एनडीआर‌एफ ने डीडीएम‌ए के साथ शुरू किया विशेष पहल : नदियों के तटीय क्षेत्र के गांवों में डूबने से बचाव और बाढ़ बचाव का दिया जा रहा है प्रशिक्षण

*11 एनडीआरएफ गोरखपुर**दिनांक 11.05.2023*
*एनडीआर‌एफ ने डीडीएम‌ए के साथ शुरू किया विशेष पहल : नदियों के तटीय क्षेत्र के गांवों में डूबने से बचाव और बाढ़ बचाव का दिया जा रहा है प्रशिक्षण*
गोरखपुर:- उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में नदियों का संजाल है जिसमें मुख्य रुप से गंगा, घाघरा, राप्ती इत्यादि नदियां विद्यमान है। इन नदियों के तटीय क्षेत्र में बहुत सारे गांव बसा हुआ है, नदियों के समीप बसे हुए गांव के बच्चे ग्रीष्मकालीन में नदियों में नहाने के लिए जाते हैं और खेल-खेल में अपनी जान गवां बैठते हैं। उपर्युक्त तराई बेल्ट में प्रत्येक वर्ष लगभग सैकड़ों लोगों का नदी में डूबने के कारण मौत हो जाती है।उपर्युक्त घटनाओं को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) ने प्रत्येक जिले में सक्रिय आपदा सलाहकारों से डुबने की घटनाओं का आंकड़ा इकट्ठा किया गया और जहां पर सबसे ज्यादा डुबने की घटना घटित हुई है उन स्थानों को रेड जोन में रखा गया है, तथा इन क्षेत्रों में कम से कम ऐसी घटना घटित हो इसके लिए 11वीं एनडीआरएफ के श्री मनोज कुमार शर्मा , डीआईजी के दिशा-निर्देशन में एनडीआरएफ के द्वारा लोगों को जागरूक करने के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया गया है।जिसके अंतर्गत आज जनपद गोरखपुर के तहसील सहजनवा के कोलिया ग्राम सभा के लोगों को जागरूक करने के लिए ग्राम प्रधान राजेंद्र निषाद के सहयोग से जागरूकता अभियान चलाया गया।इस अभियान के अंतर्गत निरीक्षक सुधीर कुमार एवं प्रशिक्षक टीम ने गांव वालों को बताया की घरेलू सामान से तैरने वाली वस्तु , स्ट्रेचर को कैसे तैयार किया जाता है और इसका इस्तेमाल कैसे किया जाता है, सर्प दंश के दौरान क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए, आकाशीय बिजली से बचाव का तरीका, डूबते हुए व्यक्ति को बचाने का तरीका एवं पानी निकालने का तरीका, सी.पी.आर पद्धति के बारे में प्रदर्शन के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया एवं गांव के लोगों द्वारा उपयुक्त प्रशिक्षण का अभ्यास कराया गया तथा बाढ़ से पहले बाढ़ के दौरान एवं बाढ़ के उपरांत के क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए इसके बारे में विस्तृत जानकारी ग्रामीणों को दिया गया।डीडीएमए से अंकित कुमार एवं राणा प्रताप सिंह मौजूद रहे

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