युवा समाज सेवक विशाल कुकरेजा ने पारंपरिक पर्व पोला की प्रदेशवासियों को दी बधाई।

युवा समाज सेवक विशाल कुकरेजा ने पारंपरिक पर्व पोला की प्रदेशवासियों को दी बधाई।

प्रदेश में किसानों को अच्छे फसल की प्राप्ति हो ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ।

सेंट्रल सिंधी पंचायत युवा विंग के प्रदेशाध्यक्ष विशाल कुकरेजा ने भाद्रपद मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाले पोला त्योहार की प्रदेशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। विशाल कुकरेजा ने कहा कि पारंपरिक पर्व पोला, खरीफ फसल के द्वितीय चरण का कार्य पूरा हो जाने व फसलों के बढ़ाने की खुशी में मनाया जाता है। इस दिन किसानों द्वारा बैलों की पूजन कर कृतज्ञता दर्शाते हुए प्रेम भाव अर्पित किया जाता है।क्योंकि बैलों के सहयोग से ही खेती कार्य किया जाता है। वही पोला पर्व की पूर्व रात्रि को गर्भ पूजन किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन अन्न माता गर्भ धारण करती है। अर्थात धान के पौधों में दूध भरता है। इसी कारण पोला के दिन किसी को भी खेतों में जाने की अनुमति नही होती। प्रतिष्ठित सभी देव – देवताओं के पास जाकर विशेष पूजा – आराधना करते हैं। किसान गौमाता और बैलों को स्नान कराकर श्रृंगार करते हैं,सिंग और खुर यानी पैरों में माहुर,लगाएंगे,गले में घुंघरू, घंटी,कौड़ी के आभूषण पहनाकर पूजा करते है।

विशाल कुकरेजा ने बताया कि,परंपराओं अनुसार ग्रामीण इलाकों में युवतियों नंदी बैल,साहड़ा देव की प्रतिमा स्थल पर पोरा पटकने जाएंगी।नंदी बैल के प्रति आस्था प्रकट करने के लिए अपने – अपने घर से लाए गए मिट्टी के खिलौने को पटककर फोड़ेंगी।मान्यता है कि, कान्हा जब छोटे थे और वासुदेव-यशोदा के यहाँ रहते थे, तब कंस ने कई बार कई असुरों को उन्हें मारने भेजा था, जिसे भी कृष्ण ने मार दिया था। वह दिन भाद्रपद अमावस्या का था इसीलिए इसे पोला कहा जाता है

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