बावनकेरा :- जश्ने ईद मिलादुन्नबी के पावन मोके पर हिन्दू भाइयो ने जुलुस का इस्तकबाल कर सभी को चाय नास्ता कराया

इस्लाम धर्म के संस्थापक पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब का जन्मदिन बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। हजरत साहब दुनिया में अमन और भाईचारे का संदेश लेकर आए। उनके संदशों ने लाखों लोगों के विचारों और जीवन मूल्यों पर अभूतपूर्व प्रभाव डाला। उन्होंने पूरी दुनिया को मानवता का संदेश दिया। जिसका प्रभाव आज भीं बावनकेरा गॉव मे दिखाई देता है

ग्राम बावनकेरा का स्वर्णिम इतिहास रहा है। वर्षों पूर्व ग्राम बावनकेरा को हृदय में बिठाने वाले हजरत जाकिर शाह कादरी देश भ्रमण करते हुए बावनकेरा में निवास करने लगे। यहां का आचार विचार व रीति नीति से प्रभावित होकर सदा के लिए बावनकेरा के हो गए। अंग्रेजों के जमाने में जब महासमुंद में कोर्ट-कचहरी नहीं हुआ करता था। तब बावनकेरा वहां के प्रसिद्ध जमींदार हशरत खां एवं उनके पिता के जमाने में कचहरी हुआ करता था। एक बड़ी जमींदारी व रियासत संभालते हुए सभी के कल्याण के लिए उन्होंने बहुत कुछ किया। लेकिन इन सभी बातों में हजरत जाकिर शाह कादरी का आशीर्वाद आज भी पूरा इलाका व गांव वाले नहीं भूल पाते। जब दुनिया को अलविदा कहे, तब पूरे सम्मान व श्रद्धा के साथ उनका मजार बनवाया गया, अनेक चमत्कारिक घटनाओं के माध्यम से प्रसिद्ध हजरत जाकिर शाह कादरी धीरे-धीरे क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश व देश में प्रसिद्धि को प्राप्त किए। स्थिति आज यह है कि उनके दरगाह में आने को लोग हमेशा तैयार रहते हैं। मान्यता है कि बाबा के चौखट में आज तक जिसने भी मन्नतें मानी है, अवश्य ही पूरा हुआ है। इस ऐतिहासिक गांव में लगभग 50-50 प्रतिशत हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग निवास करते हैं। लेकिन बाबा की शिक्षा व आशीर्वाद ने आज तक हिंदू मुस्लिम एकता में दरार पैदा नहीं किया। जब देश धर्म व मजहब के नाम पर लड़ रहा हो, लेकिन बावनकेरा हमेशा एकता व भाईचारा का मिसाल पेश किया है। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुवे आज बावनकेरा मे जुलुस का इस्तेक़बाल करने वाले हिन्दू भाइयो मे बसंत सिन्हा ड्रोन चंद्राकर धनेश सिन्हा मोरध्वज चंद्राकर मुख्यरूप से उपस्थित रहे साथ ही सभी के चाय नास्ते का इन्तेजाम भीं किया

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