कांग्रेस प्रदेश सचिव राजेन्द्र बंजारे ने केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखी टिप्पणी कर कहा कि 526 करोड़ का राफेल को 1670 करोड़ में खरीदी कर भाजपा ने किया करोड़ो का भष्टाचार-
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव एवम पूर्व जनपद अध्यक्ष राजेन्द्र बंजारे ने केंद्र की मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि राफेल खरीदी में सयुक्त संसदीय कमेटी से बिना अनुमोदन के राफेल की खरीदी कर भाजपा ने करोड़ो की भस्टाचार करने की आशंका है। यूपीए सरकार ने राफेल खरीदी के लिए एक राफेल की 526 करोड़ कीमत तय किया था परंतु मोदी सरकार ने 1670 करोड़ में एक राफेल खरीदी की जिसमे भस्टाचार की बू आ रही है। कांग्रेस प्रदेश सचिव राजेन्द्र बंजारे ने कहा कि वायुसेना से बिना पूछे मोदी जी ने फ्रांस में जाकर राफेल खरीदी का समझौता कर लिया, इसके बाद तय कीमत से ज्यादा पैसा दे दिया, सरकार को माननीय उच्चतम न्यायालय ने क्लीन चिट नही दी है सिर्फ माननीय न्यायालय ने कहा कि कीमत तय करने का अधिकार कोर्ट को नही है राफेल का मुद्दा संसद में हल हो सकता है, सुप्रीम कोर्ट में नही। कांग्रेस प्रदेश सचिव ने कहा कि ऐसे वित्तीय अनिमितताओं के मामले को जेपीसी से जांच कराई जाए उन्होंने जेपीसी के गठन का उद्देश्य बताते हुए कहा कि
संसदीय निगरानी अधिक प्रभावी और कुशलतापूर्वक हो इसके लिये संसद को एक ऐसी एजेंसी की ज़रूरत होती है जिस पर संपूर्ण सदन का विश्वास हो।
अन्य बातों के साथ-साथ इस उद्देश्य की प्राप्ति संसद अपनी समितियों के माध्यम से करती है जिनमें उसके अपने कुछ सांसद होते हैं। इसके तहत संसद के समक्ष पेश किये गए किसी विशेष विधेयक या किसी सरकारी गतिविधियों में वित्तीय अनियमितताओं के मामले की जाँच करने के लिये JPC का गठन किया जाता है। मोदी सरकार में जरा सी भी नैतिकता बची है तो राफेल खरीदी की जेपीसी से इसकी जांच कराए दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। यहां गौर करने वाली बात है कि रिलायंस डिफेंस का विमान बनाने का कोई अनुभव नहीं है, सौदे से बमुश्किल 10 दिन पहले यह कंपनी बनी थी जबकि सार्वजनिक क्षेत्र की एचएएल का विमानों की मैन्युफैक्चरिंग का लंबा अनुभव होने के बावजूद रिलायंस ग्रुप को फायदा पहुचाकर राफेल खरीदी में भष्टाचार किया जाने की आशंका है।प्रदेश कांग्रेस सचिव राजेन्द्र बंजारे ने राफेल को लेकर वायुसेना के जांबाजों को बधाई देते हुए राफेल का भारत में स्वागत किया। वायुसेना के जांबाज लड़ाकुओं को बधाई. आज हर देशभक्त ये जरूर पूछे- 526 करोड़ का एक राफेल अब 1670 करोड़ में क्यों? 126 राफेल की बजाय 36 ही क्यों? मेक इन इंडिया की बजाय मेक इन फ्रांस क्यों? राफेल खरीदी में 5 साल की देरी क्यों?
राफेल सौदे के लिए 2012 में की गई कांग्रेस की मेहनत आखिरकार रंग लाई और यह समझौता साकार साबित हुआ, लेकिन कांग्रेस और बीजेपी की डील में बड़ा अंतर है जिसमें बीजेपी के घोटाले सामने आए हैं।

