर अत्यंत कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। श्री शर्मा ने कोटा रोड (शहीद मनमोहन सिंह बक्षी वार्ड क्र. 23) स्थित बहुमंजिला ‘एबीसीडी कैफे’ के अवैध निर्माण पर निगम द्वारा महीनों से कोई कार्रवाई न किए जाने को लेकर जोन कमिश्नर को एक तीखा पत्र प्रेषित किया है।अंतिम नोटिस के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?प्रद्युम्न शर्मा ने बताया कि नगर निगम जोन 7 द्वारा उक्त कैफे के अवैध निर्माण को लेकर नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 307(3) के तहत अंतिम सूचना पत्र (क्रमांक 78/3) दिनांक 22/04/2026 जारी किया गया था। इस सरकारी आदेश में भवन स्वामी को स्पष्ट रूप से 03 दिवस के भीतर अवैध हिस्सा हटाने का कड़ा निर्देश था। परंतु, विडंबना यह है कि महीनों बीत जाने के बाद भी आज दिनांक 16 जून 2026 तक निगम का बुलडोजर वहां नहीं पहुंचा। कैफे आज भी धड़ल्ले से चल रहा है और मुख्य मार्ग पर पार्किंग व यातायात की गंभीर समस्या उत्पन्न कर रहा है।निगम प्रशासन की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा, “यह सीधे तौर पर आम नागरिकों के अधिकारों का हनन और भेदभाव है। नगर निगम का दस्ता रोज सुबह सड़क किनारे ईमानदारी से मेहनत करने वाले गरीब ठेले-खोमचे वालों को खदेड़ने और उनकी रोजी-रोटी उजाड़ने पूरी क्रूरता के साथ पहुंच जाता है। लेकिन जब बात किसी रसूखदार बहुमंजिला कैफे मालिक की आती है, तो अधिकारी बैकफुट पर आ जाते हैं। क्या निगम प्रशासन पर्दे के पीछे किसी गुप्त ‘राजीनामे’ का इंतजार कर रहा है?”अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग ने साफ किया है कि यदि इस अंतिम चेतावनी के बाद भी उक्त अवैध निर्माण को तत्काल जमींदोज नहीं किया गया, तो इस पूरे मामले को पुख्ता साक्ष्यों व तस्वीरों के साथ नगर निगम आयुक्त (मुख्य मुख्यालय) और नगरीय प्रशासन विभाग के समक्ष ले जाएगा।

