गाँव के युवाओ ने रात में सुसायटी में हो रहे चाँवल चोरी को पकड़ा , जिसे संरक्षण देते तथा अपने आपको सरपंच बताकर जनता को धमकाते नजर आए सरपंच पति
पूरे मामले की जानकारी 112 के माध्यम से थाना विधान सभा को दे दिया गया है
राजधानी रायपुर से मात्र 20 किलोमीटर व छत्तीसगढ़ विधान सभा से मात्र 5 किलोमीटर दूरी पर बलौदाबाजार मुख्य मार्ग पर स्थित ग्राम पंचायत दोंदेखुर्द के सुसायटी में सुसायटी संचालक के कर्मचारियों द्वारा रात के करीब 7 बजे के आस पास सुसायटी को खोलकर गाँव के गरीब जनता के लिए सरकार द्वारा आबंटित किये गए चाँवल को चोरी करते हुए गाँव के युवाओ ने रंगे हाथों पकड़ा , तथा इस घटना को युवाओ ने मोबाइल के माध्यम से वीडियो भी बनाया।
तथा इस बात की सूचना देने के लिए युवाओ द्वारा जब गाँव की सरपंच श्रीमती अनंता रेड्डी जी के द्वारा अपना मोबाइल नम्बर कहकर सरकारी ऑफिसों में व जनता के मध्य जो नम्बर प्रचारित किया गया है उसमें कॉल किया गया और सरपंच बोल रहे हो क्या पूछने पर सरपंच पति अम्मी रेड्डी द्वारा बड़े ही रौब से हाँ मैं सरपंच बोल रहा हूँ बोलकर बात किया गया तथा चोरी की घटना का जानकारी देने पर उल्टा गाँव के युवाओं को धमकाया गया कि मैं चौकीदार नजर आ रहा हु क्या तुमको और तुमको कितने दिन हुए है गाँव मे आये हुए ये सब बोलकर जिसे आप ऑडियो रिकॉर्डिंग नम्बर 1 में सुन सकते है।
इतने से ही सरपंच पति का मन नहीं भरा वे तुरंत तमतमाते हुए घटना स्थल पर अपने कुछ पंचों के साथ आकर जिन लड़को ने वीडियो बनाया उन्हें धमकाने लगे वहाँ उस भीड़ ने जब सरपंच पति को मुंहतोड़ जवाब दिया तब वे तमतमाकर फिर से गाँव के लोगो को आफिस में आओगे तब देख लूंगा कहकर तथा गाँव की एक बुजुर्ग महिला के साथ अपशब्द बोलकर उसे डराने धमकाने की कोशिश किया और जब युवाओ ने इसका विरोध किया तब वह तत्काल वहाँ से भाग गए। ये सब ऑडियो रेकॉर्डिंग नम्बर 2 में आप सभी सुन सकते है जिसमे थोड़ा अपशब्दों का भी उपयोग हुआ है।
ये सभी कृत्य पंचायतो के कार्यप्रणालियों पर सवाल खड़ा करता है कि क्या कहि हो रहे चोरियों को ग्राम पंचायत को बताना गलत है तथा एक तरफ हम महिला शक्तिकरण की बात करते हुए महिला सरपंचों को पंचायतो में दिए गए अधिकारों की बात करते है तथा वही दूसरी तरफ सरपंच पतियों का तानाशाही रवैया व अपने पत्नी के जगह अपने आपको सरपंच बताकर पंचायत चलाना एक तरह से राजधानी से लगे हुए इतने करीब के गाँव में ये हाल है तो अन्य सुदूर क्षेत्रों में क्या हाल होगा कह समझ पाना कठिन है।
अब देखना ये है कि इस पर थाना विधान सभा व जनपद , पंचायत जिला पंचायत व खाद्य विभाग के अधिकारी क्या कार्यवाही करते है।

