जुर्माना दे दो और मत बनाओ पार्किंग नगर निगम मास्टर प्लान की अनदेखी?
रायपुर ग्राम एवं नगर निवेश विभाग ने ऐसी योजना प्रस्तुत की है, जिसमें 5,000 वर्गफीट से अधिक व्यावसायिक कांप्लेक्स में अब पार्किग देने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि जुर्माना देकर बचा जा सकता है। ऐसे भवनों को वैध कराने के लिए आवेदन की प्रक्रिया अगले हफ्ते से शुरू हो सकती है। विभाग के आला अधिकारियों के मुताबिक विधि विभाग ने इस पर मसौदा तैयार कर लिया है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले राज्य सरकार ने इस मसौदे को केबिनेट में मंजूरी दे दी है।
मास्टर प्लान के हिसाब से रोड से नये निर्माण की दुरी तय है मास्टर प्लान की दुरी से कम मे निर्माण पर क्या होंगी निगम की प्रतिक्रिया
नगर निगम के अधिकारियों ने बताया
कि रायपुर की बढ़ती जनसंख्या और हर साल दोपहिया, चार पहिया वाहनों के दबाव के कारण पार्किंग की समस्या विकराल होती जा रही है। इसे ध्यान में रखकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने अनाधिकृत विकास का नियमितीकरण (संशोधन) अधिनियम विधेयक 2002 में बदलाव किया है। इस बदलाव से निगम क्षेत्र के 7000 अवैध निर्माण को जुर्माना चुकाकर वैध किया जा सकेगा। अधिकारियों के मुताबिक़ शहर में सात हजार अवैध निर्माण के वैध हो जाने से जहां सरकार की आय में इजाफा होगा वहीं पार्किंग के लिए निर्धारित स्थलों के होने वाले निर्माण पर रोक भी लगेगी। पांच साल पहले भी इस प्रकार का प्रविधान किया गया था, जिसमें 3,000 प्रकरणों का नियमितीकरण हुआ था।
केवल एक वर्ष ही देना होगा किराया : संशोधन के जरिए आवेदकों को राहत भी दी गई है। नियमितीकरण की अपील प्रक्रिया लंबित रहने की अवधि में अब अधिकतम एक वर्ष का ही किराया देना होगा। पूर्व में उन्हें नियमित किराया देना होता था। अधिसूचना का प्रकाशन राजपत्र में 14 जुलाई को कर दिया गया है। नए नियमों के तहत आवेदन नगर निगमों, पालिकाओं में जमा हो रहे हैं।

