असम में बुरा, देश में अच्छा कैसे NRC: पवन वर्मा

नई दिल्ली
नागरिकता कानून पर जहां देशव्यापी विरोध देखने को मिल रहा है, वहीं संसद में इसका समर्थन करने वाली पार्टी जेडीयू का नेतृत्व दो धड़ों में बंट गया है। एक पाले में खड़े नेता इस कानून के समर्थन में हैं जबकि दूसरे पाले के नेता इसे भेदभावपूर्ण और संविधान विरोधी करार दे रहे हैं। पार्टी के सीनियर लीडर और पूर्व राजनयिक पवन कुमार वर्मा तो केंद्र सरकार के इस तर्क को भी सिरे से नकार रहे हैं कि नागरिकता कानून और एनआरसी अलग-अलग हैं। वह सवाल उठाते हैं कि जिस एनआरसी का असम में खुद बीजेपी ने विरोध किया हो, वही एनआरसी पूरे देश के लिए कैसे ठीक हो सकता है? से बात की एनबीटी नैशनल ब्यूरो के विशेष संवाददाता नरेंद्र नाथ ने। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश…

प्रश्न: सरकार का कहना है कि नागरिकता कानून से मौजूदा नागरिकों का हित किसी भी तरह प्रभावित नहीं हो रहा है। फिर आपके विरोध के पीछे क्या तर्क है?

मेरा मानना है कि नागरिकता संशोधन कानून भेदभावपूर्ण और संविधान के विपरीत है। नागरिकता कानून और एनआरसी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। अभी इसका विरोध नहीं किया गया तो इसके और भयावह परिणाम सामने आएंगे। विभाजन की दूसरी त्रासदी झेलनी पड़ सकती है। इसके लिए कोई जनादेश नहीं मिला है। विडंबना देखिए, जिस एनआरसी का असम में खुद बीजेपी ने विरोध किया उसे देश भर में लागू करने जा रही है।

प्रश्न: नीतीश कुमार ने इस मुद्दे पर सरकार को समर्थन दे दिया। आप क्या वजह मानते हैं?

अभी तक मुझे भी यह बात समझ में नहीं आई कि नीतीश जी, जिन्होंने पार्टी के हर फोरम में इसका विरोध किया था वह अचानक इसके समर्थन में कैसे आ गए? ऐसा उन्होंने क्यों किया, यह बात तो वह खुद ही बता सकते हैं। अगर अभी भी वह प्रतिबद्ध हैं कि बिहार में एनआरसी लागू नहीं करेंगे तो उन्हें सार्वजनिक बयान देने की जरूरत है। इस मामले में अभी तक उन्होंने कोई बयान नहीं दिया है। बिहार में बीजेपी के साथ गठबंधन पहले भी रहा है, लेकिन पार्टी कभी इस तरह पिछलग्गू बन कर नहीं रही।

प्रश्न: आपको लगता है कि इससे ‘ब्रैंड नीतीश’ को नुकसान हुआ है या आगे होगा?

नीतीश कुमार से देश को बहुत अपेक्षा रही है, लेकिन निश्चित तौर पर लोग उनसे निराश हैं। वह ऐसे नेता के रूप में जाने जाते रहे हैं जो अपने विचार रखने के सवाल पर कभी किसी के दबाव में नहीं आए। इस मामले में बीजेपी को समर्थन देकर उन्होंने उम्मीद जरूर तोड़ी है।

प्रश्न: क्या एनआरसी को रोकने में राज्य सफल होंगे?

यह केंद्र का निर्णय होगा, लेकिन क्रियान्वयन राज्य सरकार ही करेगी। अब जब कई प्रदेश विरोध कर रहे हैं तो इसे लागू करना आसान नहीं होगा।

प्रश्न: कहा जाता है कि राजनीतिक रूप से बीजेपी को इसका लाभ हो सकता है। आप सहमत हैं?

बीजेपी को यह बहुत बड़ा भ्रम हो चुका है कि सिर्फ वही हिंदुओं की संरक्षक है। हिंदू या मुस्लिम दोनों ही इस कानून के खिलाफ हैं। यह मसला हिंदू मुस्लिम का है ही नहीं। नोटबंदी की तरह गरीबों को अधिक दिक्कत होगी। वंचित वर्ग इसमें फंसेगा। जिस तरह देश के अंदर माहौल बन रहा है, घृणा बढ़ रही है, अधिकतर हिंदू भी इससे खुश नहीं होंगे। हम भारतीय और हिंदू स्वाभाविक तौर पर सहिष्णु हैं जिनके समाज में सभी के लिए जगह है। और एक बात यह भी कि सामाजिक सद‌्भाव से ही आर्थिक विकास होगा।

प्रश्न: आप डिप्लोमैट भी रहे हैं, इस मुद्दे पर दुनियाभर से आ रही प्रतिक्रिया को आप किस तरह देख रहे हैं?

पूरे विश्व में भारत की अलग पहचान रही है। भारत उन देशों में है जहां हमेशा से लोगों को सम्मान मिलता रहा है बिना किसी भेदभाव के। भारत के लोकतंत्र की मिसाल पूरे विश्व में दी जाती रही है। जब इस पहचान में दरार पड़ने लगती है तो इसका बहुत गलत संदेश जाता है। जब धर्मनिरपेक्ष देश में सरकार का एक समुदाय के खिलाफ और दूसरे समुदाय के पक्ष में काम करने का संदेश जाता है तो वैश्विक समाज में भारत की छवि जरूर प्रभावित होती है। इससे आर्थिक हित भी प्रभावित होते हैं। इस तरह के माहौल में विदेशी निवेश भी प्रभावित होगा। भारत की आर्थिक विश्वसनीयता भी संदेह में आएगी। पिछले कुछ दिनों में भारत की जो नकारात्मक तस्वीर बनी है, वह बहुत ही चिंता करने वाली है और उसे तुरंत ठीक करने की जरूरत है।

प्रश्न: आपका राजनीतिक निर्णय क्या होगा? जेडीयू में ही रहेंगे या अलग होंगे?

मेरा जेडीयू में रहना अब मुश्किल हो गया है। नागरिकता कानून पर मेरी ही पार्टी ने मुझे ठेस पहुंचाई है। अब आगे क्या करता हूं यह आने वाले दिनों में बताऊंगा। अभी भी मेरा विरोध इस निर्णय पर कायम है और मेरा जो विरोध है, वह पार्टी संविधान के अनुसार है। नीतीश कुमार को सार्वजनिक रूप से बयान देने की जरूरत है जिससे पार्टी का स्टैंड साफ हो जो कि अभी नहीं है।

Source: National

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