जागेश्वर राजपूत कांग्रेस नेता वा निष्ठावान समाजसेवी की शिकायत पर बड़ी कार्यवाही

रायपुर, शिक्षा विभाग के पूर्व मंत्री के पी.ए. रहे आर.एन.सिंह को वर्ष 2008 में उप संचालक के पद पर नियमा विरूद्ध पदोन्नति दिये जाने के मामले में कांग्रेस नेता एवं झुझारू समाजसेवी जागेश्वर राजपूत द्वारा शिकायत किया गया था। राज्य शासन द्वारा शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संयुक्त संचालक आर.एन.सिंह को पदावनत कर दिया है जो कि वर्तमान में एस.सी.आर.टी. में अपर संचालक के पद पर पदस्थ थे। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की सहमति के बगैर प्रतीक्षा सूची की वैधता समाप्त होने के बाद की गई नियुक्ति को नियमविरूद्ध मानते हुए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आदेश जारी किया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश से शिक्षा विभाग में खलबली मची हुईं है। आर.एन.सिंह पूर्व मंत्री केदार कश्यप, पूर्व मंत्री ब्रजमोहन अग्रवाल एवं पूर्व मंत्री अजय चन्द्राकर के  के निजी स्थापना में पदस्थ रहे है एवं हमेशा चर्चा में ही रहे है। इनकी कार्यशैली एवं इनकी पदोन्नति के संबंध में कांग्रेस के प्रदेश सह सचिव जागेश्वर राजपूत ने दस्तावेज के साथ शिकायत मंत्रालय एवं उच्च स्तर में प्रस्तुत किया था । 
 क्या है मामला

शिकायतकर्ता श्री जागेश्वर राजपूत द्वारा बताया गया कि वर्ष 2003 में छ.ग.लोक सेवा आयोग द्वारा उपसंचालक पद हेतु साक्षात्कार का आयोजन किया गया था जिसमें 33.3 अंक पाकर आरोपी आधिकारी आर.एन.सिंह 9वें स्थान पर थे, किन्तु छलपूर्वक इन्हें तीसरे स्थान पर बताकर प्रतीक्षा सूची में पहले स्थान पर रखा गया जबकि श्रीमति किश्वर बेगम, श्री उमेद लाल जायसवाल, डाॅ.राजेन्द्र प्रसाद यदू आदि इनसे मेरिट में काफी उपर थे। आरोपी आर.एन.सिंह को फायदा पहुचाने के लिए उन्हें प्रतीक्षा सूची में पहले स्थान पर रखा गया। श्री सिंह ने उक्त प्रतिक्षा सूची को आधार बनाकर तत्कालीन सचिव, स्कूल शिक्षा डाॅ.आलोक शुक्ला को आवेदन प्रस्तुत किया गया था जो कि निरस्त कर दिया गया था किन्तु वर्ष 2008 में मंत्री अजय चन्द्राकर के निजी स्थापना में रहते हुए श्री चन्द्राकर ने फिर से नस्ति बुलाकर प्रतीक्षा सूचि की वैधता खत्म होने के बाद भी उप संचालक नियुक्त करने के निर्देश दिये गये। जिसमें पूर्व शिक्षा सचिव श्री नंद कुमार द्वारा लोक सेवा आयोग से अनुमति प्राप्त किये जाने एवं प्रतीक्षा सूची की वैधता की जांच के लिये लेख किया था जिसको दरकिनार कर राजनैतिक दबावपूर्वक इनकी नियुक्ति कराई गई तथा शासन को लगभग 2 करोड़ रूपये का चूना लगया गया इसकी भी जांच की जानी चाहिए। 
    लंबी लड़ाई के बाद आज जागेश्वर राजपूत को जीत हासिल हुई है। श्री जागेश्वर राजपूत द्वारा यह भी बताया गया कि पूर्व शासनकाल में हुई और भी गड़बडियों के खिलाफ वे लड़ाई लड़ रहे है और जन उपयोगी और मामलों में वे लड़ाई के लिए तैयार है।

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