कविता और कवि कर्म का विश्व पुस्तक मेले में विमोचन

कविता और कवि कर्म का विश्व पुस्तक मेले में विमोचन
नई दिल्ली। आलोचना के मानक वास्तविक तथा जनपक्षीय होने चाहिए तभी उसकी सार्थकता हो सकती है। जीवन सिंह की कृति कविता और कृति कर्म इस कसौटी पर खरी उतरती है। सुप्रसिद्ध आलोचक और महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो शम्भु गुप्त ने जीवन सिंह की चर्चित आलोचना पुस्तक कविता और कवि कर्म के पुनर्नवा परिवर्धित संस्करण का विमोचन करते हुए कहा कि उनका चयन विश्वसनीय और असंदिग्ध है। प्रो गुप्त विश्व पुस्तक मेले में प्रभाकर प्रकाशन के स्टाल पर आयोजित विमोचन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान साहित्य अकादमी के सर्वोच्च मीरां पुरस्कार से सम्मानित इस कृति का नया संस्करण युवा पाठकों के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगा।समारोह में वरिष्ठ आलोचक प्रो माधव हाड़ा ने कहा कि जीवन सिंह ने जिस निष्ठा के साथ आलोचना कर्म किया है वह विरल है। लगभग निस्पृह भाव से किया गया उनका समूचा आलोचना कर्म गहन अध्यवसाय और एकनिष्ठ समर्पण का उदाहरण है। युवा आलोचक पल्लव ने कहा कि लोक संस्कृति और प्रगतिशील विचारधारा का एक साथ गहरा ज्ञान और प्रयोग जीवन सिंह के आलोचना कर्म की विशेषता है। पल्लव ने रामलीला तथा लोक नाट्यों पर किए गए जीवन सिंह के लेखन को भी रेखांकित किया। चर्चा में कथाकार रतनकुमार सांभरिया, लेखक अशोक तिवारी तथा विकास साल्याण ने भी भागीदारी की। संयोजन कर रहे चित्तौड़गढ़ से आए डॉ कनक जैन ने कहा कि धारा प्रवाह और सहज गद्य जीवन सिंह की लेखन शैली को विशिष्ट बनाता है। प्रभाकर प्रकाशन के संपादकीय प्रभारी अंशु चौधरी ने पुस्तक परिचय दिया तथा अंत में निहारिका सिंह लोधी ने आभार प्रदर्शन किया।

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