“जन सहयोग ” ने आज फिर एक बुजुर्ग की जान बचाई,,,,,,,,
,,,,,कांकेर । लोकप्रिय जन सेवी संस्था “जन सहयोग” के सदस्यों द्वारा अपनी मानवता की भावना से प्रेरित होकर आज पुनः एक ग़रीब बुजुर्ग को मरणासन्न अवस्था से बचा लिया गया और उसकी तबीयत ठीक होते तक सेवा की गई। नरेंद्र कोठारी आत्मज स्वर्गीय लक्ष्मीदास कोठारी अत्यंत दीनहीन तथा बीमार अवस्था में एक सामाजिक भवन में बेसहारा पड़े हुए थे। उन्होंने कई दिनों से स्नान भोजन कुछ नहीं किया था। इनके विषय में मालूम होते ही “जन सहयोग” संस्था के अध्यक्ष अजय पप्पू मोटवानी ने तुरंत कदम उठाते हुए अपने साथियों सहित अन्नपूर्णा पारा पहुंचकर बुजुर्ग से बातचीत की तो पता चला कि वे रहने वाले कांकेर के ही हैं ,यही जन्म हुआ था लेकिन 10 वर्ष पूर्व वे अपने पूर्वजों के स्थान कच्छ गुजरात के भुज शहर में चले गए थे। वहां से 10 साल बाद जन्म भूमि की याद आने पर जब वे लौटे तो उन्होंने दोबारा आर्थिक रूप से स्थापित होने की बहुत कोशिश की लेकिन क़िस्मत ने उनका साथ नहीं दिया ,उनकी हालत भिखारियों जैसी हो गई थी। स्वाभिमानी नरेंद्र कोठारी किसी से कुछ मांगते भी नहीं थे। किसी ने कभी कुछ भोजन दिया तो कर लेते थे । रहने का ठिकाना भी नहीं था, एक सामाजिक भवन के कोने में पड़े रहते थे और पिछले कई दिनों से भूखे रह रहे थे।” जन सहयोग ” के सदस्यों ने उनके स्नान तथा भोजन की उचित व्यवस्था की और मरणासन्न नरेंद्र कोठारी को बचा लिया। कच्छ जाने के पहले वे कांकेर में एक राशन दुकान में भी काम करते थे और उनके पिताजी स्वर्गीय लक्ष्मीदास कोठारी किसी व्यापारिक संस्था के मुनीम थे। “जन सहयोग” संस्था द्वारा नरेंद्र कोठारी के स्नान, शेविंग तथा भोजन के प्रबंध के पश्चात स्थानीय गुजराती समाज को सूचित किया गया। आशा की जाती है कि गुजराती समाज अपने इस सामाजिक बुजुर्ग व्यक्ति के लिए कुछ न कुछ अवश्य करेगा। आज के इस मानवीय कार्य में सहयोग देने वाले सज्जनों में संस्था के अध्यक्ष अजय पप्पू मोटवानी, प्रवीण गुप्ता ,धर्मेंद्र देव, संजय माणेक, संत कुमार रजक, बल्लू राम यादव ,अमर मोटवानी आदि समाज सेवकों ने अपना हार्दिक सहयोग प्रदान किया ,जिसकी तारीफ़ कांकेर की आम जनता में की जा रही है।

