*गैस चोरी करने वाले छह टैंकर पर महेरबानी नहीं किये गए ब्लैकलिस्ट*
रायपुरः महासमुंद जिले में सामने आए डेढ़ करोड़ रुपए के एलपीजी गैस चोरी मामले में अब इंडियन आयल कंपनी और जांच प्रक्रियां पर सवाल उठने लगे हैं। दिसंबर में पुलिस ने छह गैस टैंकरों को पकड़ा था, जिनसे गैस निकालकर घरेलू और कमर्शियल सिलिंडरों में भरी जा रही थी। इसके बावजूद अब तक टैंकरों को ब्लैकलिस्ट नहीं किया गया है। ये टैंकर रिफाइनरी से इंडियन आयल के सिलतरा बाटलिंग प्लांट तक एलपीजी लेकर आ रहे थे। ट्रांसपोर्ट एग्रीमेंट के तहत टैंकर मालिकों की जिम्मेदारी गैस को सुरक्षित और पूरी मात्रा में पहुंचाने की होती है। चोरी या गड़बड़ी मिलने पर अमानंत राशि जब्त कर टैंकरों को ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए।
पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। घटना के समय चालक और टैंकर मालिक कथित रूप से दस्तावेज लेकर फरार हो गए थे,’ लेकिन तत्काल गिरफ्तारी नहीं हो सकी। वहीं टैंकरों का वजन नहीं कराए जाने और सही तरीके से जब्ती नहीं होने से जांच में साक्ष्य कमजोर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।170 सिलिंडरों में भरी गई थी गैसः पुलिस कार्रवाई के दौरान टैंकरों से गैस निकालकर करीब 170 घरेलू और कमर्शियल सिलिंडरों में ट्रांसफर करने की जानकारी सामने आई थी। जांच एजेंसियां अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाई हैं कि रिफाइनरी से निकलने के बाद टैंकर किन-किन स्थानों पर रुके और कितनी मात्रा में गैस चोरी की गई। मामले में ट्रांसपोर्ट नेटवर्क की भूमिका को लेकर भी संदेह बना हुआ है।
ब्लैकलिस्ट नहीं होने पर उठे सवाल : एलपीजी परिवहन नियमों के तहत गैस चोरी या अनियमितता पाए जाने पर संबंधित टैंकरों को ब्लैकलिस्ट करने का प्राविधान है। ‘इसके बावजूद महीनों बाद भी कठोर कदम नहीं उठाए गए।

