अखिल भारतीय काव्य वेबिनार
“सोंधी माटी लोनी बघेली साहित्यिक मंच”, सीधी, मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र ईकाई द्वारा संयुक्त रूप से दिनांक 27 जून रविवार को सायं अखिल भारतीय काव्य वेबिनार का आयोजन किया गया।
वेबिनार का संयोजन डॉ चंद्रिका प्रसाद मिश्र- नाशिक, अध्यक्षता डॉ श्रीनिवास शुक्ल ‘सरस’- सीधी एवं संचालन श्री संजय द्विवेदी- कल्याण-मुम्बई द्वारा किया गया।
उक्त वेबिनार में रायपुर से डॉ श्रीमती मृणालिका ओझा एवं राजेंद्र ओझा के अतिरिक्त अरूण अपेक्षित- इन्दौर, अरूण त्रिपाठी – कल्याण, श्रीमती सुनीता माहेश्वरी – नाशिक, अंजू मोटवानी – नोएडा, सत्यदेव विजय – मुम्बई, राम नरेश तिवारी – मैहर-सतना, डॉ रामस्वरूप साहू- कल्याण- मुम्बई, श्रीमती रोचना भारती- नाशिक, रामकृष्ण सहस्त्रबुद्धे- नागपुर, प्रमोद कुमार भृगुवंशी- चंदौली, सुधा झालानी- नाशिक आदि ने अपना काव्य पाठ किया।
डॉ श्रीमती मृणालिका ओझा-, रायपुर
कई तूफां को समेटकर जीता रहा है वह,
कई पाषाणों को बिन पिघले पीता रहा है वह।
फूलों से भरे बाग का मालिक तो है वही,
क्या बात है कांटो से क्यूं, बिंधता रहा है वह।
डॉ श्रीनिवास शुक्ल ‘सरस’, सीधी
आमंत्रण आया है, पावस के नाम,
मौसम ने लिक्खा है, मौसमी प्रणाम।
पावस ने पत्र दिया, बादल के पास,
प्रतिवेदन पाते ही, उमडा विश्वास।
अरूण अपेक्षित, इन्दौर
बदचलन निती के गर्भ का,
बोझ ढोती हैं सौ पीढ़ियां,
अनुभवों के शिलालेख है,
देह में रेंगती झुर्रियां,
जब न ज्वालामुखी फट सका,
कस गई जेब में मुट्ठियां।
राम नरेश तिवारी, मैहर-सतना
बिजलियों की दावत-ए-वफा
यूं चमन संवरते रहे,
संदली सपन हुए दफन,
स्वप्न फल विचरते रहे।
रामकृष्ण सहस्त्रबुद्धे, नागपुर
शुभप्रभात की कामना, करे रास है आज,
मधुर वचन सबसे कहें, करने मन पर राज।
रंगमंच दुनिया बनी, हम सब है किरदार,
देव – मनुज – दानव सभी, करें परस्पर प्यार।
सुधा झालानी, नाशिक
ग्रीष्म ऋतु में तपती दोपहरी,
जलता सूरज,
जाने कौन पथिक,
फिर भी चलता पथ पर।
राजेन्द्र ओझा, रायपुर
उनके पास भी है,
उनका अपना
बोरिया-बिस्तर।
खुलता है रोज़,
लेकिन इस तरह से,
तह करके रक्खा है,
जैसे खुला ही न हो कभी।
वे सच में यात्री है,
ठिकाना-
आज यहां,
कल कहीं
राजेन्द्र ओझा,
नारायणी साहित्यिक संस्थान, छत्तीसगढ
9575467733
8770391717

