15 मार्च को जंतर-मंतर पर देशभर के मजदूरों का महाधरना “श्रम शक्ति ही राष्ट्र शक्ति” – स्वामीनाथ जायसवाल

15 मार्च को जंतर-मंतर पर देशभर के मजदूरों का महाधरना

“श्रम शक्ति ही राष्ट्र शक्ति” – स्वामीनाथ जायसवाल

यमुनानगर/दिल्ली।
भारतीय राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (महासंघ) इंटक के राष्ट्रीय आह्वान पर 15 मार्च को नई दिल्ली स्थित जंतर मंतर पर देशभर के मजदूरों और विभिन्न श्रमिक संगठनों का विशाल धरना-प्रदर्शन एवं जनसभा आयोजित की जाएगी। “दिल्ली चलो” अभियान के तहत आयोजित इस महाधरने को श्रमिक अधिकारों की दिशा में एक निर्णायक पहल माना जा रहा है। आयोजन में विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में श्रमिकों, ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
इंटक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामीनाथ जायसवाल ने कहा कि मजदूर वर्ग अब अपने अधिकारों की अनदेखी और श्रम विरोधी नीतियों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले श्रमिक आज असुरक्षा, अस्थायी रोजगार, महंगाई और न्यूनतम वेतन जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में सरकार को श्रमिक हितों की रक्षा के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने होंगे।
उन्होंने मांग की कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को पूर्ण प्रभाव के साथ लागू किया जाए और इसका दायरा बढ़ाया जाए, ताकि ग्रामीण ही नहीं बल्कि शहरी क्षेत्रों में भी श्रमिकों को रोजगार की गारंटी मिल सके। उन्होंने कहा कि रोजगार के अवसरों में कमी और असंगठित क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता ने श्रमिकों की आर्थिक स्थिति को कमजोर किया है। मनरेगा जैसी योजनाओं को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।
स्वामीनाथ जायसवाल ने जोर देते हुए कहा कि श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, स्वास्थ्य बीमा, रोजगार संरक्षण और न्यूनतम वेतन की कानूनी गारंटी सुनिश्चित की जानी चाहिए। श्रम कानूनों का सख्ती से पालन हो और ठेका प्रथा के दुरुपयोग पर रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि श्रम शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है और मजदूरों की मजबूती से ही देश की अर्थव्यवस्था सशक्त होगी। यदि श्रमिक वर्ग सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी सकेगा, तभी उत्पादन, उद्योग और सेवा क्षेत्र में स्थिरता आएगी।
इंटक महासंघ ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में आयोजित किया जाएगा। संगठन का कहना है कि उनका उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से समाधान प्राप्त करना है। धरना-प्रदर्शन के माध्यम से श्रमिकों की समस्याओं को राष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता से उठाया जाएगा और सरकार का ध्यान इन मुद्दों की ओर आकर्षित किया जाएगा।
संगठन ने सभी राज्य इकाइयों, जिला अध्यक्षों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में 15 मार्च को जंतर-मंतर पहुंचकर श्रमिक एकता का परिचय दें। विभिन्न राज्यों में बैठकों और तैयारियों का दौर तेज हो गया है। श्रमिक संगठनों के बीच व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा मजदूर इस आंदोलन में शामिल हो सकें।
धरने के दौरान विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को मंच से रखेंगे। एक साझा प्रस्ताव भी पारित किए जाने की संभावना है, जिसे संबंधित मंत्रालयों और सरकार को सौंपा जाएगा। साथ ही आगे की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा, जिससे श्रमिक हितों की लड़ाई को संगठित और प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।
मजदूर संगठनों का कहना है कि देश की विकास यात्रा में श्रमिकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। निर्माण कार्य, उद्योग, परिवहन, कृषि, सेवा क्षेत्र और छोटे-बड़े व्यवसायों में श्रमिकों का योगदान आधारशिला के समान है। इसके बावजूद यदि उनके अधिकारों की अनदेखी होती है तो यह न केवल सामाजिक असमानता को बढ़ाएगा, बल्कि आर्थिक संतुलन को भी प्रभावित करेगा।

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