मुख्यमंत्री के आदेश के बाद लगातार ढाई साल से जमे हुए कर्मचारियों का ट्रांसफ़र की प्रक्रिया चालू हो गयी है। बलौदाबाजार कलेक्टर ने ढाई साल से एक ही जगह पर जमें हुए बाबुओं और पटवारियों की सूची तैयार करने का आदेश जारी किया है। और इधर बिलासपुर में आलम यह है की तेरह चौदह साल से पटवारी और बाबू जमे हुए है एक ही जगह में। कुछ कर्मचारी तो एक ही जगह से सेवनिर्वित्त हो गए। देखना है कि अब बिलासपुर कलेक्टर सारांश मित्तर मुख्यमंत्री के आदेश का कब तक पालन करवा पाते हैं। बिलासपुर सकरी बिल्हा तखतपुर तहसील में वर्षों वर्षों से पटवारी दस साल से ऊपर जमे हुए हैं और इन पर लगातार आरोप लगते रहें है कि एक ही जगह में लगातार जमे रहने से ये खुद बिल्डर भूमाफिया बन चुके हैं। इनके सिंडिकेट और मोनोपाली को कलेक्टर कैसे तोड़ पाते हैं यह भी एक चुनौती है। कोरबा में पी दयानंद ने रातों रात पूरे कोरबा के पटवारियों को एक तहसील से दूसरे तहसील बदल दिया था। उनके जैसा साहस छत्तीसगढ़ के बाक़ी कलेक्टर दिखा पाते है पटवारियों के राजनीतिक रसूख़ के सामने मौन रहते हैं। यह भी देखना बाक़ी है।
ढाई साल से ज़्यादा जमे हुए पटवारियों का होगा ट्रांसफर ……अन्य जिलों में शुरू हुआ अभियान….बिलासपुर में भी होने की संभावना…..पटवारियों के मची खलबली

