
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दोनों पार्टी के बड़े नेताओं ने पार्टी के मिड-लेवल के पदाधिकारियों को निर्देश दिया था। निर्देश मिलने के बाद राज्य में सामान्य राजनीतिक गतिविधियों को फिर से शुरू करने के लिए बैठकें बुलाई गई थीं। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि नैशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला को अपने सहयोगियों, पार्टी उपाध्यक्ष और बेटे उमर अब्दुल्ला व अन्य लोगों से बात करने के लिए मोबाइल फोन दिया गया है। वहीं पीडीपी की नेता महबूबा मुफ़्ती को लैंडलाइन फोन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
नैशनल कॉन्फ्रेंस के प्रांतीय सचिव शौकत मीर ने बताया कि प्रोविंशियल बैठकें महीने में एक बार आयोजित की जाती थीं, लेकिन 5 अगस्त के बाद पार्टी की सभी गतिविधियां अचानक बंद हो गई थीं। प्रोविंशियल प्रेसिडेंट नासिर वानी भी हिरासत में लिए गए लोगों शामिल थे। मीर ने कहा कि सोमवार की बैठक में 100 से अधिक पदाधिकारियों ने भाग लिया।
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बैठक के बाद में जारी एक बयान में नैशनल कॉन्फ्रेंस ने पार्टी के अध्यक्ष और श्रीनगर से लोकसभा सांसद फारूक अब्दुल्ला को लंबे समय तक नजरबंद किए जाने को ‘असंवैधानिक’ बताया है। वहीं, पीडीपी के स्टेट सेक्रटरी अब्दुल रहीम कोशीन ने कहा, ‘पार्टी उम्मीद कर रही थी कि महबूबा पांच महीने बाद हो रही इस बैठक में भाग लेने में सक्षम होंगी।’ उन्होंने कहा, ‘पार्टी का सीनियर नेताओं को ही कोई फैसला लेने का हक है, लेकिन सभी नजरबंद है। हमने महबूबा मुफ्ती के साथ बैठक करने की अनुमति मांगी थी, लेकिन दुर्भाग्य से हमें अनुमति नहीं दी गई।’
कोशीन के अनुसार, पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल डिविजनल एडमिनिस्ट्रेशन से मिलेगा और पार्टी अध्यक्ष से जाकर मिलने की अनुमति लेगा। उन्होंने कहा, ‘आर्टिकल 370 पर हमारी पार्टी का आधिकारिक रुख, महबूबा मुफ़्ती के छूटने के बाद ही सामने आएगा।’ कोशीन ने आर्टिकल 370 को हटाए जाने के बाद से कश्मीर में विकास परियोजनाओं को लेकर प्रशासन के दावों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि अगस्त के बाद क्षेत्र में कोई ठोस विकास नहीं हुआ है।
Source: National

