प्रदेश महामंत्री और एआईसीसी सदस्य पंकज शर्मा ने महाकवि तुलसीदास जी की पुण्यतिथि पर किया नमन।

हाड़ माँस को देह मम, तापर जितनी प्रीति। तिसु आधो जो राम प्रति, अवसि मिटिहि भवभीति।।

रायपुर, 23 अक्टूबर 2020/

प्रदेश महामंत्री और एआईसीसी सदस्य पंकज शर्मा ने महान कवि संत तुलसीदास की पुण्यतिथि पर उन्हें स्मरण करते हुए नमन किया।

 पंकज शर्मा ने कहा तुलसीदास ने अपने कृतित्व में सभी संप्रदायों के प्रति समन्वयकारी दृष्टिकोण अपनाकर हिंदू समाज को एकता के सूत्र में बांधने का कार्य किया।

पंकज शर्मा ने कहा गोस्वामी तुलसीदास एक महान हिंदू कवि संत, सुधारक के साथ-साथ दार्शनिक भी थे और उन्होंने कई लोकप्रिय पुस्तकों की रचना की। वह भगवान राम के प्रति समर्पण और महान महाकाव्य, रामचरितमानस के लेखक होने के लिए प्रसिद्ध हैं ।

उन्हें हमेशा वाल्मीकि (संस्कृत और हनुमान चालीसा में रामायण के मूल संगीतकार) के पुनर्जन्म के रूप में प्रशंसा मिली। गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपना पूरा जीवन समाज सुधार के लिए समर्पित किया।

उनके वाक्य ….हाड़ माँस को देह मम, तापर जितनी प्रीति। तिसु आधो जो राम प्रति, अवसि मिटिहि भवभीति।। अर्थात् जितना प्रेम हाड़ मांस के शरीर से है अगर उतना प्रेम प्रभु श्री राम से किया होता तो भवसागर पार हो गए होते। पत्नी की इस बात ने तुलसी दास के जीवन की दिशा ही बदल दी, और वे राम की भक्ति में रम गये।

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