घाटे में चल रही एयर इंडिया मोदी सरकार के लिए बड़ा सर दर्द बनती जा रही है। छह एयरपोर्ट पर तेल कंपनियों ने एयर इंडिया के विमानों की ईधन आपूर्ति रोक दी है। तेल कंपनियों ने भुगतान ना मिलने की वजह से ये फैसला लिया है। कंपनी के पास अपने कर्मचारियों को अक्टूबर माह की सैलरी देने के लिए पैसे नहीं है। एयरइंडिया की खस्ताहालत को देखते हुए सरकार की तरफ से गठित मंत्री समूह इस बारे में एक हफ्ते के भीतर फैसला ले सकता है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक मई में सत्ता में लौटने के बाद मोदी सरकार ने अगले हफ्ते गठित मंत्रियों के समूह की मीटिंग बुलाई है। इस मीटिंग में सरकार के स्वामित्व वाली एयरलाइन के बिक्री के तौर तरीकों पर कोई निर्णय होने की संभावना है।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के लोगों ने कहा है कि सरकार इस बार इसकी 100 फीसदी हिस्सेदारी बेच सकती है। नागर विमानन मंत्री हरदीप पुरी ने 16 अगस्त को कहा कि मंत्रियों के समूह की बैठक से पहले एक आंतरिक बैठक होगी। इसके बाद ही सरकार एयर इंडिया की बिक्री से संबंधित प्रक्रिया शुरू करेगी।
गौतलब है कि एयर इंडिया बड़े वित्तीय संकट की चपेट में है और गुरुवार को तेल कंपनियों ने बकाया भुगतान न करने के कारण, रांची, मोहाली, पटना, , विशाखापट्टनम, पुणे और कोच्चिन में कंपनी के हवाई जहाजों को मिलने वाली ईंधन की सप्लाई को रोक दिया है।
लोगों के मुताबिक, एयर इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अश्वनी लोहानी ने पहले ही मंत्रालय को फंड संकट के बारे में सूचित कर दिया है। एयर इंडिया को वेतन के लिए प्रति माह 300 करोड़ की जरूरत है और उसके पास अक्टूबर से आगे वेतन देने के लिए पैसा नहीं है।

