रायपुर के डॉ. सुनील कालडा: हजारों चेहरों पर मुस्कान लौटाने वाले सर्जन की प्रेरणादायक कहानी

रायपुर के डॉ. सुनील कालडा: हजारों चेहरों पर मुस्कान लौटाने वाले सर्जन की प्रेरणादायक कहानी


मानवता की सेवा को बनाया जीवन का उद्देश्य, गरीबों और जरूरतमंदों के लिए बने उम्मीद की किरण
रायपुर।
चिकित्सा केवल इलाज का माध्यम नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा भी हो सकती है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के प्रसिद्ध प्लास्टिक एवं बर्न सर्जन डॉ. सुनील कालडा ने अपने जीवन और कार्यों से इस बात को सच साबित कर दिखाया है। उन्होंने हजारों ऐसे लोगों को नया जीवन दिया, जो आर्थिक तंगी, जन्मजात विकृति, जलने की घटनाओं या सामाजिक उपेक्षा के कारण सामान्य जीवन नहीं जी पा रहे थे।
डॉ. सुनील कालडा आज केवल एक डॉक्टर नहीं, बल्कि लाखों लोगों के लिए प्रेरणा, सेवा और संवेदनशीलता का प्रतीक बन चुके हैं।
रायपुर में जन्म, यहीं से शुरू हुआ सेवा का सफर
डॉ. सुनील कालडा का जन्म 1 जुलाई 1958 को रायपुर में हुआ। उनका बचपन भी इसी शहर में बीता। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने का फैसला किया। उन्होंने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद सर्जरी में स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की।
उच्च प्रशिक्षण के लिए वे दिल्ली के प्रसिद्ध सफदरजंग अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने प्लास्टिक सर्जरी की बारीकियां सीखीं। बाद में मुंबई से प्लास्टिक सर्जरी में डीएनबी की उपाधि प्राप्त की।
साल 1990 से शुरू हुआ चिकित्सा सेवा का मिशन
साल 1990 में डॉ. कालडा ने रायपुर में अपने चिकित्सा जीवन की शुरुआत की। शुरुआती दौर आसान नहीं था। सीमित संसाधन, कम सुविधाएं और कठिन परिस्थितियों के बीच उन्होंने मरीजों का इलाज शुरू किया। लेकिन उनकी मेहनत, समर्पण और सर्जरी में दक्षता ने उन्हें जल्द ही देश के प्रमुख प्लास्टिक सर्जनों में शामिल कर दिया।
बाद में उन्होंने कालडा बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी सेंटर की स्थापना की। आज यह अस्पताल अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त एक प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान बन चुका है, जहां जटिल प्लास्टिक, कॉस्मेटिक और पुनर्निर्माण सर्जरी की जाती हैं।
गरीबों के लिए मसीहा बने डॉ. कालडा
डॉ. कालडा की सबसे बड़ी पहचान उनकी समाज सेवा है। उन्होंने हजारों गरीब और जरूरतमंद मरीजों की निःशुल्क सर्जरी कर मानवता की अनोखी मिसाल पेश की।
मुख्य उपलब्धियां
* 70 हजार से अधिक निःशुल्क सर्जरी* 27 हजार से अधिक कटे होंठ और तालू के ऑपरेशन* 1 लाख 75 हजार से अधिक कुल सर्जरी* 200 से अधिक निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर* आदिवासी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवा* ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए निःशुल्क लिंग परिवर्तन सर्जरी
उनकी इस ऐतिहासिक सेवा को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया गया।
“ऑपरेशन मुस्कान” से हजारों बच्चों को मिला नया जीवन
कटे होंठ और तालू से पीड़ित बच्चों के लिए डॉ. कालडा ने “ऑपरेशन मुस्कान” अभियान चलाया। इस अभियान का उद्देश्य ऐसे बच्चों को सामान्य जीवन देना था, जिन्हें जन्म से ही चेहरे की विकृति का सामना करना पड़ता था।
इस अभियान के तहत हजारों बच्चों की सफल सर्जरी की गई। इलाज के बाद इन बच्चों के चेहरे पर लौटी मुस्कान ने हजारों परिवारों की जिंदगी बदल दी।
डॉ. कालडा स्माइल ट्रेन परियोजना से भी जुड़े रहे, जो विश्वभर में क्लेफ्ट लिप और तालू के मरीजों के इलाज के लिए कार्य करती है।
बर्न केयर के क्षेत्र में भी किया बड़ा काम
डॉ. कालडा ने केवल प्लास्टिक सर्जरी तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने बर्न केयर यानी झुलसे मरीजों के इलाज के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने अत्याधुनिक सुपर बर्न आईसीयू की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को बेहतर उपचार मिलने लगा।
210 ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की मुफ्त लिंग परिवर्तन सर्जरी
समाज सेवा के क्षेत्र में डॉ. कालडा की एक और बड़ी उपलब्धि ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए किया गया कार्य है।
उन्होंने 210 ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की निःशुल्क लिंग परिवर्तन सर्जरी कर नई मिसाल कायम की। इसके लिए उन्हें गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स से सम्मानित किया गया।
यह सम्मान छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की प्रमुख सोनल शर्मा द्वारा प्रदान किया गया।
सम्मानों से नवाजे गए डॉ. कालडा
चिकित्सा और समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए डॉ. कालडा को कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
प्रमुख सम्मान
* डॉ. बी.सी. रॉय पुरस्कार* शहीद वीर नारायण सिंह सम्मान* विहान सम्मान* गौरव पुरस्कार* गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स सम्मान
इन पुरस्कारों ने उनके कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई।
रायपुर बना अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा विमर्श का केंद्र
राजधानी रायपुर का मोवा क्षेत्र इन दिनों अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा चर्चा का केंद्र बना हुआ है। कालडा बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय राइनोप्लास्टी कार्यशाला में इंग्लैंड से आए प्रसिद्ध प्लास्टिक सर्जन डॉ. नासिर ने भाग लिया।
इस दौरान डॉ. नासिर और डॉ. सुनील कालडा ने मिलकर 10 जटिल मामलों की सफल सर्जरी की। कार्यशाला में देशभर से पहुंचे प्लास्टिक सर्जनों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।
डॉ. नासिर ने बताई भारत और यूके की स्थिति
विशेष बातचीत में डॉ. नासिर ने बताया कि इंग्लैंड में नशे की लत के कारण नाक की संरचना खराब होने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। वहीं भारत में जन्मजात विकृति, दुर्घटनाओं और कटे होंठ-तालू के कारण नाक की विकृति के मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं।
उन्होंने कहा कि आज लोग अपने चेहरे और व्यक्तित्व को लेकर अधिक जागरूक हो चुके हैं। इसी कारण कॉस्मेटिक सर्जरी की मांग तेजी से बढ़ रही है।
राइनोप्लास्टी सर्जरी क्यों होती है जटिल
डॉ. नासिर के अनुसार राइनोप्लास्टी यानी नाक की कॉस्मेटिक सर्जरी बेहद जटिल प्रक्रिया होती है। इसमें हड्डी, कार्टिलेज और त्वचा की संरचना को ध्यान में रखते हुए सर्जरी की जाती है।
जरूरत पड़ने पर पसली, कान के पीछे या नाक के अंदर के हिस्से से टिश्यू लेकर नाक का नया आकार तैयार किया जाता है। जिन मरीजों को सांस लेने में परेशानी होती है, उनमें सेप्टोप्लास्टी भी की जाती है।
सर्जरी के बाद मरीज को एक से दो सप्ताह तक पट्टी रखनी पड़ती है और सूजन पूरी तरह कम होने में कई महीने लग सकते हैं।
मानवता की सच्ची मिसाल हैं डॉ. सुनील कालडा
आज डॉ. सुनील कालडा केवल एक सफल प्लास्टिक सर्जन नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और संवेदनशीलता की पहचान बन चुके हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि डॉक्टर अपने पेशे को केवल व्यवसाय नहीं बल्कि सेवा का माध्यम बना लें, तो वे हजारों जिंदगियों में खुशियां लौटा सकते हैं।

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