अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग की टीम ने अस्पताल पहुँचकर जाना घायलों का हाल; प्रबंधन को दिए सख्त निर्देश



दिनांक: 11 फरवरी 2026 स्थान: रायपुर (छत्तीसगढ़)अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग की टीम ने अस्पताल पहुँचकर जाना घायलों का हाल; प्रबंधन को दिए सख्त निर्देश
रायपुर: रायगढ़ जिले के खरसिया (ग्राम बानीपाथर) स्थित ‘मंगल कार्बन प्लांट’ में हुए भीषण विस्फोट के पीड़ितों को न्याय दिलाने हेतु अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग की एक उच्च स्तरीय टीम ने रायपुर स्थित कालड़ा बर्न्स एंड प्लास्टिक सर्जरी सेंटर का दौरा किया और वहां भर्ती गंभीर रूप से झुलसे मजदूरों का हाल जाना। एक रिहायशी क्षेत्र के पास स्थित प्लांट में इस तरह का विस्फोट प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
आयोग के पदाधिकारियों ने घायलों और उनके परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। साथ ही, अस्पताल प्रबंधन से चर्चा कर सख्त निर्देश दिए कि घायलों के उपचार में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही न बरती जाए। आयोग ने स्पष्ट किया कि इन मजदूरों का जीवन बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
प्रदेश महासचिव प्रदुमन शर्मा ने इस दौरान कहा कि, “एक ओर मासूम बच्ची और मजदूर दम तोड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर फैक्ट्री प्रबंधन पीड़ितों की मदद करने के बजाय उन पर FIR वापस लेने का अनैतिक दबाव बना रहा है। अत्यंत दुखद है कि उपचार के दौरान अब तक 04 व्यक्तियों (भूमि खड़िया, शिव खड़िया, साहेब लाल खड़िया और इंद्रीश कुलदीप) की मृत्यु हो चुकी है, जो कि एक ही परिवार के सदस्य थे। दुर्घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी कंपनी प्रबंधन द्वारा पीड़ित परिवारों को अब तक किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता या उचित मुआवजा प्रदान नहीं किया गया है, जो कि अमानवीय है और प्रबंधन की संवेदनहीनता को दर्शाता है।”
दौरे के दौरान रायपुर जिला अध्यक्ष आकाश जैस्वाल ने प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि, “यह केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि आपराधिक लापरवाही है। औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि रिहायशी इलाके के पास ऐसे खतरनाक प्लांट को अनुमति कैसे मिली? प्रशासन तत्काल कंपनी की संपत्ति कुर्क कर पीड़ितों को अंतरिम राहत राशि प्रदान करे.
पूर्वी भारत जोन के महासचिव शब्बीर अहमद ने साफ़ शब्दों में कहा है कि यदि प्रशासन द्वारा दोषियों पर जल्द कड़ी कार्रवाई नहीं की जाती, तो आयोग इस मामले को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर उठाएगा। उन्होंने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन और सुरक्षा मानकों की घोर लापरवाही करार दिया।
इस विजिट के दौरान पूर्वी भारत जोन के महासचिव शब्बीर अहमद, छत्तीसगढ़ प्रदेश महासचिव प्रदुमन शर्मा, प्रदेश संगठन प्रभारी राहुल शर्मा, रायपुर अध्यक्ष आकाश जैस्वाल एवं उपाध्यक्ष प्रदीप चौहान मुख्य रूप से मौजूद रहे।

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