EU के देशों ने ईरान के विरोध में प्रक्रिया शुरू की

पैरिसयूरोपीय संघ के तीन देशों ने मंगलवार को एक प्रक्रिया की शुरुआत की जिसमें ईरान पर परमाणु कार्यक्रम को संक्षिप्त करने के 2015 के समझौते का पालन करने में विफल रहने के आरोप लगाए गए हैं। इस पहल से ईरान क्षुब्ध है और बढ़ते तनाव के बीच तेहरान ने चेतावनी दी है। ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने कहा कि वे समझौते को लेकर प्रतिबद्ध बने रहे जबकि 2018 में अमेरिका के समझौते के बाहर होने से यह सवालों के घेरे में है।

उनके बयान जारी होने के बावजूद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने संकेत दिए कि वह अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के साथ हुए व्यापक समझौते को प्राथमिकता देंगे न कि 2015 के समझौते को। अमेरिकी हमले में ईरान के शीर्ष कमांडर कासिम सुलेमानी के मारे जाने और कुछ दिनों बाद तेहरान की यह स्वीकारोक्ति कि उसने यूक्रेन के विमान को मार गिराया था। इसके बाद पश्चिमी देशों और ईरान के मध्य चल रहे तनाव के बीच तथाकथित विवाद व्यवस्था प्रक्रिया की शुरुआत हुई है। यह प्रक्रिया दो देशों के बीच चल रहे विवाद का समाधान करने से जुड़ी हुई है।

तीनों यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों ने कहा कि ईरान अपनी प्रतिबद्धताओं से पिछले वर्ष मई के बाद से लगातार पीछे हट रहा है। बयान में कहा गया है, ‘इसलिए ईरान के कार्यों को देखते हुए हमारे पास कोई विकल्प नहीं है।’ वियना में 2015 में हुए समझौते को ज्वाइंट कम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ ऐक्शन के नाम से जाना जाता है। इसमें प्रावधान है कि एक पक्ष संयुक्त आयोग के समक्ष दूसरे पक्ष द्वारा अनुपालन नहीं करने का दावा कर सकता है। अगर मुद्दा आयोग द्वारा नहीं सुलझाया जाता है तो यह फिर सलाहकार बोर्ड के पास जाता है और फिर यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के समक्ष जाता है जो फिर से प्रतिबंध लगा सकता है।

एक राजनयिक सूत्र ने वियना में बताया कि इस प्रक्रिया की पहली बैठक महीने के अंत में ऑस्ट्रिया में हो सकती है जिसमें यूरोपीय देश, ईरान और समझौते में शामिल अन्य पक्ष, चीन और रूस हिस्सा ले सकते हैं। ट्रंप के समझौते से अलग होने के बाद ईरान ने यूरेनियम संवर्द्धन के लिए संवेदनशील गतिविधियां तेज कर दीं, जिनका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में हो सकता है। यूरेनियम संवर्द्धन में इस्तेमाल होने वाले सेंट्रीफ्यूज की संख्या की सीमा जनवरी में ईरान द्वारा हटाने के कदम के बाद यूरोपीय देशों ने यह प्रणाली शुरू की। यूरोपीय देशों पर बरसते हुए तेहरान ने पलटवार की चेतावनी दी। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, ‘निश्चित रूप से अगर यूरोपीय देशों ने इस प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल किया तो उन्हें भी परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए।’

Source: International

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *