रायपुर,सरोरा में श्री राम मंदिर वीआईपी रोड द्वारा आयोजित भागवत कथा में वृंदावन से पधारे रमन बिहारी को सुनने उमड़ी भारी भीड़,
नाम संकीर्तन और प्रणाम ही कलयुग में पाप और दुख दूर कर सकता है ||
श्री राम मंदिर वीआईपी रोड रायपुर द्वारा आयोजित सरोरा ( तिल्दा )में श्रीमद् भागवत कथा में आज विश्राम दिवस की कथा का वृंदावन से पधारे रमन बिहारी बहुत सुंदर ढंग से वर्णन किया| श्री कृष्ण रुक्मणी के विवाह के पश्चात भगवान के पुत्र हुआ जिसका नाम पद्मासन रखा गया जिनके द्वारा समरा सुर राक्षस का वध हुआ और रति के साथ उनका विवाह संपन्न हुआ आगे कथा में श्री सुखदेव जी ने राजा परीक्षित को श्री कृष्ण के विवाह का वर्णन किया ´ जिनमें रामवती के साथ सत्यभामा कालिंद्री भद्रा लक्ष्मणा मित्रविंदा और नग्न ज्योति के साथ हुआ| और 16108 विवाह भगवान के एक साथ भीमासुर राक्षस को मारकर संपन्न हुए | उसके यदुवंश में कृष्ण भगवान की संतानों का वर्णन हुआ | प्रत्येक रानी से एक पुत्री और 10 10 पुत्रों की उत्पत्ति हुई | द्वारिका में आनंद ही आनंद हुआ| भगवान गृहस्थ का वर्णन कुंडू काशीराज का वध शिशुपाल वध जरासंध वध र दंत वक्र वध करते दाऊजी की वज्र पात्रा हुई | भगवान के मित्र और सखा श्री सुदामा जी की कथा सुंदर आनंद हुआ | आगे कथा में यदुवंशियों की ब्राह्मणों का श्राप ` नवपोगेश्वर 24 गुरुओं को वर्णन ‘ कृष्णा उद्धव संवाद ‘ दाऊजी का अपने लोग गमन और बाद श्री कृष्ण भगवान भी इस धरा धाम को त्याग कर 125 वर्ष की आयु में अपने परमधाम को लीला का सवर्णन करते हुए पधारे | उसके श्री सुखदेव जी द्वारा कलयुग और उसमें राजाओं का वर्णन अंतिम उपदेश श्री सुखदेव जी की विदाई हुई| परीक्षित मोक्ष के साथ सब दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का वर्णन और फल बताया गया | जीवन के पाप दूर करने को भगवान का नाम संकीर्तन ही उपाय हैं| और दुख दूर करने को प्रभु को प्रणाम ही सर्वश्रेष्ठ उपाय है | सभी भक्तों ने कथा व्यास की पूजा की आरती की और शोभा यात्रा की कथा का विश्राम हुआ |

