*आम आदमी पार्टी, छत्तीसगढ़* *सवाल पूछने पर AAP नेता बिरजू सलाम की गिरफ़्तारी , भाजपा राज में ‘आदिवासी होना’ ही गुनाह है?- आम आदमी पार्टी*
*केशकाल की आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही है डरपोक सरकार, पूरा समाज देगा गिरफ्तारी — आम आदमी पार्टी*
*तानाशाही का पर्याय बन चुकी है साय सरकार-आम आदमी पार्टी* रायपुर,16 जून 2026।आम आदमी पार्टी के विजय झा प्रदेश अध्यक्ष =कर्मचारी विंग ) और जयदीप खनूजा,प्रदेश प्रवक्ता द्वारा ली गयी प्रेस कॉन्फ्रेंस में साय सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने अपनी तानाशाही का एक और काला अध्याय लिख दिया है। आम आदमी पार्टी के कर्मठ आदिवासी नेता और केशकाल ब्लॉक अध्यक्ष साथी बिरजू सलाम को पुलिस ने जिस तरह कल से अपनी अभिरक्षा में कैद कर रखा है, वह लोकतंत्र पर सीधा हमला है। बिरजू सलाम द्वारा विधायक जनसम्पर्क निधि की राशि में कथित दुरूपयोग पर एक विडिओ बनाया था और खुलासा किया था की राशि को भाजपा कार्यकर्ताओं को बांटा गया है। इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया।यह गिरफ्तारी किसी अपराध की वजह से नहीं, बल्कि सत्ता की आंखों में आंखें डालकर जनहित के सवाल पूछने की सजा है।आज छत्तीसगढ़ का पुलिस तंत्र पूरी तरह सरकार के सामने नतमस्तक है। वर्दी की आड़ में आम नागरिकों और खास तौर पर आदिवासी समाज की आवाज़ को घोंटा जा रहा है। दमन का खेल: क्या यही है ‘आदिवासी हित’ का ढोंग?
भाजपा सरकार एक तरफ आदिवासी मुख्य मंत्री और आदिवासी कल्याण का ढोंग करती है, और दूसरी तरफ उन्हीं के हक की बात करने वाले नेताओं को जेल भेजती है। प्रदेश के आंकड़े सरकार के इस खौफनाक चेहरे को बेनकाब करते हैं।
जेलों में मौतों का सिलसिला:
खुद सरकार ने माना है कि पिछले महज 13 महीनों में छत्तीसगढ़ की जेलों में 66 कैदियों की मौत हुई है। इनमें से अधिकांश आदिवासी समाज से थे। क्या बिरजू सलाम को भी इसी असुरक्षित तंत्र के हवाले छोड़ दिया गया है?न्यायिक हत्या या लापरवाही? पिछले साल दिसंबर में आदिवासी नेता जीवन ठाकुर की हिरासत में मौत हुई। वे बीमार थे, गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन संवेदनहीन प्रशासन ने उन्हें सही इलाज तक नहीं दिया।
अपनों को भी नहीं बख्शा:
जब भाजपा के अपने वरिष्ठ नेता और पूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर को भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने पर नजरबंद किया जा सकता है, तो विपक्षी नेताओं के साथ इस सरकार की क्रूरता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है
आम आदमी पार्टी की मांगें:
बिरजू सलाम पर दर्ज केस वापिस लिया जाए। किस आधार पर और किसके आदेश पर उन्हें हिरासत में लिया गया, पुलिस इसका लिखित स्पष्टीकरण दे। SDOP की भूमिका की जांच की जाये।
बस्तर इलाके में आदिवासियों को नक्सलवाद या अन्य झूठे केसों में फंसाकर जेल भेजने का यह खूनी खेल अब बंद होना चाहिए।
भाजपा सरकार कान खोलकर सुन ले, आदिवासी की आवाज़ जंगल की आग की तरह होती है। इसे जितना दबाओगे, यह उतनी ही तेज़ी से फैलेगी। बिरजू सलाम की गिरफ्तारी इस सरकार के पतन की शुरुआत साबित होगी।
*मिहिर कुर्मी**प्रदेश मीडिया प्रभारी**आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़**8461830001*
*केशकाल की आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही है डरपोक सरकार, पूरा समाज देगा गिरफ्तारी — आम आदमी पार्टी*
*तानाशाही का पर्याय बन चुकी है साय सरकार-आम आदमी पार्टी* रायपुर,16 जून 2026।आम आदमी पार्टी के विजय झा प्रदेश अध्यक्ष =कर्मचारी विंग ) और जयदीप खनूजा,प्रदेश प्रवक्ता द्वारा ली गयी प्रेस कॉन्फ्रेंस में साय सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने अपनी तानाशाही का एक और काला अध्याय लिख दिया है। आम आदमी पार्टी के कर्मठ आदिवासी नेता और केशकाल ब्लॉक अध्यक्ष साथी बिरजू सलाम को पुलिस ने जिस तरह कल से अपनी अभिरक्षा में कैद कर रखा है, वह लोकतंत्र पर सीधा हमला है। बिरजू सलाम द्वारा विधायक जनसम्पर्क निधि की राशि में कथित दुरूपयोग पर एक विडिओ बनाया था और खुलासा किया था की राशि को भाजपा कार्यकर्ताओं को बांटा गया है। इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया।यह गिरफ्तारी किसी अपराध की वजह से नहीं, बल्कि सत्ता की आंखों में आंखें डालकर जनहित के सवाल पूछने की सजा है।आज छत्तीसगढ़ का पुलिस तंत्र पूरी तरह सरकार के सामने नतमस्तक है। वर्दी की आड़ में आम नागरिकों और खास तौर पर आदिवासी समाज की आवाज़ को घोंटा जा रहा है। दमन का खेल: क्या यही है ‘आदिवासी हित’ का ढोंग?
भाजपा सरकार एक तरफ आदिवासी मुख्य मंत्री और आदिवासी कल्याण का ढोंग करती है, और दूसरी तरफ उन्हीं के हक की बात करने वाले नेताओं को जेल भेजती है। प्रदेश के आंकड़े सरकार के इस खौफनाक चेहरे को बेनकाब करते हैं।
जेलों में मौतों का सिलसिला:
खुद सरकार ने माना है कि पिछले महज 13 महीनों में छत्तीसगढ़ की जेलों में 66 कैदियों की मौत हुई है। इनमें से अधिकांश आदिवासी समाज से थे। क्या बिरजू सलाम को भी इसी असुरक्षित तंत्र के हवाले छोड़ दिया गया है?न्यायिक हत्या या लापरवाही? पिछले साल दिसंबर में आदिवासी नेता जीवन ठाकुर की हिरासत में मौत हुई। वे बीमार थे, गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन संवेदनहीन प्रशासन ने उन्हें सही इलाज तक नहीं दिया।
अपनों को भी नहीं बख्शा:
जब भाजपा के अपने वरिष्ठ नेता और पूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर को भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने पर नजरबंद किया जा सकता है, तो विपक्षी नेताओं के साथ इस सरकार की क्रूरता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है
आम आदमी पार्टी की मांगें:
बिरजू सलाम पर दर्ज केस वापिस लिया जाए। किस आधार पर और किसके आदेश पर उन्हें हिरासत में लिया गया, पुलिस इसका लिखित स्पष्टीकरण दे। SDOP की भूमिका की जांच की जाये।
बस्तर इलाके में आदिवासियों को नक्सलवाद या अन्य झूठे केसों में फंसाकर जेल भेजने का यह खूनी खेल अब बंद होना चाहिए।
भाजपा सरकार कान खोलकर सुन ले, आदिवासी की आवाज़ जंगल की आग की तरह होती है। इसे जितना दबाओगे, यह उतनी ही तेज़ी से फैलेगी। बिरजू सलाम की गिरफ्तारी इस सरकार के पतन की शुरुआत साबित होगी।
*मिहिर कुर्मी**प्रदेश मीडिया प्रभारी**आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़**8461830001*

