CAA पर बोस के पोते, 'हिंदू राष्ट्र नहीं है भारत'

नई दिल्लीनागरिकता संशोधन कानून को लेकर अब बीजेपी के भीतर से भी असहमति के स्वर उभरने लगे हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के वंशज और पश्चिम बंगाल बीजेपी के उपाध्यक्ष चंद्र कुमार बोस ने इससे असहमति जताई है। बोस ने कहा कि धर्म के आधार पर नागरिकता नहीं दी जा सकती। भारत हिंदू राष्ट्र नहीं है। अगर आप इसे हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं तो पहले संविधान बदलें। बोस ने सबसे पहले ट्वीट कर अपनी असहमति जताई। एनबीटी से बातचीत में उन्होंने कहा कि सीएए सही है, लेकिन उसमें मुस्लिमों को भी जोड़ना होगा। विपक्ष के लोग बीजेपी पर एंटी मुस्लिम होने का आरोप लगा रहे हैं और अगर सीएए में मुस्लिमों को भी जोड़ देते हैं तो विपक्ष का मुंह बंद हो जाएगा।

धर्म के आधार पर नागरिकता गलत
पश्चिम बंगाल में बीजेपी के बड़े नेताओं में से एक बोस ने कहा कि मैं किसी भी कम्युनिटी चाहे वह अल्पसंख्यक हो या बहुसंख्यक किसी के तुष्टिकरण का समर्थन नहीं करता। सबके लिए कानून बराबर होना चाहिए। मैं यूनिफॉर्म सिविल कोड को भी सपॉर्ट करता हूं, लेकिन धर्म के आधार पर किसी को नागरिकता नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि यह कहा जा रहा है कि जिनका उत्पीड़न हुआ है वह यहां आए हैं, लेकिन कोई कैसे प्रमाण कर सकता है कि 30-40 साल पहले उत्पीड़न हुआ था। कानून फूलप्रूव होना चाहिए। उत्पीड़न एक विस्तृत टर्म है।

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बीजेपी नेता ने कहा, ‘नागरिकता संशोधन कानून में उत्पीड़न जैसा कोई शब्द है ही नहीं फिर आप उसे कैसे लागू करेंगे। सिर्फ मौखिक तौर पर बोलने का कानून की नजर में कोई मायने नहीं होता।’ पश्चिम बंगाल बीजेपी के उपाध्यक्ष बोस ने कहा कि बलूच और अहमदिया भी मुस्लिम है। पाकिस्तान-अफगानिस्तान में इनका भी उत्पीड़न होता है तो इन्हें क्यों नहीं आने दे रहे। यह बातें साफ होनी चाहिए। हमारे पड़ोसी देश में जिन पर उत्पीड़न होता है उन्हें हम नागरिकता देने के लिए तैयार हैं। यह धर्म के आधार पर नहीं होना चाहिए। मुस्लिम के लिए अलग देश बनाया तो उन्होंने बनाया, हमने नहीं बनाया। हम हिंदू राष्ट्र नहीं हैं। अगर आप बनाना चाहते हैं तो फिर संविधान बदलिए। अभी संविधान के मुताबिक भारत सभी धर्मों के लोगों के लिए है। दुनिया में भारत इकलौता देश है जो सेक्युलर है।

पीएम ने की डैमेज कंट्रोल की कोशिश
देश भर में एनआरसी को लेकर गृह मंत्री अमित शाह का संसद में अलग बयान और दिल्ली की रैली में पीएम नरेंद्र मोदी के अलग बयान पर बोस ने कहा कि यह विरोधाभास तो दिख रहा है। बोस ने कहा कि पीएम बहुत प्रैक्टिकल इंसान हैं। वह देख रहे हैं कि देश में आग लगी है तो इसे कंट्रोल तो करना पड़ेगा। उन्होंने डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश भी की है, लेकिन डैमेज तो हो चुका है। एनआरसी असम के लिए था क्योंकि वह असम समझौते में तय हुआ था। असम के साथ इसे बाकी देश में लागू नहीं कर सकते।

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पश्चिम बंगाल में नुकसान की आशंका
यह कहा जा रहा है कि 2021 के पश्चिम बंगाल चुनाव को ध्यान में रखकर नागरिकता संशोधन कानून तैयार किया गया है। यह पूछने पर बोस ने कहा कि बंगाल में हमारा (बीजेपी का) जो भी चांस था इसकी वजह से तो वह एकदम पीछे चला जाएगा। ज्यादातर बंगाली इसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं। 48 पर्सेंट आबादी पश्चिम बंगाल में बंगालियों की है। अगर ये लोग साथ नहीं देंगे तो कैसे जीतेंगे? उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून को लेकर मैंने यह राय पार्टी स्तर पर भी बताई। कई बार पीएम और होम मिनिस्टर से मिलने का वक्त मांगा, लेकिन वक्त नहीं मिला। बोस ने कहा कि मैं पार्टी नहीं छोड़ूंगा। मेरी राय रखना मेरा अधिकार है। मुझे लगता है कि हमने गलत कदम उठाया है। हम एक के बाद एक राज्य खोते जा रहे हैं। बीजेपी का होने के नाते मुझे अपनी पार्टी को बचाना भी है। परिवार गलत रास्ते में जा रहा हैं तो वह बताना मेरी जिम्मेदारी है। अगर गलत नीति को हम सपोर्ट करेंगे तो हम खुद भी डूबेंगे और पार्टी भी डूबेगी।

Source: National

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