अयान न्यूज भांसी दंतेवाड़ा से
असीम पाल कि रिपोर्ट
दंतेवाड़ा नगरपालिकाअपने अजब गजब कारनामे के लिए है मशहूर अपने ही कर्मचारियों के परिजनों के लिए बनवा रही दुकानें !- परिषद से भी हो चुका है पास, दुकान बनाने का प्रस्ताव.-
दुकान निर्माण एवं आबंटन प्रक्रिया नियमों को ताक पर रखा.- नपा की अजब गजब कारनामे देख सुनकर हर कोई हैरान.- एनएच नियमों को भी किया दरकिनार.-नियमत: पालिका अपने किसी भी कर्मचारी को नहीं पहुंचा सकता लाभ.———————————————————दंतेवाड़ा 30 मई। दंतेवाड़ा नगर पालिका अपने अजब गजब कारनामे के लिए मशहूर है। इस बार नगर पालिका की चर्चा इसलिए खास है क्योंकि नपा द्वारा आंवराभाटा में पालिका मार्केट परिसर में ही 2 दुकान निर्माण करवाया जा रहा है और यह पता चला है कि इन दुकानों को नगर पालिका में कार्यरत दो कर्मचारियों के परिजनों के नाम पर तैयार किया जा रहा है और बकायदा परिषद में भी इसे पास करवा लिया गया है। है ना अजब गजब कारनामा। ऐसा कहीं देखा नहीं, कहीं सुना नहीं कि किसी विभागीय कर्मचारियों के पत्नियों के नाम पर वो भी सरकारी भूमि पर दुकान बनाकर दिया गया हो मगर नगर पालिका दंतेवाड़ा में आज की तारीख में ये सब संभव है। वहीं दूसरी तरफ बेरोजगार युवक मारे मारे फिर रहे हैं उहें अपना स्वयं के रोजगार के लिए न दुकानें मिल रही है ना ही उन्हें कोई जगह आबंटित की जा रही है न ही पालिका द्वारा मांगे जाने पर गुमटी ठेला इत्यादि ही उपलब्ध करवाया जा रहा है। गौरतलब है कि दंतेवाड़ा नगर पालिका में मनमानी इन दिनों चरम पर है। जब से नए सीएमओ पवन मेरिया ने दूसरी बार कार्यभार सम्हाला है तब से पालिका में गजबई तमाशा चल रहा है। जनहित के कार्यो को छोड़ पालिका विभाग अपने ही कर्मचारियों की सेवा करने में लगा हुआ है। नियम विरूद्ध दुकान निर्माण एवं आबंटन का मामला प्रकाश में आया है जो इस प्रकार है कि आंवराभाटा वार्ड क्रमांक 10 सुभाष चंद्र बोस वार्ड में नपा द्वारा बनाए गए कॉम्प्लेक्स परिसर के भीतर ही मेन सड़क से लगे तथा डीएफओ निवास के ठीक बाजू में 2 दुकानों का निर्माण कार्य वर्तमान में धड़ल्ले से चल रहा है। इस दुकान के बारे में पालिका के भीतर से ही निकलकर जो बातें सामने आई है उसके मुताबिक करीब साल भर पूर्व ही उक्त जगह पर दुकान बनाने के संबंध में प्रस्ताव पालिका से पास करवा लिया गया था। मिली जानकारी के मुताबिक पालिका में में कार्यरत दो कर्मचारियों की पत्नियों को देने के नाम पर दुकानें बनवाई जा रही है। ऐसी जानकारी है कि दुकान निर्माण में होने वाला खर्च लाभावित कर्मचारी स्वयं कर रहा है। सवाल उठता है कि सरकारी जमीन पर पक्के दुकान का निर्माण क्या किसी कर्मचारी या उनके परिजनों को आबंटित की जा सकती है? सबसे बड़ी लापरवाही यह कि निर्माणाधीन दुकानें नेशनल हाईवे 163 ए मुख्य मार्ग पर बनाई जा रही है इसके लिए क्या एनएच विभाग से एनओसी लिया गया है? नियमत: एनएच की सड़क के बीच से करीब साढ़े बाईस मीटर की दूरी छोड़कर ही निर्माण नहीं होना है लेकिन बन रही दुकान की दूरी इससे काफी कम है इस लिहाज से यह निर्माण एनएच नियमों का भी उल्लंघन दिखाई पड़ रहा है इसकी भी जांच आवश्यक है। दुकान आबंटन प्रक्रिया को ठेंगा दिखाते हुए अपने कर्मचारियों के पत्नियों के नाम गुपचुप तरीके से एलॉट किया गया है ऐसी पुख्ता खबर मिली है। नियमत: ओपन निविदा बुलाई जाती है। जिसकी बोली सबसे यादा उपर जाती है उसे दुकान आबंटन उसके नाम होता है। दुकान आबंटन के और भी कई नियम है लेकिन यह पहली दफा देखने सुनने को मिल रहा है कि पालिका द्वारा अपने कर्मचारियों को दुकान बनने से पूर्व ही दुकान आबंटित कर चुकी है। यह किस नियम के तहत हो रहा है यह तो पता नहीं लेकिन इतना अवश्य है कि इसके पीछे कोई गहरी साजिश है और अपनों को फायदा पहुंचाने की कोशिश जान पड़ती है। आखिर किसके इशारे पर यह खेल हो रहा है इसके पीछे कौन लोग हैं? इसका पर्दाफाश होना बेहद जरूरी है। बताते चलें कि दंतेवाड़ा जिला एक आदिवासी बाहुल जिला है यहां पालिका समेत विाायक एवं सांसद की सीट भी आदिवासियों के लिए आरक्षित है। किसी भी सरकारी नौकरी या दुकान आबंटन में एसटी-एससी की सीटें यादा संख्या में होती है। ऐसे में पालिका द्वारा तीन दुकानों का निर्माण करवाकर अपने कर्मचारियों को दिये जाने को हरी झंडी किस नियम के तहत दिया गया है इसका खुलासा होना बेहद जरूरी है। वहीं जिले के हजारों बेरोजगार युवकों के साथ छलावा है। इस संबंध में जब पालिका का पक्ष जानने के लिए सीएमओ पवन मेरिया को फोन किया गया तो उन्होने फोन रिसिव नहीं किया इसलिए उनका पक्ष सामने नहीं आ पाया तो संयुक्त संचालक नगरीय विभाग क्षेत्रीय कार्यालय जगदलपुर श्री अवस्थी से जब इस संबंध में जानकारी चाही गई कि क्या कर्मचारियों के नाम दुकान आबंटन किया जा सकता है तो उहोने कहा कि इस संबंध में उहें कोई जानकारी नहीं है। आगामी 8 जून को नगरीय विभाग क्षेत्रिय कार्यालय जगदलपुर में बैठक रखी गई है उक्त बैठक में दंतेवाड़ा सीएमओ से इस विषय में जानकारी ली जाएगी उसके बाद ही वे इस विषय पर अपनी राय दे पाएंगे।
असीम पाल ब्यूरोदंतेवाड़ा
दंतेवाड़ा नगरपालिकाअपने अजब गजब कारनामे के लिए है मशहूर अपने ही कर्मचारियों के परिजनों के लिए बनवा रही दुकानें !- परिषद से भी हो चुका है पास, दुकान बनाने का प्रस्ताव.-
दुकान निर्माण एवं आबंटन प्रक्रिया नियमों को ताक पर रखा.- नपा की अजब गजब कारनामे देख सुनकर हर कोई हैरान.- एनएच नियमों को भी किया दरकिनार.-नियमत: पालिका अपने किसी भी कर्मचारी को नहीं पहुंचा सकता लाभ.———————————————————दंतेवाड़ा 30 मई। दंतेवाड़ा नगर पालिका अपने अजब गजब कारनामे के लिए मशहूर है। इस बार नगर पालिका की चर्चा इसलिए खास है क्योंकि नपा द्वारा आंवराभाटा में पालिका मार्केट परिसर में ही 2 दुकान निर्माण करवाया जा रहा है और यह पता चला है कि इन दुकानों को नगर पालिका में कार्यरत दो कर्मचारियों के परिजनों के नाम पर तैयार किया जा रहा है और बकायदा परिषद में भी इसे पास करवा लिया गया है। है ना अजब गजब कारनामा। ऐसा कहीं देखा नहीं, कहीं सुना नहीं कि किसी विभागीय कर्मचारियों के पत्नियों के नाम पर वो भी सरकारी भूमि पर दुकान बनाकर दिया गया हो मगर नगर पालिका दंतेवाड़ा में आज की तारीख में ये सब संभव है। वहीं दूसरी तरफ बेरोजगार युवक मारे मारे फिर रहे हैं उहें अपना स्वयं के रोजगार के लिए न दुकानें मिल रही है ना ही उन्हें कोई जगह आबंटित की जा रही है न ही पालिका द्वारा मांगे जाने पर गुमटी ठेला इत्यादि ही उपलब्ध करवाया जा रहा है। गौरतलब है कि दंतेवाड़ा नगर पालिका में मनमानी इन दिनों चरम पर है। जब से नए सीएमओ पवन मेरिया ने दूसरी बार कार्यभार सम्हाला है तब से पालिका में गजबई तमाशा चल रहा है। जनहित के कार्यो को छोड़ पालिका विभाग अपने ही कर्मचारियों की सेवा करने में लगा हुआ है। नियम विरूद्ध दुकान निर्माण एवं आबंटन का मामला प्रकाश में आया है जो इस प्रकार है कि आंवराभाटा वार्ड क्रमांक 10 सुभाष चंद्र बोस वार्ड में नपा द्वारा बनाए गए कॉम्प्लेक्स परिसर के भीतर ही मेन सड़क से लगे तथा डीएफओ निवास के ठीक बाजू में 2 दुकानों का निर्माण कार्य वर्तमान में धड़ल्ले से चल रहा है। इस दुकान के बारे में पालिका के भीतर से ही निकलकर जो बातें सामने आई है उसके मुताबिक करीब साल भर पूर्व ही उक्त जगह पर दुकान बनाने के संबंध में प्रस्ताव पालिका से पास करवा लिया गया था। मिली जानकारी के मुताबिक पालिका में में कार्यरत दो कर्मचारियों की पत्नियों को देने के नाम पर दुकानें बनवाई जा रही है। ऐसी जानकारी है कि दुकान निर्माण में होने वाला खर्च लाभावित कर्मचारी स्वयं कर रहा है। सवाल उठता है कि सरकारी जमीन पर पक्के दुकान का निर्माण क्या किसी कर्मचारी या उनके परिजनों को आबंटित की जा सकती है? सबसे बड़ी लापरवाही यह कि निर्माणाधीन दुकानें नेशनल हाईवे 163 ए मुख्य मार्ग पर बनाई जा रही है इसके लिए क्या एनएच विभाग से एनओसी लिया गया है? नियमत: एनएच की सड़क के बीच से करीब साढ़े बाईस मीटर की दूरी छोड़कर ही निर्माण नहीं होना है लेकिन बन रही दुकान की दूरी इससे काफी कम है इस लिहाज से यह निर्माण एनएच नियमों का भी उल्लंघन दिखाई पड़ रहा है इसकी भी जांच आवश्यक है। दुकान आबंटन प्रक्रिया को ठेंगा दिखाते हुए अपने कर्मचारियों के पत्नियों के नाम गुपचुप तरीके से एलॉट किया गया है ऐसी पुख्ता खबर मिली है। नियमत: ओपन निविदा बुलाई जाती है। जिसकी बोली सबसे यादा उपर जाती है उसे दुकान आबंटन उसके नाम होता है। दुकान आबंटन के और भी कई नियम है लेकिन यह पहली दफा देखने सुनने को मिल रहा है कि पालिका द्वारा अपने कर्मचारियों को दुकान बनने से पूर्व ही दुकान आबंटित कर चुकी है। यह किस नियम के तहत हो रहा है यह तो पता नहीं लेकिन इतना अवश्य है कि इसके पीछे कोई गहरी साजिश है और अपनों को फायदा पहुंचाने की कोशिश जान पड़ती है। आखिर किसके इशारे पर यह खेल हो रहा है इसके पीछे कौन लोग हैं? इसका पर्दाफाश होना बेहद जरूरी है। बताते चलें कि दंतेवाड़ा जिला एक आदिवासी बाहुल जिला है यहां पालिका समेत विाायक एवं सांसद की सीट भी आदिवासियों के लिए आरक्षित है। किसी भी सरकारी नौकरी या दुकान आबंटन में एसटी-एससी की सीटें यादा संख्या में होती है। ऐसे में पालिका द्वारा तीन दुकानों का निर्माण करवाकर अपने कर्मचारियों को दिये जाने को हरी झंडी किस नियम के तहत दिया गया है इसका खुलासा होना बेहद जरूरी है। वहीं जिले के हजारों बेरोजगार युवकों के साथ छलावा है। इस संबंध में जब पालिका का पक्ष जानने के लिए सीएमओ पवन मेरिया को फोन किया गया तो उन्होने फोन रिसिव नहीं किया इसलिए उनका पक्ष सामने नहीं आ पाया तो संयुक्त संचालक नगरीय विभाग क्षेत्रीय कार्यालय जगदलपुर श्री अवस्थी से जब इस संबंध में जानकारी चाही गई कि क्या कर्मचारियों के नाम दुकान आबंटन किया जा सकता है तो उहोने कहा कि इस संबंध में उहें कोई जानकारी नहीं है। आगामी 8 जून को नगरीय विभाग क्षेत्रिय कार्यालय जगदलपुर में बैठक रखी गई है उक्त बैठक में दंतेवाड़ा सीएमओ से इस विषय में जानकारी ली जाएगी उसके बाद ही वे इस विषय पर अपनी राय दे पाएंगे।
असीम पाल ब्यूरोदंतेवाड़ा

