मंत्रालय के आदेश की अनदेखी, खंड शिक्षा अधिकारी के फैसले पर बढ़ा विवाद

मंत्रालय के आदेश की अनदेखी, खंड शिक्षा अधिकारी के फैसले पर बढ़ा विवाद


मंत्रालय के आदेश की अनदेखी, खंड शिक्षा अधिकारी के फैसले पर बढ़ा विवाद
कांकेर में शिक्षा विभाग का नया विवाद, दो स्कूलों के युक्तियुक्तकरण पर टकराव
कांकेर। जिले में शिक्षा विभाग के एक आदेश को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। आमापारा और शीतलापारा प्राथमिक शालाओं के युक्तियुक्तकरण को लेकर जारी आदेशों में विरोधाभास सामने आने से स्थानीय स्तर पर असंतोष बढ़ गया है। मंत्रालय स्तर से जारी स्पष्ट निर्देशों के बावजूद खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा विपरीत निर्णय लिए जाने से न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि वार्डवासियों में भी भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
मंत्रालय बनाम स्थानीय आदेश, आखिर सही कौन
मंत्रालय द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट रूप से शीतलापारा प्राथमिक शाला को आमापारा प्राथमिक शाला में समायोजित करने की बात कही गई थी। लेकिन खंड शिक्षा अधिकारी के स्तर पर जारी आदेश में उलट फैसला लेते हुए आमापारा प्राथमिक शाला को शीतलापारा में जोड़ने की बात सामने आई। इस विरोधाभासी निर्णय ने पूरे मामले को उलझा दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना किसी नए उच्चस्तरीय निर्देश के इस तरह का बदलाव करना नियमों की अनदेखी को दर्शाता है।
वार्डवासियों में आक्रोश, निर्णय पर उठे सवाल
आमापारा वार्ड के निवासियों ने इस फैसले पर कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि जब पहले से स्पष्ट आदेश मौजूद है, तो उसी के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। लोगों का आरोप है कि खंड शिक्षा अधिकारी ने मनमाने तरीके से निर्णय लिया, जिससे अभिभावकों और बच्चों के सामने असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। वार्ड के कई नागरिकों ने इसे प्रशासनिक लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैया बताया है।
शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है व्यापक असर
स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह के विरोधाभासी आदेशों का सीधा असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है। यदि स्कूलों का स्थान बदलता है, तो बच्चों को अधिक दूरी तय करनी पड़ सकती है, जिससे उनकी नियमित पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा सुविधाओं में असमानता, शिक्षक व्यवस्था और संसाधनों के बंटवारे पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अभिभावकों ने चिंता व्यक्त की है कि यदि स्थिति जल्द स्पष्ट नहीं हुई, तो बच्चों की पढ़ाई बाधित हो सकती है।
जांच और समाधान की मांग तेज, आंदोलन की चेतावनी
वार्डवासियों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने और मंत्रालय के मूल आदेश को लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने। साथ ही, यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
जनप्रतिनिधियों की मांग, स्कूल बंद नहीं बल्कि उन्नत किया जाए
वार्ड के गणमान्य सदस्य और जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि आमापारा प्राथमिक शाला पिछले 30 वर्षों से संचालित हो रही है और यह क्षेत्र के बच्चों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। स्कूल बंद होने से बच्चों की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने प्रशासन के सामने यह मांग भी रखी थी कि स्कूल को बंद करने के बजाय इसे अंग्रेजी माध्यम स्कूल में परिवर्तित किया जाए, ताकि गरीब परिवारों के बच्चे भी बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकें।

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