
संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ सबसे पहले जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी में विरोध देखने को मिला जिसके बाद जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्र भी सड़क पर उतरे। इसके बाद जेएनयू में कुछ नकाबपोश लोगों ने हिंसा फैलाई।
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गावसकर ने 26वें लाल बहादुर शास्त्री स्मृति व्याख्यान के दौरान कहा, ‘देश मुश्किल में है। हमारे कुछ युवा सड़कों पर उतरे हुए हैं जबकि उन्हें अपनी कक्षाओं में होना चाहिए। सड़कों पर उतरने के लिए उनमें से कुछ को अस्पताल जाना पड़ा।’
70 साल के गावसकर हालांकि उस भारत में विश्वास रखते हैं जहां के लोग संकेट के इस समय से उबर जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘इनमें से अधिकतर कक्षाओं में हैं, अपना भविष्य बनाने और भारत को आगे ले जाने का प्रयास कर रहे हैं। एक देश के रूप में हम तभी आगे बढ़ सकते हैं, जब हम सभी एकजुट हों। जब हम सभी सामान्य भारतीय होंगे। खेल ने हमें यही सिखाया है।’
Source: Sports

